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किसानों का 1827 करोड़ से अधिक दबाए बैठी मंडल की शुगर मिलें
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सहारनपुर। शुगर मिलें गन्ना मूल्य भुुगतान करने में पिछड़ती जा रही हैं। मंडल की 17 शुगर मिलों पर किसानों का 1827 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य बकाया हो गया है। इसके चलते किसानों में रोष व्याप्त है।
प्रदेश सरकार और गन्ना विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद शुगर मिलें समय पर गन्ना मूल्य भुगतान करने में पिछड़ रहीं हैं। मंडल में 17 शुगर मिलें पेराई कर रही हैं। इन पर 1827 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य बकाया हो गया है। विभागीय अधिकारी शुगर मिलों पर चीनी बेचकर भुगतान कराने का दबाव डाल रहे हैं। इसके अलावा उन्हें चीनी मिलों को मिलने वाले करीब 400 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन की इंतजार है। इस सॉफ्ट लोन का उपयोग बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए ही किया जाना है। गन्ना खरीद अधिनियम के मुताबिक मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर मिल को गन्ना मूल्य का भुगतान करना होता है। इसके बाद बकाया गन्ना मूल्य पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज दिलाने का प्रावधान है। इसके बाद भी किसानों को ना तो समय पर गन्ना मूल्य मिल पाता और ना ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज। गांव सहजवा के किसान बिट्टू नंबरदार, हलगोवा के जियाउलहक और अतुल फंदपुुरी का कहना है कि बच्चों के स्कूल में एडमिशन चल रहे हैं। गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
उप गन्ना आयुक्त डॉक्टर दिनेश्वर मिश्र ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए शुगर मिलों को चीनी बेचकर भुगतान करने के लिए दबाव बनाया हुआ है। इसके अलावा मंडल की चीनी मिलों ने करीब 400 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन के लिए आवेदन किया हुआ है, जो जल्द ही मिलने की संभावना है। इस धनराशि का उपयोग भी बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किया जाएगा। इससे शीघ्र ही बकाया भुगतान की उम्मीद बढ़ गई है।
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जनपद------------------ बकाया गन्ना मूल्य भुगतान
सहारनपुर---------------534.02 करोड़ रुपये
मुजफ्फरनगर-----------723.81 करोड़ रुपये
शामली-------------------569.70 करोड़ रुपये
गन्ना विभाग के एक अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार
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प्रदेश सरकार और गन्ना विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद शुगर मिलें समय पर गन्ना मूल्य भुगतान करने में पिछड़ रहीं हैं। मंडल में 17 शुगर मिलें पेराई कर रही हैं। इन पर 1827 करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य बकाया हो गया है। विभागीय अधिकारी शुगर मिलों पर चीनी बेचकर भुगतान कराने का दबाव डाल रहे हैं। इसके अलावा उन्हें चीनी मिलों को मिलने वाले करीब 400 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन की इंतजार है। इस सॉफ्ट लोन का उपयोग बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए ही किया जाना है। गन्ना खरीद अधिनियम के मुताबिक मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर मिल को गन्ना मूल्य का भुगतान करना होता है। इसके बाद बकाया गन्ना मूल्य पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज दिलाने का प्रावधान है। इसके बाद भी किसानों को ना तो समय पर गन्ना मूल्य मिल पाता और ना ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज। गांव सहजवा के किसान बिट्टू नंबरदार, हलगोवा के जियाउलहक और अतुल फंदपुुरी का कहना है कि बच्चों के स्कूल में एडमिशन चल रहे हैं। गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
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उप गन्ना आयुक्त डॉक्टर दिनेश्वर मिश्र ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए शुगर मिलों को चीनी बेचकर भुगतान करने के लिए दबाव बनाया हुआ है। इसके अलावा मंडल की चीनी मिलों ने करीब 400 करोड़ रुपये के सॉफ्ट लोन के लिए आवेदन किया हुआ है, जो जल्द ही मिलने की संभावना है। इस धनराशि का उपयोग भी बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए किया जाएगा। इससे शीघ्र ही बकाया भुगतान की उम्मीद बढ़ गई है।
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जनपद------------------ बकाया गन्ना मूल्य भुगतान
सहारनपुर---------------534.02 करोड़ रुपये
मुजफ्फरनगर-----------723.81 करोड़ रुपये
शामली-------------------569.70 करोड़ रुपये
गन्ना विभाग के एक अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार