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व्यापारियों ने क्रांतिकारियों को किया नमन
Updated Thu, 09 Aug 2018 12:25 AM IST
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सहारनपुर। रेलवे रोड स्थित एक सभागार में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापारियों ने भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर देश की आजादी में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले क्रांतिकारियों को नमन किया। जिलाध्यक्ष शीतल टंडन और महामंत्री संजय भसीन ने कहा कि नौ अगस्त 1942 में देश के स्वाभिमान को जागृत करते हुए विदेशी शासकों के विरूद्घ आवाज बुलंद की थी। इसके लिए सबने संकल्प लिया था। आज एक बार फिर सांप्रदायिक ताकतों, गरीबी, हिंसा, आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ संकल्प लेने का समय आ गया है। शीतल टंडन ने व्यापारियों को राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना की शपथ दिलाई। रमेश अरोड़ा, रमेश डाबर, मेजर एसके सूरी, राजीव अग्रवाल, दीपक अरोड़ा, संजीव सचदेवा, बलदेव राज खुंगर, कृष्ण लाल मिड्ढा, रवि टंडन, प्रवीन चामना, भीमसैन, गिरधर, आकाश खुराना, सुधीर गुप्ता मौजूद रहे।
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सहारनपुर में सफल रहा था जुलूस : जयनाथ
सहारनपुर। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के संरक्षक पंडित जयनाथ शर्मा ने जारी किए बयान में कहा कि अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए चार जुलाई 1942 को राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया था। आठ अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने मुंबई सत्र में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया। भारत छोड़ो आंदोलन भारत को स्वतंत्र भले न करवा पाया हो, लेकिन जन-जन के हृदय में स्वतंत्रता की इच्छा जागृत की। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के करो या मरो आह्वान पर लाखों देशभक्त बलिदान को तत्पर थे। इस आंदोलन में सभी वर्गों ने समर्थन किया। जनपद सहारनपुर में राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में विशाल जुलूस निकाला गया था, जिसे रोकने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने पूरी ताकत लगा दी। क्योंकि, उस समय सहारनपुर आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों का गढ़ माना जाता था। अंग्रेजों की बर्बरता के बावजूद सहारनपुर में जुलूस सफल रहा था।
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सहारनपुर में सफल रहा था जुलूस : जयनाथ
सहारनपुर। स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के संरक्षक पंडित जयनाथ शर्मा ने जारी किए बयान में कहा कि अंग्रेजों को देश से भगाने के लिए चार जुलाई 1942 को राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया था। आठ अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने मुंबई सत्र में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया। भारत छोड़ो आंदोलन भारत को स्वतंत्र भले न करवा पाया हो, लेकिन जन-जन के हृदय में स्वतंत्रता की इच्छा जागृत की। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के करो या मरो आह्वान पर लाखों देशभक्त बलिदान को तत्पर थे। इस आंदोलन में सभी वर्गों ने समर्थन किया। जनपद सहारनपुर में राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में विशाल जुलूस निकाला गया था, जिसे रोकने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने पूरी ताकत लगा दी। क्योंकि, उस समय सहारनपुर आंदोलनकारियों और क्रांतिकारियों का गढ़ माना जाता था। अंग्रेजों की बर्बरता के बावजूद सहारनपुर में जुलूस सफल रहा था।
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