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महादेव का 1008 दीपकों से भव्य श्रृंगार
Updated Mon, 24 Jul 2017 11:58 PM IST
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महादेव का 1008 दीपकों से भव्य श्रृंगार
- औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में हुआ आयोजन
सहारनपुर। औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में महादेव का श्रावण सोमवार को भव्य 1008 दीपक से श्रृंगार किया गया। श्रद्घालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सेदारी कर धर्मलाभ उठाया।
श्रीराम कृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रावण मास पूजा में औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक किया गया। इसके बाद महादेव का अबीर गुलाल से महाश्रृंगार कर आरती उतारी गई। महादेव के दीपक श्रृंगार का रहस्य समझाते हुए स्वामी कालेंद्रानंद ने कहा कि शिव का मूल रूप ही ज्योतिर्मय हैँ। सर्वप्रथम विष्णु ने तप के फल स्वरूप महादेव का ज्योतिर्मय दर्शन किया। इसके बाद भोलेनाथ की आरती हुई। कालेंद्रानंद ने कहा कि अंत:स्थल में शिव की शक्ति की जागृति का प्राकृत्य हो जाता हैँ। जब आत्म रुप में शक्ति पूर्णतया जागृत होती हैं, तभी शिव शक्ति का वरण करते हैँ। यही आधार मोक्ष और मुक्ति है। इस अवसर पर रमेश शर्मा, सुचेता, उमा, गीता, अंजना, सरिता, कोमल, सुशील, अनिता आदि मौजूद रहे।
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- औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में हुआ आयोजन
सहारनपुर। औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में महादेव का श्रावण सोमवार को भव्य 1008 दीपक से श्रृंगार किया गया। श्रद्घालुओं ने बड़ी संख्या में हिस्सेदारी कर धर्मलाभ उठाया।
श्रीराम कृष्ण विवेकानंद संस्थान के तत्वावधान में आयोजित श्रावण मास पूजा में औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक किया गया। इसके बाद महादेव का अबीर गुलाल से महाश्रृंगार कर आरती उतारी गई। महादेव के दीपक श्रृंगार का रहस्य समझाते हुए स्वामी कालेंद्रानंद ने कहा कि शिव का मूल रूप ही ज्योतिर्मय हैँ। सर्वप्रथम विष्णु ने तप के फल स्वरूप महादेव का ज्योतिर्मय दर्शन किया। इसके बाद भोलेनाथ की आरती हुई। कालेंद्रानंद ने कहा कि अंत:स्थल में शिव की शक्ति की जागृति का प्राकृत्य हो जाता हैँ। जब आत्म रुप में शक्ति पूर्णतया जागृत होती हैं, तभी शिव शक्ति का वरण करते हैँ। यही आधार मोक्ष और मुक्ति है। इस अवसर पर रमेश शर्मा, सुचेता, उमा, गीता, अंजना, सरिता, कोमल, सुशील, अनिता आदि मौजूद रहे।
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