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किसकी जेब में जा रहा भवन के रख रखाव का पैसा?
Updated Wed, 16 May 2018 11:36 PM IST
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बिहारीगढ़ (सहारनपुर)। बिहारीगढ़ स्थित एनपीआरसी के भवन पर पिछले पांच साल से रंगाई-पुताई और मरम्मत नहीं हुई है, जबकि प्रत्येक वर्ष इन कार्यों के लिए 27 हजार रुपये मिलते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर रंगाई-पुताई और मरम्मत का पैसा जा किसकी जेब में रहा है। संबंधित विद्यालयों में भी अनेक अव्यवस्थाएं फैली हुई हैं। इतना ही नहीं, चंद दिन पहले ही बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह ने यहां का निरीक्षण किया, मगर वह भी खामियों को नजरअंदाज कर निकल गए।
बरौली बीआरसी के अंतर्गत आने वाली बिहारीगढ़ एनपीआरसी से क्षेत्र के 11 विद्यालय जुड़े हैं, जिनमें तीन उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। मगर एनपीआरसी पर तैनात अधिकारी धरातल पर उतरकर काम करने की बजाय कागजी कार्यवाही पूरी करते आ रहे हैं। इसकी वजह से संबंधित स्कूलों में भी अनेक खामियां हैं, जिनकी वजह से बच्चों को असुविधा हो रही है। इसे लेकर अभिभावक नाराज हैं। एनपीआरसी के भवन की हालत खस्ता है। जिस पर पांच साल से रख रखाव के लिए कोई काम नहीं हुआ है। संबंधित अधिकारियों के पास मरम्मत और रंगाई-पुताई के लिए आने वाले पैसे का कोई हिसाब नहीं है। क्षेत्रवासी मनोज कुमार का आरोप है कि एनपीआरसी प्रभारी की मूल नियुक्ति तोता टांडा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में है, मगर वह विद्यालय में पढ़ाने की बजाय सारा समय एनपीआरसी पर देते हैं। इसकी वजह से उनके विद्यालय में पढ़ाई बाधित हो रही है।
डीएम के गोद लिए स्कूल के भी हाल खराब
बिहारीगढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय डीएम का गोद लिया हुआ है। इसके बावजूद विद्यालय में कुछ विशेष नहीं है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि डीएम ने आज तक इस विद्यालय का निरीक्षण तक करना जरूरी नहीं समझा है। शायद यही वजह है कि क्षेत्रवासी उक्त विद्यालय का चयन मॉडल विद्यालय योजना में कराने के इच्छुक थे। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से गुहार भी लगाई, मगर सुनवाई नहीं हो सकी। क्षेत्रवासियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है।
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एनपीआरसी बिहारीगढ़ के भवन की रंगाई-पुताई और मरम्मत न होने की मुझे जानकारी नहीं है। मामले में अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। मामले का जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।
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बरौली बीआरसी के अंतर्गत आने वाली बिहारीगढ़ एनपीआरसी से क्षेत्र के 11 विद्यालय जुड़े हैं, जिनमें तीन उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। मगर एनपीआरसी पर तैनात अधिकारी धरातल पर उतरकर काम करने की बजाय कागजी कार्यवाही पूरी करते आ रहे हैं। इसकी वजह से संबंधित स्कूलों में भी अनेक खामियां हैं, जिनकी वजह से बच्चों को असुविधा हो रही है। इसे लेकर अभिभावक नाराज हैं। एनपीआरसी के भवन की हालत खस्ता है। जिस पर पांच साल से रख रखाव के लिए कोई काम नहीं हुआ है। संबंधित अधिकारियों के पास मरम्मत और रंगाई-पुताई के लिए आने वाले पैसे का कोई हिसाब नहीं है। क्षेत्रवासी मनोज कुमार का आरोप है कि एनपीआरसी प्रभारी की मूल नियुक्ति तोता टांडा स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में है, मगर वह विद्यालय में पढ़ाने की बजाय सारा समय एनपीआरसी पर देते हैं। इसकी वजह से उनके विद्यालय में पढ़ाई बाधित हो रही है।
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डीएम के गोद लिए स्कूल के भी हाल खराब
बिहारीगढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय डीएम का गोद लिया हुआ है। इसके बावजूद विद्यालय में कुछ विशेष नहीं है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि डीएम ने आज तक इस विद्यालय का निरीक्षण तक करना जरूरी नहीं समझा है। शायद यही वजह है कि क्षेत्रवासी उक्त विद्यालय का चयन मॉडल विद्यालय योजना में कराने के इच्छुक थे। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से गुहार भी लगाई, मगर सुनवाई नहीं हो सकी। क्षेत्रवासियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है।
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एनपीआरसी बिहारीगढ़ के भवन की रंगाई-पुताई और मरम्मत न होने की मुझे जानकारी नहीं है। मामले में अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा। मामले का जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए।