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मासूमों की मौत के मामले में तेल और आटे के नमूले लिए
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:09 AM IST
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बेहट (सहारनपुर)। मिर्जापुर थाना क्षेत्र के चक अबाबाकरपुर नौगांवा में हुई दो मासूमों की मौत के बाद शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम को जांच के दौरान मृतक बच्चों के घर से सल्फास के दो पैकेट मिले। संदेह होने पर पुलिस को जानकारी दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की। टीम ने घर में इस्तेमाल किए जा रहे आटे और सरसों के तेल के नमूने भी लिए, जिन्हें जांच के लिए आगरा लैब भेजा गया है। अब पुलिस ने भी संदेह के आधार पर अपनी जांच शुरू कर दी है।
बृहस्पतिवार को मिर्जापुर थाना क्षेत्र के चक अबाबाकरपुर नौगांवा में रविंद्र के दो मासूम बच्चों शिवा (6) एवं नंदिनी (3) की बार-बार उल्टी लगने से हालत बिगड़ गई थी, जिनकी अस्पताल में पहुंचने पर मौत हो गई थी। बच्चों की मौत की वजह जाने के लिए शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम में शामिल जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर शिवांका गौड़, इंस्पेक्टर डीपी सिंह, डॉ. विकास, डॉ. कैलाश सैनी, विनोद कुमार, सुनील कुमार, डॉ. शमशेर ने मृतक बच्चों के परिजनों एवं ग्रामीणों से जानकारी ली। घर में रखी खाने पीने की वस्तुओं की जांच की। ग्रामीणों ने बताया, कि बच्चों द्वारा की गई उल्टी के संपर्क में आने से एक पड़ोसी की 11 मुर्गियां भी मर गई, इस पर टीम को खाने में जहर होने का संदेह हुआ। टीम ने उनके घर की तलाशी ली तो आटे के कनस्तर के पास से सल्फास के दो पाउच मिले। पाउच मिलने पर टीम ने तुरंत थाना मिर्जापुर पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना पर पहुंची थाना मिर्जापुर पुलिस ने मृतक बच्चों के पिता रविंद्र से पूछताछ की। रविंद्र ने बताया कि छह जून की दोपहर में उसकी पत्नी ने बच्चों के कहने पर पराठे बनाए थे, जिनके खाने के बाद से ही बच्चों की तबीयत बिगड़ती चली गई और उसने गांव में ही एक चिकित्सक से दवाई दिलवाई, जिससे दवाई लेने पर उनको आराम मिल गया था। बृहस्पतिवार की सुबह फिर से बच्चों की हालत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने पर एक-एक करके दोनों ने दम तोड़ दिया। रविंद्र ने पुलिस को बताया कि बड़े बेटे निशांत (12) एवं उसकी पत्नी रूबी को भी उल्टियां लगी थी, लेकिन वह दोनों दवाई लेने के बाद ठीक हो गए। पूछताछ के बाद पुलिस ने मौके से मिले पाउच कब्जे में ले लिए और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पराठों में प्रयोग किए गए आटे एवं सरसों के तेल के नमूने भी लिए। टीम के सदस्यों ने बताया कि नमूनों को जांच के लिए आगरा फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। इसके बाद टीम रविंद्र, उसकी पत्नी रूबी एवं बेटे निशांत को भी अपने साथ जिला अस्पताल ले गए। बताया कि उनका मेडिकल चेक अप कराया जाएगा।
मृतक बच्चों के घर से मिले सल्फास के पाउच काफी पुराने है, जो सील बंद हैं। दूसरे सल्फास अपना असर तुरंत दिखाती है, जबकि बच्चों की मौत 24 घंटे बाद हुई है। फिर भी पुलिस घटना की गंभीरता से जांच कर रही है।
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- प्रेमप्रकाश शर्मा, थाना प्रभारी मिर्जापुर
