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पांच दशक पुराने ट्रैक पर ही दौड़ रहीं हैं ट्रेनें
Updated Sun, 17 Jun 2018 12:32 AM IST
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पांच दशक पुराने ट्रैक पर ही दौड़ रहीं हैं ट्रेनें
सहारनपुर। हर क्षेत्र में एक के बाद एक करके नई तकनीक लाई जा रही है, लेकिन सहारनपुर से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन पचास साल पुरानी है। जिस पर रोजाना सौ से अधिक ट्रेनें गुजर रहीं हैं। पटरियां क्रेक होने एवं ट्रेनों के पटरियों से उतरने के बार-बार हादसे हो रहे हैं। लेकिन रेलवे इन मियाद पूरी कर जर्जर हो चुकी रेलवे लाइन को बदल नहीं पा रहा है।
सहारनपुर में स्टेशन पर ही शनिवार को पटरी टूटने की घटना हुई। हालांकि समय रहते पता चलने पर बड़ा हादसा नहीं हो सका, लेकिन रेलवे तकनीकी अधिकारी मान रहे हैं कि लाइन काफी जर्जर हो चुकी थी और जोड़ धीरे-धीरे टूटता रहा और शनिवार को ट्रेन के दबाव में टूट कर अलग हो गया। लोगों की नजर इस पर न पड़ती तो कोई बड़ा हादसा भी संभव था।
यह पहली घटना नहीं है। पिछले साल भी ढमोला नदी के पास रेलवे ट्रैक टूट गया था। उस समय आशंका जताई जा रही थी कि किसी ने घटना को अंजाम देने के लिए ट्रैक को तोड़ दिया है। सहारनपुर के जिस ट्रैक पर क्रेक आया है, वह पचास साल से भी अधिक पुराना बताया गया। इसके अलावा रेलवे ट्रैक से पेंड्रोल क्लिप भी कई बार निकल चुकीं हैं। इससे पूर्व प्लेटफार्म नंबर छह पर भी रेलवे ट्रैक टूटने की घटना हो चुकी है। जर्जर हो चुके इस पचास साल से भी अधिक पुराने हो चुके ट्रैक को बदले जाने का कार्य कराया जाना है। रेलवे के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक रेलवे ट्रैक काफी पुराना हो चुका है। जिसके चलते कई जगह से जोड़ कमजोर हो चुके हैं। पेट्रोलिंग करके इसको लगातार ठीक किया जा रहा है। ट्रैक पर लगातार काम चल रहा है। कई जगह ट्रैक बदला भी जा चुका है। इसके चलते ब्लॉक लिए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में अभी समय लगेगा।
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सहारनपुर। हर क्षेत्र में एक के बाद एक करके नई तकनीक लाई जा रही है, लेकिन सहारनपुर से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन पचास साल पुरानी है। जिस पर रोजाना सौ से अधिक ट्रेनें गुजर रहीं हैं। पटरियां क्रेक होने एवं ट्रेनों के पटरियों से उतरने के बार-बार हादसे हो रहे हैं। लेकिन रेलवे इन मियाद पूरी कर जर्जर हो चुकी रेलवे लाइन को बदल नहीं पा रहा है।
सहारनपुर में स्टेशन पर ही शनिवार को पटरी टूटने की घटना हुई। हालांकि समय रहते पता चलने पर बड़ा हादसा नहीं हो सका, लेकिन रेलवे तकनीकी अधिकारी मान रहे हैं कि लाइन काफी जर्जर हो चुकी थी और जोड़ धीरे-धीरे टूटता रहा और शनिवार को ट्रेन के दबाव में टूट कर अलग हो गया। लोगों की नजर इस पर न पड़ती तो कोई बड़ा हादसा भी संभव था।
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यह पहली घटना नहीं है। पिछले साल भी ढमोला नदी के पास रेलवे ट्रैक टूट गया था। उस समय आशंका जताई जा रही थी कि किसी ने घटना को अंजाम देने के लिए ट्रैक को तोड़ दिया है। सहारनपुर के जिस ट्रैक पर क्रेक आया है, वह पचास साल से भी अधिक पुराना बताया गया। इसके अलावा रेलवे ट्रैक से पेंड्रोल क्लिप भी कई बार निकल चुकीं हैं। इससे पूर्व प्लेटफार्म नंबर छह पर भी रेलवे ट्रैक टूटने की घटना हो चुकी है। जर्जर हो चुके इस पचास साल से भी अधिक पुराने हो चुके ट्रैक को बदले जाने का कार्य कराया जाना है। रेलवे के तकनीकी अधिकारियों के मुताबिक रेलवे ट्रैक काफी पुराना हो चुका है। जिसके चलते कई जगह से जोड़ कमजोर हो चुके हैं। पेट्रोलिंग करके इसको लगातार ठीक किया जा रहा है। ट्रैक पर लगातार काम चल रहा है। कई जगह ट्रैक बदला भी जा चुका है। इसके चलते ब्लॉक लिए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में अभी समय लगेगा।
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