{"_id":"5b77166442c792463307679b","slug":"111534531172-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों के पांच सौ करोड़ से अधिक दबाए बैठी हैं जिले की शुगर मिलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों के पांच सौ करोड़ से अधिक दबाए बैठी हैं जिले की शुगर मिलें
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। पेराई सत्र समाप्त होने के करीब ढाई माह बाद भी किसान बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए तरस रहे हैं। जिले की छह शुगर मिलों पर किसानों का पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। बकाया भुगतान नहीं होने के चलते किसानों की आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई है। जिसके चलते किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
गन्ना खरीद अधिनियम के तहत मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद बकाया पर 15 फीसदी की दर से ब्याज देने का नियम है। इसके बावजूद शुगर मिलें समय से गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतती हैं। जिले की छह शुगर मिलों पर इस समय भी किसानों को करीब 500 करोड़ रुपये बकाया हैं। हालांकि शासन ने चीनी बेचकर प्राप्त धनराशि के 85 प्रतिशत का उपयोग गन्ना मूल्य भुगतान कराने का प्रावधान किया हुआ है। साथ ही सभी शुगर मिलों के लिए महीने में चीनी बेचने का कोटा भी निर्धारित है। गांव टोली के राजेश कुमार, नन्दी फिरोजपुर के प्रदीप नंबरदार और बिड़वी के सुधीर कुमार आदि किसानों का कहना है कि पूरा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों की आर्थिक हालत खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को बकाया गन्ना मूल्य के साथ ही बकाया पर ब्याज का भी भुगतान कराना चाहिए। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि शुगर मिलों पर बकाया भुगतान कराने के लिए लगातार दबाव बनाया हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा। पिछड़ने वाली मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
गन्ना खरीद अधिनियम के तहत मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद बकाया पर 15 फीसदी की दर से ब्याज देने का नियम है। इसके बावजूद शुगर मिलें समय से गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतती हैं। जिले की छह शुगर मिलों पर इस समय भी किसानों को करीब 500 करोड़ रुपये बकाया हैं। हालांकि शासन ने चीनी बेचकर प्राप्त धनराशि के 85 प्रतिशत का उपयोग गन्ना मूल्य भुगतान कराने का प्रावधान किया हुआ है। साथ ही सभी शुगर मिलों के लिए महीने में चीनी बेचने का कोटा भी निर्धारित है। गांव टोली के राजेश कुमार, नन्दी फिरोजपुर के प्रदीप नंबरदार और बिड़वी के सुधीर कुमार आदि किसानों का कहना है कि पूरा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों की आर्थिक हालत खराब हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को बकाया गन्ना मूल्य के साथ ही बकाया पर ब्याज का भी भुगतान कराना चाहिए। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि शुगर मिलों पर बकाया भुगतान कराने के लिए लगातार दबाव बनाया हुआ है। उम्मीद है कि जल्द ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा। पिछड़ने वाली मिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन