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समुदाय विशेष के घरों में छोटे स्पीकर लगाना नामुमकिन: उलमा
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:38 PM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रदेश सरकार से मंदिरों और मस्जिदों पर लाउडस्पीकर बजाना क्यों जरूरी है तथा समुदाय विशेष के घरों में छोटे स्पीकर लगा दिए जाने का सुझाव मांगने पर देवबंदी उलमा का कहना है कि ऐसा किया जाना नामुमकिन है। क्योंकि मस्जिद के आसपास सैकड़ों हजारों घर बने हुए होते हैं।
तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि जहां तक धार्मिक स्थलों पर ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजाने का मसला है तो यह गलत है। आवाज केवल इतनी ही होनी चाहिए जितनी उस धर्म के मानने वालों के कानों तक पहुंच सके। कोई काम ऐसा किया जा रहा है जिससे दूसरे धर्म के लोगों को तकलीफ पहुंचती है तो यह सरासर गलत है। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा सरकार से घरों में छोटे स्पीकर लगाने वाले सुझाव मांगने पर कहा कि ऐसा करना नामुमकिन है। क्योंकि मंदिर हो या मस्जिद इनके आसपास सैकड़ों हजारों लोगों के घर बने हुए हैं। ऐसे में हर घर में छोटा स्पीकर लगाया जाना नामुमकिन सी बात है। वहीं सुझाव मांगे जाने के मसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड को चाहिए कि वे अपना पक्ष मजबूती के साथ रखें। मौलाना सगीर कासमी का भी कहना है कि हजारों घरों में छोटे स्पीकर लगाने की व्यवस्था करना नामुमकिन है।
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तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि जहां तक धार्मिक स्थलों पर ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर बजाने का मसला है तो यह गलत है। आवाज केवल इतनी ही होनी चाहिए जितनी उस धर्म के मानने वालों के कानों तक पहुंच सके। कोई काम ऐसा किया जा रहा है जिससे दूसरे धर्म के लोगों को तकलीफ पहुंचती है तो यह सरासर गलत है। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा सरकार से घरों में छोटे स्पीकर लगाने वाले सुझाव मांगने पर कहा कि ऐसा करना नामुमकिन है। क्योंकि मंदिर हो या मस्जिद इनके आसपास सैकड़ों हजारों लोगों के घर बने हुए हैं। ऐसे में हर घर में छोटा स्पीकर लगाया जाना नामुमकिन सी बात है। वहीं सुझाव मांगे जाने के मसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड को चाहिए कि वे अपना पक्ष मजबूती के साथ रखें। मौलाना सगीर कासमी का भी कहना है कि हजारों घरों में छोटे स्पीकर लगाने की व्यवस्था करना नामुमकिन है।
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