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कार्यों में अनियमिता पर ड्रग इंस्पेक्टर निलंबित
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:33 AM IST
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सहारनपुर। मानकों के विपरीत जाकर ड्रग लाइसेंस जारी करने की आरोपी ड्रग इंस्पेक्टर अनामिका अंकुर जैन को शासन ने निलंबित कर दिया है। इतना ही नहीं, निलंबन की अवधि में उन्हें मेरठ से अटैच किया गया है। निलंबन की कार्रवाई की मेल बुधवार की देर रात शासन से जिला प्रशासन को भेजी गई। कार्रवाई प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार की ओर से की गई है।
अनामिका अंकुर जैन पिछले करीब छह वर्ष से सहारनपुर में तैनात हैं। उनका स्थानांतरण तब भी नहीं हुआ, जब शासन ने तीन साल से अधिक वर्ष से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए थे। ड्रग लाइसेंस जारी करने को लेकर भी लगातार उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे। मेडिकल स्टोर संचालकों ने उनके विरुद्घ अनेक बार प्रशासन को शिकायती पत्र सौंपे, मगर उनपर आंच तक नहीं आई। ऐसा ही एक मामला श्री रामकृष्ण सेवा सदन मेडिकल स्टोर देवबंद के ड्रग लाइसेंस के नवीनीकरण का है। नवीनीकरण के लिए 18 दिसंबर 2014 को एसबीआई में तीन हजार रुपये शुल्क जमा किए जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया। साथ ही नवीनीकरण करके लाइसेंस की मूल प्रति उसके मूल लाइसेंस को उपलब्ध नहीं कराया गया। दूसरा मामला आशु जैन का है, जिन्होंने मार्च 2017 में प्रार्थना पत्र दिया, जिसके साथ संलग्न फॉर्म-21 सी की प्रति पर कुमार आशु जैन सेल प्रो ऑफ श्री राम कृष्ण सेवा सदन मेडिकल स्टोर के नाम निर्गत है। जबकि उन्होंने 15 दिसंबर 2016 को दिए पत्र के साथ संलग्न फॉर्म-21 सी की प्रति पर कुमारी श्री रामकृष्ण सेवा सदन मेडिकल स्टोर अंकित किया था। इतना ही नहीं, अनामिका के द्वारा जारी ड्रग लाइसेंस में स्टांप की भी कमियां पाई गई हैं। जांच में साबित हुआ है कि बिना मानकों को पूरा किए ही ड्रग लाइसेंस जारी कर दिए गए। तमाम शिकायतों और जांच के बाद जिला प्रशासन ने अनामिका अंकुर जैन के निलंबन की संस्तुति शासन से की थी। जिसके बाद प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार ने 31 जनवरी 2018 को अनामिका अंकुर जैन के निलंबन की कार्रवाई की। उनको मेरठ कार्यालय से अटैच किया गया है।
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अनामिका अंकुर जैन पिछले करीब छह वर्ष से सहारनपुर में तैनात हैं। उनका स्थानांतरण तब भी नहीं हुआ, जब शासन ने तीन साल से अधिक वर्ष से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण के आदेश जारी किए थे। ड्रग लाइसेंस जारी करने को लेकर भी लगातार उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे। मेडिकल स्टोर संचालकों ने उनके विरुद्घ अनेक बार प्रशासन को शिकायती पत्र सौंपे, मगर उनपर आंच तक नहीं आई। ऐसा ही एक मामला श्री रामकृष्ण सेवा सदन मेडिकल स्टोर देवबंद के ड्रग लाइसेंस के नवीनीकरण का है। नवीनीकरण के लिए 18 दिसंबर 2014 को एसबीआई में तीन हजार रुपये शुल्क जमा किए जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया गया। साथ ही नवीनीकरण करके लाइसेंस की मूल प्रति उसके मूल लाइसेंस को उपलब्ध नहीं कराया गया। दूसरा मामला आशु जैन का है, जिन्होंने मार्च 2017 में प्रार्थना पत्र दिया, जिसके साथ संलग्न फॉर्म-21 सी की प्रति पर कुमार आशु जैन सेल प्रो ऑफ श्री राम कृष्ण सेवा सदन मेडिकल स्टोर के नाम निर्गत है। जबकि उन्होंने 15 दिसंबर 2016 को दिए पत्र के साथ संलग्न फॉर्म-21 सी की प्रति पर कुमारी श्री रामकृष्ण सेवा सदन मेडिकल स्टोर अंकित किया था। इतना ही नहीं, अनामिका के द्वारा जारी ड्रग लाइसेंस में स्टांप की भी कमियां पाई गई हैं। जांच में साबित हुआ है कि बिना मानकों को पूरा किए ही ड्रग लाइसेंस जारी कर दिए गए। तमाम शिकायतों और जांच के बाद जिला प्रशासन ने अनामिका अंकुर जैन के निलंबन की संस्तुति शासन से की थी। जिसके बाद प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार ने 31 जनवरी 2018 को अनामिका अंकुर जैन के निलंबन की कार्रवाई की। उनको मेरठ कार्यालय से अटैच किया गया है।
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