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नहीं मिला अपेक्षित बकाया भुगतान, तो फिर बढ़ाई तारीख
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सहारनपुर। विद्युत निगम ने जिले में बकाया बिलों की वसूली के लिए एक के बाद करके तीन बार ओटीएस का समय बढ़ाया, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप भुगतान प्राप्त नहीं हो सका। यहां तक कि पंजीकरण कराए जाने के बावजूद 9582 लोगों ने 31 मार्च तक बिल का भुगतान नहीं किया। जिसके चलते एक बार फिर से भुगतान के लिए समय बढ़ाकर चार अप्रैल कर दिया गया है। तर्क दिया गया है कि दो दिन बैंकों की क्लोजिंग एवं भीड़ रहने के कारण समय बढ़ाया गया है।
विद्युत निगम द्वारा एकमुश्त समाधान योजना एक जनवरी से शुरू की थी। जिसमें 25 जनवरी तक पंजीकरण और 31 जनवरी तक भुगतान की तारीख रखी गई थी। जनपद में बकाया 550 करोड़ में से 250 करोड़ बकाया ओटीएस योजना के तहत वसूली का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 31 जनवरी तक लक्ष्य के सापेक्ष भी 20 प्रतिशत ने पंजीकरण नहीं कराया, भुगतान काफी कम मिला तो योजना को 15 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया। फिर भी 30 प्रतिशत से भी कम पंजीकरण रहा। बकाएदारों की उदासीनता को देखते हुए विद्युत निगम ने योजना को 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया। पंजीकरण की तारीख 25 मार्च निर्धारित कर दी गई। इसके लिए उपभोक्ताओं को नोटिस भेजने, कनेक्शन काटने शुरू कर दिए। 31 मार्च तक भी सिर्फ लक्ष्य का 65 प्रतिशत भी भुगतान नहीं हो सका। विद्युत निगम के रिकार्ड के अनुसार 31 जनवरी बीत जाने के बावजूद पंजीकरण कराने वाले 9582 उपभोक्ताओं ने भी भुगतान नहीं कराया। इस स्थिति को देखते हुए विद्युत निगम ने सिर्फ पंजीक रण कराने वालों के लिए भुगतान कराने की समय सीमा चार अप्रैल कर दी है। बताया जा रहा है कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए बैंकों में 31 मार्च का अवकाश था, जबकि एक अप्रैल को भी बैंकों में अवकाश रहा। दो अप्रैल को भीड़ अधिक रही। जिस कारण चार अप्रैल तक के लिए समय बढ़ा दिया गया।
अब तक की स्थिति
सिर्फ ओटीएस के लिए 262 करोड़ वसूल का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से सिर्फ 184 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी है। जबकि जिले में कुल बकाया लगभग साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का है। इसके अलावा 25 मार्च तक लक्षित 124045 उपभोक्ताओं में से कुल पंजीकरण 83704 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया। जिनमें से 74122 लोगों ने भुगतान किया, जबकि 9582 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराने के बावजूद बकाया भुगतान नहीं किया।
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जब्त कर ली जाएगी पंजीकरण से धनराशि
अधिशासी अभियंता अभिषेक कुमार का कहना है कि चार अप्रैल तक सिर्फ पंजीकरण करा चुुके लोगों को ही भुगतान के लिए समय दिया गया है। चार अप्रैल तक भी बकाया जमा नहीं कराया गया तो पंजीकरण धनराशि में से 2000 रुपये अथवा न्यूनतम राशि जो भी जमा है जब्त कर ली जाएगी, शेष को बकाए में समायोजित कर बिल में फिर से ब्याज लगा दिया जाएगा। इसके बाद कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
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विद्युत निगम द्वारा एकमुश्त समाधान योजना एक जनवरी से शुरू की थी। जिसमें 25 जनवरी तक पंजीकरण और 31 जनवरी तक भुगतान की तारीख रखी गई थी। जनपद में बकाया 550 करोड़ में से 250 करोड़ बकाया ओटीएस योजना के तहत वसूली का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 31 जनवरी तक लक्ष्य के सापेक्ष भी 20 प्रतिशत ने पंजीकरण नहीं कराया, भुगतान काफी कम मिला तो योजना को 15 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया। फिर भी 30 प्रतिशत से भी कम पंजीकरण रहा। बकाएदारों की उदासीनता को देखते हुए विद्युत निगम ने योजना को 31 मार्च तक के लिए बढ़ा दिया। पंजीकरण की तारीख 25 मार्च निर्धारित कर दी गई। इसके लिए उपभोक्ताओं को नोटिस भेजने, कनेक्शन काटने शुरू कर दिए। 31 मार्च तक भी सिर्फ लक्ष्य का 65 प्रतिशत भी भुगतान नहीं हो सका। विद्युत निगम के रिकार्ड के अनुसार 31 जनवरी बीत जाने के बावजूद पंजीकरण कराने वाले 9582 उपभोक्ताओं ने भी भुगतान नहीं कराया। इस स्थिति को देखते हुए विद्युत निगम ने सिर्फ पंजीक रण कराने वालों के लिए भुगतान कराने की समय सीमा चार अप्रैल कर दी है। बताया जा रहा है कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए बैंकों में 31 मार्च का अवकाश था, जबकि एक अप्रैल को भी बैंकों में अवकाश रहा। दो अप्रैल को भीड़ अधिक रही। जिस कारण चार अप्रैल तक के लिए समय बढ़ा दिया गया।
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अब तक की स्थिति
सिर्फ ओटीएस के लिए 262 करोड़ वसूल का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से सिर्फ 184 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी है। जबकि जिले में कुल बकाया लगभग साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये का है। इसके अलावा 25 मार्च तक लक्षित 124045 उपभोक्ताओं में से कुल पंजीकरण 83704 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराया। जिनमें से 74122 लोगों ने भुगतान किया, जबकि 9582 उपभोक्ताओं ने पंजीकरण कराने के बावजूद बकाया भुगतान नहीं किया।
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जब्त कर ली जाएगी पंजीकरण से धनराशि
अधिशासी अभियंता अभिषेक कुमार का कहना है कि चार अप्रैल तक सिर्फ पंजीकरण करा चुुके लोगों को ही भुगतान के लिए समय दिया गया है। चार अप्रैल तक भी बकाया जमा नहीं कराया गया तो पंजीकरण धनराशि में से 2000 रुपये अथवा न्यूनतम राशि जो भी जमा है जब्त कर ली जाएगी, शेष को बकाए में समायोजित कर बिल में फिर से ब्याज लगा दिया जाएगा। इसके बाद कनेक्शन काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।