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चल अचल संपति और जीवन बीमा कराना नाजायज : मुफ्ती
Updated Thu, 08 Feb 2018 12:33 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। चल अचल संपत्ति और जीवन बीमा कराने के मामले में गाजियाबाद के व्यक्ति द्वारा देवबंद से लिए गए फतवे के जवाब में मुफ्तियों ने इसे नाजायज बताया है। उलमा का कहना है कि कोई भी बीमा कंपनी किसी इंसान की जिंदगी नहीं बचा सकती। इसलिए अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। क्योंकि जिंदगी और मौत उसके हाथ में है।
गाजियाबाद निवासी मो. इनाम ने मुफ्तियों से सवाल किया था कि क्या बीमा कराना जायज है। क्योंकि इंसानी जान के अलावा चल अचल संपत्ति का बीमा भी किया जाता है, और इस तरह की कंपनियां 10 से 15 साल तक की अवधि का बीमा करती हैं। इंश्योरेंस कंपनी कहती हैं कि ये पैसा कारोबार में लगाया जाता है और उसका मुनाफा बीमा धारकों को बांटा जाता है। किसी साल मुनाफा कम होता है तो किसी साल ये ज्यादा हो जाता है तो क्या इसका लाभ लेना जायज है?। जिसके जवाब में मुफ्तियों की खंडपीठ ने कहा कि जान माल और चल अचल संपत्ति का बीमा करना व कराना नाजायज है। क्योंकि जो मुनाफा मिल रहा वो सूद यानि ब्याज की श्रेणी में आता है और इस्लाम में सूद लेना और देना दोनों ही हराम करार दिए गए हैं। इसलिए इस दृष्टिकोण से बीमा करना या कराना नाजायज है। इस पर दारुल उलूम निस्वाह के नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ का कहना है कि बीमा से ताल्लुक जो फतवा आया है वो शरीयत की रोशनी में है जो एकदम दुरुस्त है। बीमा कराकर रकम प्राप्त करना ये कमाई का एक चोर दरवाजा है। उन्होंने कहा कि जिंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है इसलिए सभी को अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। कोई भी बीमा कंपनी किसी की जिंदगी नहीं बचा सकती।
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गाजियाबाद निवासी मो. इनाम ने मुफ्तियों से सवाल किया था कि क्या बीमा कराना जायज है। क्योंकि इंसानी जान के अलावा चल अचल संपत्ति का बीमा भी किया जाता है, और इस तरह की कंपनियां 10 से 15 साल तक की अवधि का बीमा करती हैं। इंश्योरेंस कंपनी कहती हैं कि ये पैसा कारोबार में लगाया जाता है और उसका मुनाफा बीमा धारकों को बांटा जाता है। किसी साल मुनाफा कम होता है तो किसी साल ये ज्यादा हो जाता है तो क्या इसका लाभ लेना जायज है?। जिसके जवाब में मुफ्तियों की खंडपीठ ने कहा कि जान माल और चल अचल संपत्ति का बीमा करना व कराना नाजायज है। क्योंकि जो मुनाफा मिल रहा वो सूद यानि ब्याज की श्रेणी में आता है और इस्लाम में सूद लेना और देना दोनों ही हराम करार दिए गए हैं। इसलिए इस दृष्टिकोण से बीमा करना या कराना नाजायज है। इस पर दारुल उलूम निस्वाह के नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ का कहना है कि बीमा से ताल्लुक जो फतवा आया है वो शरीयत की रोशनी में है जो एकदम दुरुस्त है। बीमा कराकर रकम प्राप्त करना ये कमाई का एक चोर दरवाजा है। उन्होंने कहा कि जिंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है इसलिए सभी को अल्लाह पर भरोसा करना चाहिए। कोई भी बीमा कंपनी किसी की जिंदगी नहीं बचा सकती।
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