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पेयजल के नाम पर पालिका को लाखों की चपत
Updated Sat, 30 Dec 2017 11:54 PM IST
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पेयजल के नाम पर पालिका को लाखों की चपत
सरसावा (सहारनपुर)। सरसावा नगर पालिका क्षेत्र में जलकर देने के बावजूद जहां सैकड़ों उपभोक्ता नियमित पेयजल सप्लाई के लिए तरस रहे हैं। वहीं अवैध रूप से पेयजल का इस्तेमाल करने वाले लोग नगर पालिका को लाखों की चपत लगा रहे हैं। पेयजल आपूर्ति के नाम पर चल रही इस मनमानी पर चेयरमैन जल्द जांच कराने और जुर्माना वसूलने का दावा कर रहे हैं।
बता दें कि सरसावा नगर पालिका क्षेत्र के कई मोहल्लों में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। इस मामले में सामाजिक संगठनों से लेकर कई उपभोक्ता अपने स्तर पर शिकायतें कर चुके हैं। इन शिकायतों के माध्यम से अवैध रूप से पेयजल का प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की मांग की जा चुकी है। पालिका से जुड़े सूत्रों के अनुसार ही पालिका में पंजीकृत भवनों की संख्या पांच हजार से अधिक है। इसके बावजूद पेयजल कनेक्शन की संख्या करीब दो हजार ही है। ऐसे में पंजीकृत उपभोक्ताओं पर ही जल कर वसूली का बोझ सबसे ज्यादा है। मगर पेयजल आपूर्ति में उन्हें ही किल्लत झेलनी पड़ रही है। पंजीकृत उपभोक्ताओं से हर साल औसतन 600 रुपये जल मूल्य वसूला जाता है।
नगर में जलापूर्ति के लिये दो वाटरहैड टैंक तथा करीब एक दर्जन सबमर्सिबल लगाए गए हैं। इसके बावजूद न तो पेयजल आपूर्ति नियमित हो पा रही है और न ही पेयजल के नाम पर पालिका को लाखों की चपत लगाने वाले लोगों से कोई रिकवरी हो रही है। इस बारे में पालिकाध्यक्ष बिजेंद्र मोगा ने कहा कि जो लोग अवैध रूप से जल का प्रयोग कर रहे हैं। उन्हें चिह्नित कर उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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सरसावा (सहारनपुर)। सरसावा नगर पालिका क्षेत्र में जलकर देने के बावजूद जहां सैकड़ों उपभोक्ता नियमित पेयजल सप्लाई के लिए तरस रहे हैं। वहीं अवैध रूप से पेयजल का इस्तेमाल करने वाले लोग नगर पालिका को लाखों की चपत लगा रहे हैं। पेयजल आपूर्ति के नाम पर चल रही इस मनमानी पर चेयरमैन जल्द जांच कराने और जुर्माना वसूलने का दावा कर रहे हैं।
बता दें कि सरसावा नगर पालिका क्षेत्र के कई मोहल्लों में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। इस मामले में सामाजिक संगठनों से लेकर कई उपभोक्ता अपने स्तर पर शिकायतें कर चुके हैं। इन शिकायतों के माध्यम से अवैध रूप से पेयजल का प्रयोग करने वालों पर कार्रवाई की मांग की जा चुकी है। पालिका से जुड़े सूत्रों के अनुसार ही पालिका में पंजीकृत भवनों की संख्या पांच हजार से अधिक है। इसके बावजूद पेयजल कनेक्शन की संख्या करीब दो हजार ही है। ऐसे में पंजीकृत उपभोक्ताओं पर ही जल कर वसूली का बोझ सबसे ज्यादा है। मगर पेयजल आपूर्ति में उन्हें ही किल्लत झेलनी पड़ रही है। पंजीकृत उपभोक्ताओं से हर साल औसतन 600 रुपये जल मूल्य वसूला जाता है।
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नगर में जलापूर्ति के लिये दो वाटरहैड टैंक तथा करीब एक दर्जन सबमर्सिबल लगाए गए हैं। इसके बावजूद न तो पेयजल आपूर्ति नियमित हो पा रही है और न ही पेयजल के नाम पर पालिका को लाखों की चपत लगाने वाले लोगों से कोई रिकवरी हो रही है। इस बारे में पालिकाध्यक्ष बिजेंद्र मोगा ने कहा कि जो लोग अवैध रूप से जल का प्रयोग कर रहे हैं। उन्हें चिह्नित कर उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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