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बिजली से महरूम अनेक सरकारी स्कूल
Updated Thu, 19 Jul 2018 12:30 AM IST
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सहारनपुर। हकीकत नगर स्थित परिषदीय प्राथमिक विद्यालय में आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं जुड़ा है। ऐसे में बच्चे भीषण गर्मी से जूझते हुए अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। यह विद्यालय महज एक उदाहरण है। हकीकत में बिना बिजली कनेक्शन के स्कूलों की संख्या सैकड़ों में है। अभिभावकों की मानें तो शिक्षा व्यवस्था के साथ ही बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण ही बच्चे और अभिभावक लगातार इन स्कूलों से किनारा करते आ रहे हैं।
जिले में परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1931 है, जिनमें 1355 प्राथमिक और 576 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। प्रबंध समितियों के खातों में स्कूलों में बिजली की फिटिंग आदि का पैसा भेजा जाता रहा है। अनेक स्कूलों में बिजली की फिटिंग हुई, कनेक्शन भी हुए, मगर आज तक वहां पंखे नहीं चले हैं। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि कनेक्शन होने के बावजूद न तो आज कई स्कूलों में केबिल बचे हैं और न ही पंखे। विभागीय सूत्रों ने बताया कि देहात के अनेक स्कूलों में केबिल और पंखे चोरी हो गए हैं, जिनको दोबारा नहीं लगवाया गया है। इतना ही नहीं अनेक स्कूलों में आज तक बिजली के कनेक्शन तक नहीं जुड़ सके हैं। देहात के साथ ही शहरी क्षेत्र में भी ऐसे अनेक स्कूल हैं। नगर शिक्षा अधिकारी के कार्यालय परिसर में बने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंखे हैं, मगर कभी चलते नहीं हैं। बल्ब तक न होने की वजह से दिन में ही अंधेरा रहता है। बेहट में इंग्लिश मीडियम के रूप में विकसित किए गए सरकारी स्कूल में बिजली नहीं है। स्थानीय विक्रम सिंह, अखलाक और मुंतजिर का कहना है कि अनेक सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा है। इसी वजह से बच्चे स्कूलों में ठहरते नहीं हैं। हकीकतनगर के लोगों का भी ऐसा ही कहना है।
बिजली का भुगतान न होना भी बना बाधा
परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन होने के बावजूद बिजली नहीं मिलने की एक प्रमुख वजह बिलों का भुगतान न होना भी है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि शासन बिजली के कनेक्शन तो कराने के लिए कहता है, मगर बिल भुगतान के लिए बजट नहीं है। वर्तमान में जनपद के स्कूलों पर चार करोड़ रुपये से अधिक का बिजली के बिल बकाया है। शासन को डिमांड भेजी गई, मगर केवल सात लाख रुपये ही मिले। इसकी वजह से अनेक स्कूलों के कनेक्शन काट दिए गए हैं।
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विभाग ने जनपद के सभी परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिजली की फिटिंग और कनेक्शन कराए हुए हैं। मगर बिल के लिए बजट न मिलने की वजह से अनेक स्कूलों के कनेक्शन कटे हुए हैं। शासन से बिजली के बिलों के भुगतान के लिए बजट की मांग की गई है। कुछ पैसा मिला भी है मगर वह पर्याप्त नहीं है।
- विजयंत मान, समन्वयक (बिजली) बेसिक शिक्षा विभाग।
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जिले में परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 1931 है, जिनमें 1355 प्राथमिक और 576 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। प्रबंध समितियों के खातों में स्कूलों में बिजली की फिटिंग आदि का पैसा भेजा जाता रहा है। अनेक स्कूलों में बिजली की फिटिंग हुई, कनेक्शन भी हुए, मगर आज तक वहां पंखे नहीं चले हैं। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि कनेक्शन होने के बावजूद न तो आज कई स्कूलों में केबिल बचे हैं और न ही पंखे। विभागीय सूत्रों ने बताया कि देहात के अनेक स्कूलों में केबिल और पंखे चोरी हो गए हैं, जिनको दोबारा नहीं लगवाया गया है। इतना ही नहीं अनेक स्कूलों में आज तक बिजली के कनेक्शन तक नहीं जुड़ सके हैं। देहात के साथ ही शहरी क्षेत्र में भी ऐसे अनेक स्कूल हैं। नगर शिक्षा अधिकारी के कार्यालय परिसर में बने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंखे हैं, मगर कभी चलते नहीं हैं। बल्ब तक न होने की वजह से दिन में ही अंधेरा रहता है। बेहट में इंग्लिश मीडियम के रूप में विकसित किए गए सरकारी स्कूल में बिजली नहीं है। स्थानीय विक्रम सिंह, अखलाक और मुंतजिर का कहना है कि अनेक सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा है। इसी वजह से बच्चे स्कूलों में ठहरते नहीं हैं। हकीकतनगर के लोगों का भी ऐसा ही कहना है।
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बिजली का भुगतान न होना भी बना बाधा
परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिजली के कनेक्शन होने के बावजूद बिजली नहीं मिलने की एक प्रमुख वजह बिलों का भुगतान न होना भी है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि शासन बिजली के कनेक्शन तो कराने के लिए कहता है, मगर बिल भुगतान के लिए बजट नहीं है। वर्तमान में जनपद के स्कूलों पर चार करोड़ रुपये से अधिक का बिजली के बिल बकाया है। शासन को डिमांड भेजी गई, मगर केवल सात लाख रुपये ही मिले। इसकी वजह से अनेक स्कूलों के कनेक्शन काट दिए गए हैं।
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विभाग ने जनपद के सभी परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बिजली की फिटिंग और कनेक्शन कराए हुए हैं। मगर बिल के लिए बजट न मिलने की वजह से अनेक स्कूलों के कनेक्शन कटे हुए हैं। शासन से बिजली के बिलों के भुगतान के लिए बजट की मांग की गई है। कुछ पैसा मिला भी है मगर वह पर्याप्त नहीं है।
- विजयंत मान, समन्वयक (बिजली) बेसिक शिक्षा विभाग।