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17 साल बाद जीत ने चूमे नवनिर्वाचित चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी के कदम

Sat, 02 Dec 2017 12:22 AM IST
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:22 AM IST
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17 साल बाद जीत ने चूमे नवनिर्वाचित चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी के कदम
17 साल बाद जीत ने चूमे नवनिर्वाचित चेयरमैन जियाउद्दीन अंसारी के कदम
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देवबंद (सहारनपुर)। बसपा प्रत्याशी नवनिर्वाचित चेयरमैन मो. जियाउद्दीन अंसारी के जीत ने 17 साल बाद कदम चूमे हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए सेठ लक्ष्मीचंद को हराया था। जबकि 2017 में अंसारी ने भाजपा प्रत्याशी डा. महेंद्र सिंह सैनी को करारी शिकस्त देकर जीत हासिल की है।
यूं तो जियाउद्दीन अंसारी 19 के दशक से निकाय चुनाव लड़ते आ रहे हैं। लेकिन उन्हें कामयाबी बसपा में रहते हुए ही मिली है। 1998 के उपचुनाव में महिला सीट होने के कारण जियाउद्दीन ने अपनी पत्नी राशिदा बेगम को चुनाव लड़ाया था। लेकिन उनके मुकाबले पर खड़ी इनाम कुरैशी की पत्नी नर्गिस इनाम कुरैशी करीब साढ़े पांच हजार वोटों से जीत गई थी। वर्ष 2007 के चुनाव में मुस्लिम फंड ट्रस्ट के चेयरमैन हसीब सिद्दीकी पालिकाध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उसके बाद 2012 में हुए चुनाव में पूर्व विधायक माविया अली ने जियाउद्दीन अंसारी को हराया था। इतना ही नहीं 2016 का उपचुनाव भी जियाउद्दीन अंसारी ने लड़ा था। लेकिन उसमें भी वह हार गए थे। 2016 के उपचुनाव में माविया अली की पत्नी जहीर फात्मा चेयरमैन बनी थी। इतना सब होने के बाद भी जियाउद्दीन अंसारी ने हिम्मत नहीं हारी और इस बार का चुनाव जोरशोर के साथ लड़ा गया। अंसारी शुरू से ही कहते थे कि उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी से है। अन्य प्रत्याशी चुनाव की दौड़ से बाहर हैं। बहरहाल 17 साल बाद चुनाव जीतने पर अंसारी बेहद खुश हैं। उनकी जीत पर उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने जमकर जीत का जश्न मनाया।
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नगर की जनता से किए वायदे होंगे पूरे : अंसारी
देवबंद। नवनिर्वाचित पालिकाध्यक्ष जियाउद्दीन अंसारी ने कहा कि उन्हें हिंदू-मुस्लिम सभी का वोट मिला है। लोगों के अपार स्नेह का नतीजा ही उनकी जीत का आधार है। नगर की जनता से उन्होंने जितने भी वायदे किए थे अब उन्हें एक-एक कर पूरा किया जाएगा। नगर में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को मजबूर करने का काम करेंगे। बिना भेदभाव के नगर की विकास कराना ही उनकी प्राथमिकता होगी।
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