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वुड काविँग उद्योग को बजट से उम्मीद 19-54-49
Updated Thu, 01 Feb 2018 12:17 AM IST
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सहारनपुर। जीएसटी और टैक्स रिफंड नहीं होने से आर्थिक संकट झेल रहे वुड कार्विंग उद्योग को आम बजट से काफी उम्मीदें हैं। उद्यमियों को वुड कार्विंग जैसे हस्तशिल्प को बढ़ावा देने वाली योजनाओं की दरकार है। उन्होंने कहा कि यदि वुड कार्विंग उद्योग को बजट में सहारा नहीं मिला तो न सिर्फ निर्यात प्रभावित होगा बल्कि इसमें लगे हस्तशिल्पियों के लिए भी बडे़ पैमाने पर बेरोजगारी बढे़गी।
हैंडीक्राफ्ट आर्टिजन एंड एक्सपोर्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल एमए का कहना है कि वुड कार्विंग उद्योग बडे़ ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वुड कार्विँग के उत्पादों पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगाया गया है। आम बजट से उम्मीद है कि केंद्रीय वित्त मंत्री हस्तशिल्प कला को बढ़ाने के लिए इसके उत्पादों से जीएसटी समाप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि जिले में काष्ठ वस्तुओं के लिए शीशम की लकड़ी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से आती हैं। इन लकड़ियों को व्यापारी ऊंचे भाव पर राजस्थान के जयपुर और जोधपुर भेज देते हैं। इसके चलते स्थानीय उद्यमी अच्छी क्वालिटी के माल से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा बजट में वुड कार्विंग एक्सपोर्ट के लिए एक कलस्टर की स्थापना के लिए योजना होनी चाहिए।
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निर्यातक आरिफ खान का कहना है कि वुड कार्विंग उत्पादों पर लगाए गए जीएसटी टैक्स के रूप में जमा जनपद के उद्यमियों के करीब 100 करोड़ रुपये का अभी तक रिफंड नहीं हुआ है। इससे उद्यमियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। प्रोत्साहन योजना नहीं होने से एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है।
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प्लाईवुड उद्योग लगें तो मिले किसानों को पोपुलर का उचित दाम
सहारनपुर। पापुलर की वानिकी के लिए अपनी पहचान बना चुके जिले के किसान उसके सही दाम नहीं मिलने से मायूस हैं। पहले पापुलर का भाव 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल रहता था वह अब घटकर 350 से 500 रुपये प्रति क्विंटल ही रह गया है। पापुलर का उत्पादन जिले के किसान करते हैं लेकिन इसका लाभ हरियाणा के प्लाईवुड उद्यमियों को मिल रहा है। जनपद से कई सौ ट्रालियां रोजाना हरियाणा के यमुनानगर और जगाधरी जाती हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार ने जिले में प्लाईवुड उद्योग स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया है। ऐसे में जनपद वासियों को बजट में इसके लिए प्रावधान की उम्मीद है।
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हैंडीक्राफ्ट आर्टिजन एंड एक्सपोर्टस एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल एमए का कहना है कि वुड कार्विंग उद्योग बडे़ ही आर्थिक संकट से गुजर रहा है। वुड कार्विँग के उत्पादों पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगाया गया है। आम बजट से उम्मीद है कि केंद्रीय वित्त मंत्री हस्तशिल्प कला को बढ़ाने के लिए इसके उत्पादों से जीएसटी समाप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि जिले में काष्ठ वस्तुओं के लिए शीशम की लकड़ी पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से आती हैं। इन लकड़ियों को व्यापारी ऊंचे भाव पर राजस्थान के जयपुर और जोधपुर भेज देते हैं। इसके चलते स्थानीय उद्यमी अच्छी क्वालिटी के माल से वंचित रह जाते हैं। इसके अलावा बजट में वुड कार्विंग एक्सपोर्ट के लिए एक कलस्टर की स्थापना के लिए योजना होनी चाहिए।
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निर्यातक आरिफ खान का कहना है कि वुड कार्विंग उत्पादों पर लगाए गए जीएसटी टैक्स के रूप में जमा जनपद के उद्यमियों के करीब 100 करोड़ रुपये का अभी तक रिफंड नहीं हुआ है। इससे उद्यमियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। प्रोत्साहन योजना नहीं होने से एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है।
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प्लाईवुड उद्योग लगें तो मिले किसानों को पोपुलर का उचित दाम
सहारनपुर। पापुलर की वानिकी के लिए अपनी पहचान बना चुके जिले के किसान उसके सही दाम नहीं मिलने से मायूस हैं। पहले पापुलर का भाव 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल रहता था वह अब घटकर 350 से 500 रुपये प्रति क्विंटल ही रह गया है। पापुलर का उत्पादन जिले के किसान करते हैं लेकिन इसका लाभ हरियाणा के प्लाईवुड उद्यमियों को मिल रहा है। जनपद से कई सौ ट्रालियां रोजाना हरियाणा के यमुनानगर और जगाधरी जाती हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार ने जिले में प्लाईवुड उद्योग स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया है। ऐसे में जनपद वासियों को बजट में इसके लिए प्रावधान की उम्मीद है।