बच्चों की मौत के मामले को विभाग ने गंभीरता से लिया है। जांच के लिए चिकित्सकों की टीम मौके पर भेजी गई थी। जिन्हें पीड़ित के घर से आटे के पास से सल्फॉस के पैकेट मिले हैं। इससे साफ हो जाता है कि आटे में किसी भी तरह से सल्फॉस मिला था, जिसके पराठे खाने से परिवार की तबीयत बिगड़ी और दो बच्चों की मौत हो गई।
- डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
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बृहस्पतिवार को मिर्जापुर थाना क्षेत्र के चक अबाबाकरपुर नौगांवा में रविंद्र के दो मासूम बच्चों शिवा (6) एवं नंदिनी (3) की बार-बार उल्टी लगने से हालत बिगड़ गई थी, जिनकी अस्पताल में पहुंचने पर मौत हो गई थी। बच्चों की मौत की वजह जाने के लिए शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम में शामिल जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर शिवांका गौड़, इंस्पेक्टर डीपी सिंह, डॉ. विकास, डॉ. कैलाश सैनी, विनोद कुमार, सुनील कुमार, डॉ. शमशेर ने मृतक बच्चों के परिजनों एवं ग्रामीणों से जानकारी ली। घर में रखी खाने पीने की वस्तुओं की जांच की। ग्रामीणों ने बताया, कि बच्चों द्वारा की गई उल्टी के संपर्क में आने से एक पड़ोसी की 11 मुर्गियां भी मर गई, इस पर टीम को खाने में जहर होने का संदेह हुआ। टीम ने उनके घर की तलाशी ली तो आटे के कनस्तर के पास से सल्फास के दो पाउच मिले। पाउच मिलने पर टीम ने तुरंत थाना मिर्जापुर पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना पर पहुंची थाना मिर्जापुर पुलिस ने मृतक बच्चों के पिता रविंद्र से पूछताछ की। रविंद्र ने बताया कि छह जून की दोपहर में उसकी पत्नी ने बच्चों के कहने पर पराठे बनाए थे, जिनके खाने के बाद से ही बच्चों की तबीयत बिगड़ती चली गई और उसने गांव में ही एक चिकित्सक से दवाई दिलवाई, जिससे दवाई लेने पर उनको आराम मिल गया था। बृहस्पतिवार की सुबह फिर से बच्चों की हालत बिगड़ गई और अस्पताल ले जाने पर एक-एक करके दोनों ने दम तोड़ दिया। रविंद्र ने पुलिस को बताया कि बड़े बेटे निशांत (12) एवं उसकी पत्नी रूबी को भी उल्टियां लगी थी, लेकिन वह दोनों दवाई लेने के बाद ठीक हो गए। पूछताछ के बाद पुलिस ने मौके से मिले पाउच कब्जे में ले लिए और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पराठों में प्रयोग किए गए आटे एवं सरसों के तेल के नमूने भी लिए। टीम के सदस्यों ने बताया कि नमूनों को जांच के लिए आगरा फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। इसके बाद टीम रविंद्र, उसकी पत्नी रूबी एवं बेटे निशांत को भी अपने साथ जिला अस्पताल ले गए। बताया कि उनका मेडिकल चेक अप कराया जाएगा।
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मृतक बच्चों के घर से मिले सल्फास के पाउच काफी पुराने है, जो सील बंद हैं। दूसरे सल्फास अपना असर तुरंत दिखाती है, जबकि बच्चों की मौत 24 घंटे बाद हुई है। फिर भी पुलिस घटना की गंभीरता से जांच कर रही है।
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- प्रेमप्रकाश शर्मा, थाना प्रभारी मिर्जापुर
बच्चों की मौत के मामले को विभाग ने गंभीरता से लिया है। जांच के लिए चिकित्सकों की टीम मौके पर भेजी गई थी। जिन्हें पीड़ित के घर से आटे के पास से सल्फॉस के पैकेट मिले हैं। इससे साफ हो जाता है कि आटे में किसी भी तरह से सल्फॉस मिला था, जिसके पराठे खाने से परिवार की तबीयत बिगड़ी और दो बच्चों की मौत हो गई।
- डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।