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रोजे हर बालिग और आकिल मुसलमान पर फर्ज
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सहारनपुर। जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक और इमाम कारी इसहाक गोरा ने कहा कि रोजे हर बालिग और आकिल मुसलमान पर फर्ज हैं। मालदार पर ढाई प्रतिशत जकात देना फर्ज है। काम की अति व्यस्तता रोजे के लिए मान्य नहीं हैं। बृहस्पतिवार को भी कारी इसहाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए रोजेदारों के सवालों के जवाब दिए।
सवाल:- शामली निवासी राशिद ने पूछा कि उनके मामा अब्दुल्ला एक दुकान पर नौकरी करते हैं। सुबह से शाम तक काम में व्यस्त रहते हैं, उनको सामान लेकर इधर से उधर जाना पड़ता है। बमुश्किल रोजा इफ्तार से पहले उन्हें छुट्टी मिल पाती है। ऐसे हालात में उनका रोजा रखना जरूरी है। क्या शरीयत के अनुसार उनके लिए रोजे माफ हो सकते हैं।
जवाब:- हर व्यक्ति अपने कार्यों में व्यस्त रहता है, लेकिन यह अति व्यस्तता रोजे रखने में जाइल नहीं होती। हर मुसलमान पर रोजे फर्ज हैं। काम की अति व्यस्तता रोजे के लिए मान्य नहीं है।
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सवाल:- मिर्जापुर निवासी जहूर ने पूछा कि यदि कोई मुसलमान मालदार हो तो उस पर जकात कितनी प्रतिशत फर्ज होती है। हमें यह जकात किन लोगों को देनी चाहिए और किस सूरत में जकात फर्ज होती है। जरूरत से ज्यादा माल की तफसील भी बताएं। शरीयत के अनुसार इसके क्या नियम और कानून हैं।
जवाब:- जकात हर एक मालदार आकिल और बालिग पर फर्ज है। जकात मुस्लिम कौम के जरूरतमंदों और गरीबों, यतीम बच्चों, विधवा महिलाओं, विकलांग आदि को देनी चाहिए।
सवाल:- शहीदगंज निवासी इब्राहिम ने पूछा कि इस वर्ष रमजान में गर्मी शिद्दत की है। होंठ बहुत फट रहे हैं। क्या रोजे की हालत में होठों पर वैसलीन लगा सकते हैं। इससे रोजा ख़त्म तो नहीं होगा?
जवाब:- रोजे की हालत में होठों पर हल्का मरहम या वैसलीन लगा सकते हैं, लेकिन मुंह के अंदर जाने का डर है तो मकरूह है। रोजे की हालत में न लगाएं तो बेहतर होगा।
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सवाल:- शामली निवासी राशिद ने पूछा कि उनके मामा अब्दुल्ला एक दुकान पर नौकरी करते हैं। सुबह से शाम तक काम में व्यस्त रहते हैं, उनको सामान लेकर इधर से उधर जाना पड़ता है। बमुश्किल रोजा इफ्तार से पहले उन्हें छुट्टी मिल पाती है। ऐसे हालात में उनका रोजा रखना जरूरी है। क्या शरीयत के अनुसार उनके लिए रोजे माफ हो सकते हैं।
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जवाब:- हर व्यक्ति अपने कार्यों में व्यस्त रहता है, लेकिन यह अति व्यस्तता रोजे रखने में जाइल नहीं होती। हर मुसलमान पर रोजे फर्ज हैं। काम की अति व्यस्तता रोजे के लिए मान्य नहीं है।
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सवाल:- मिर्जापुर निवासी जहूर ने पूछा कि यदि कोई मुसलमान मालदार हो तो उस पर जकात कितनी प्रतिशत फर्ज होती है। हमें यह जकात किन लोगों को देनी चाहिए और किस सूरत में जकात फर्ज होती है। जरूरत से ज्यादा माल की तफसील भी बताएं। शरीयत के अनुसार इसके क्या नियम और कानून हैं।
जवाब:- जकात हर एक मालदार आकिल और बालिग पर फर्ज है। जकात मुस्लिम कौम के जरूरतमंदों और गरीबों, यतीम बच्चों, विधवा महिलाओं, विकलांग आदि को देनी चाहिए।
सवाल:- शहीदगंज निवासी इब्राहिम ने पूछा कि इस वर्ष रमजान में गर्मी शिद्दत की है। होंठ बहुत फट रहे हैं। क्या रोजे की हालत में होठों पर वैसलीन लगा सकते हैं। इससे रोजा ख़त्म तो नहीं होगा?
जवाब:- रोजे की हालत में होठों पर हल्का मरहम या वैसलीन लगा सकते हैं, लेकिन मुंह के अंदर जाने का डर है तो मकरूह है। रोजे की हालत में न लगाएं तो बेहतर होगा।