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गायत्री महायज्ञ का कलश यात्रा से शुभारंभ
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:41 PM IST
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24 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ
का कलश यात्रा से शुभारंभ
चिलकाना। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में गांव सीकरी कला में 24 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हो गया। शनिवार को गांव सीकरी कला में गायत्री महायज्ञ से पूर्व यज्ञ स्थल से भव्य कलश यात्रा शुरू हुई। यात्रा में 251 पीत वस्त्रधारी महिलाएं अपने सिर पर कलश लेकर चल रही थीं। कलश यात्रा से पूर्व यज्ञ स्थल पर कलश पूजन गायत्री परिवार के सुखदेव रोहिला तथा पुरुषोत्तम त्यागी ने कराया। कलश पूजन अफल सिंह तथा चौधरी धीरज सिंह ने किया। कलश यात्रा गांव की गलियों से होती हुई पुन: यज्ञ स्थल पर पहुंच कर सम्पन्न हुई।
शांतिकुंज हरिद्वार से आई हुई टोली के नायक शशिकांत सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि गायत्री तथा यज्ञ हमारी देव संस्कृति के मूलभूत आधार स्तंभ है। इन्हीं के सहारे हमारी संस्कृति विश्व शिखर पर पहुंची तथा हम आध्यात्म के क्षेत्र में जगत गुरु कहलाये। उन्होंने कहा कि आज मानव अनेक प्रकार की समस्याओं से ग्रसित है। इन सभी समस्याओं का समाधान गायत्री में समाहित है। मनुष्य की सोच उसके कार्यों को प्रभावित करती है। मनुष्य जैसा सोचता है, उसे वैसा ही प्रतिफल मिलता है। सोच को बदलने से मनुष्य का जीवन ही बदल जाता है। टीम के सदस्य बसंती लाल सोलंकी, सुसैन मरकान, दिलीप भृगु तथा रूप चंद ने भी गायत्री तथा यज्ञ पर अपने विचार व्यक्त किये।
इस दौरान आदेश कुमार, एमके शर्मा, सुरेश शर्मा, अजब सिंह, जय सिंह सैनी, ऋषिपाल, अनिता देवी, अनूप सिंह, बब्लू राम, मदनपाल सैनी, राजेश कुमार, सुशील कुमार, बालेश, सत्यपाल, प्रेम सिंह, संदीप, बिजेंद्र, सुरेश रोहिला, रामनाथ, पुनीत, जयवीर, राजकुमार गुप्ता आदि रहे।
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का कलश यात्रा से शुभारंभ
चिलकाना। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में गांव सीकरी कला में 24 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हो गया। शनिवार को गांव सीकरी कला में गायत्री महायज्ञ से पूर्व यज्ञ स्थल से भव्य कलश यात्रा शुरू हुई। यात्रा में 251 पीत वस्त्रधारी महिलाएं अपने सिर पर कलश लेकर चल रही थीं। कलश यात्रा से पूर्व यज्ञ स्थल पर कलश पूजन गायत्री परिवार के सुखदेव रोहिला तथा पुरुषोत्तम त्यागी ने कराया। कलश पूजन अफल सिंह तथा चौधरी धीरज सिंह ने किया। कलश यात्रा गांव की गलियों से होती हुई पुन: यज्ञ स्थल पर पहुंच कर सम्पन्न हुई।
शांतिकुंज हरिद्वार से आई हुई टोली के नायक शशिकांत सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि गायत्री तथा यज्ञ हमारी देव संस्कृति के मूलभूत आधार स्तंभ है। इन्हीं के सहारे हमारी संस्कृति विश्व शिखर पर पहुंची तथा हम आध्यात्म के क्षेत्र में जगत गुरु कहलाये। उन्होंने कहा कि आज मानव अनेक प्रकार की समस्याओं से ग्रसित है। इन सभी समस्याओं का समाधान गायत्री में समाहित है। मनुष्य की सोच उसके कार्यों को प्रभावित करती है। मनुष्य जैसा सोचता है, उसे वैसा ही प्रतिफल मिलता है। सोच को बदलने से मनुष्य का जीवन ही बदल जाता है। टीम के सदस्य बसंती लाल सोलंकी, सुसैन मरकान, दिलीप भृगु तथा रूप चंद ने भी गायत्री तथा यज्ञ पर अपने विचार व्यक्त किये।
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इस दौरान आदेश कुमार, एमके शर्मा, सुरेश शर्मा, अजब सिंह, जय सिंह सैनी, ऋषिपाल, अनिता देवी, अनूप सिंह, बब्लू राम, मदनपाल सैनी, राजेश कुमार, सुशील कुमार, बालेश, सत्यपाल, प्रेम सिंह, संदीप, बिजेंद्र, सुरेश रोहिला, रामनाथ, पुनीत, जयवीर, राजकुमार गुप्ता आदि रहे।
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