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अपर जिला जज के लिए शाकिर का चयन
Updated Thu, 24 Aug 2017 01:24 AM IST
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सहारनपुर। सराय मर्दान अली निवासी शाकिर हसन का चयन अपर जिला जज (एडीजे) के लिए हुआ है। शाकिर की सफलता से परिवार में खुशी की लहर है। परिणाम आने के बाद से परिचित और रिश्तेदार बधाई देने के लिए शाकिर के घर पहुंच रहे हैं।
शाकिर ने एलएलबी जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर से की। एलएलएम कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से किया। उसके बाद से वह सिविल कोर्ट में प्रेक्टिस कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश हायर ज्यूडिशियल सर्विस की तैयारी भी जारी रखी। करीब तीन साल के अथक प्रयास और कड़ी मेहनत ने आखिरकार इस बार शाकिर को सफलता दिला ही दी। शाकिर का प्री एग्जाम जुलाई 2016 को हुआ था, जबकि मेन्स नवंबर 2016 में। 29 अप्रैल 2017 को शाकिर ने इंटरव्यू दिया, जिसका परिणाम 18 अगस्त को आया। परिणाम में अपना नंबर पाकर शाकिर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शाकिर के पिता स्व. अमीर हसन रेलवे से रिटायर्ड थे। बड़े भाई खुर्शीद हसन रेलवे से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि दूसरे भाई माहिर हसन रेलवे में सेवारत हैं। बहन खुशनसीं, खुशनुदा और शुखनुमा तथा भांजी अर्शी, महक, अलीजा, डेजी, रूबी और चमन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। शाकिर का कहना है कि परिजनों की दुआओं के बिना उसका सफल हो पाना संभव नहीं था। शाकिर का कहना है कि उसके साथी मो. शारिक सिद्दीकी, ताहिर सिद्दीकी और अनवार अहमद सिद्दीकी ने भी उसे सपोर्ट किया।
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शाकिर ने एलएलबी जेवी जैन कॉलेज सहारनपुर से की। एलएलएम कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से किया। उसके बाद से वह सिविल कोर्ट में प्रेक्टिस कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश हायर ज्यूडिशियल सर्विस की तैयारी भी जारी रखी। करीब तीन साल के अथक प्रयास और कड़ी मेहनत ने आखिरकार इस बार शाकिर को सफलता दिला ही दी। शाकिर का प्री एग्जाम जुलाई 2016 को हुआ था, जबकि मेन्स नवंबर 2016 में। 29 अप्रैल 2017 को शाकिर ने इंटरव्यू दिया, जिसका परिणाम 18 अगस्त को आया। परिणाम में अपना नंबर पाकर शाकिर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शाकिर के पिता स्व. अमीर हसन रेलवे से रिटायर्ड थे। बड़े भाई खुर्शीद हसन रेलवे से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि दूसरे भाई माहिर हसन रेलवे में सेवारत हैं। बहन खुशनसीं, खुशनुदा और शुखनुमा तथा भांजी अर्शी, महक, अलीजा, डेजी, रूबी और चमन की खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। शाकिर का कहना है कि परिजनों की दुआओं के बिना उसका सफल हो पाना संभव नहीं था। शाकिर का कहना है कि उसके साथी मो. शारिक सिद्दीकी, ताहिर सिद्दीकी और अनवार अहमद सिद्दीकी ने भी उसे सपोर्ट किया।
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