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फसलों में हानिकारक कीटों को नियंत्रित करता है ट्राइकोग्रामा कार्ड
Updated Tue, 03 Apr 2018 12:08 AM IST
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फसलों में हानिकारक कीटों को नियंत्रित करता है ट्राइकोग्रामा कार्ड
सहारनपुर। रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते दुष्प्रभाव के चलते कृषि वैज्ञानिकों ने अब जैविक कीट नियंत्रकों के इस्तेमाल पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके चलते किसानों को कंसुआ, सूंडी और फल बेधक कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा कार्ड का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह परजीवी कीट हानिकारक कीटों के अंडों को नष्ट कर देते हैं। जिससे फसल में हानिकारक कीटों का नुकसान कम हो जाता है। इससे न सिर्फ फसलों में रासायनिक दुष्प्रभाव में कमी होती है बल्कि फसलों की उत्पादन लागत में भी कमी आती है।
अंधाधुंध हो रहे रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से जहां फसलों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, वहीं कीटनाशकों के मंहगे होने के चलते फसल उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है। इसके चलते किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा हो गई है। कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को जैविक कीट नियंत्रकों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कंसुआ और सूंडी जैसे हानिकारक कीटों का प्रकोप कम करने के लिए किसानों को ट्राइकोग्रामा कार्ड का प्रयोग फायदेमंद रहता है। किसानों का यह मित्र कीट हानिकारक कीटों के अंडों के बीच में अपने अंडे देकर उन्हें नष्ट कर देता है। इस कार्ड का इस्तेमाल सब्जियों की फसलों और गन्ने में अधिक लाभकारी है। एक एकड़ फसल के लिए दो ट्राइकोग्रामा कार्ड पर्याप्त रहता है। फसल की पत्तियों के नीचे लगने वाले इस कार्ड में मित्र कीट चिपके रहते हैं। इन्हें 15 दिनों के अंतर पर चार से पांच बार लगाना चाहिए। इसे लगाने के बाद किसान को रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
ट्राइकोग्रामा कीट हानिकारक कीटों के अंडों को नष्ट कर देता है। यह किसानों का मित्र कीट है। इसका प्रयोग करने से न सिर्फ फसलों पर रासायनिक दवाओं का दुष्प्रभाव रुकता है बल्कि फसलों की लागत भी घटती है। गन्ने में कंसुआ, चोटी बंधक आदि कीटों की रोकथाम में कारगर है। इसके अलावा सब्जियों की फसलों में हानिकारक कीटों के नियंत्रण में भी यह मित्रकीट मुफीद रहता है।
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- डॉ. आईके कुशवाहा, सह निदेशक फसल सुरक्षा, कृषि विज्ञान केंद्र।
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सहारनपुर। रासायनिक कीटनाशकों के बढ़ते दुष्प्रभाव के चलते कृषि वैज्ञानिकों ने अब जैविक कीट नियंत्रकों के इस्तेमाल पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके चलते किसानों को कंसुआ, सूंडी और फल बेधक कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा कार्ड का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह परजीवी कीट हानिकारक कीटों के अंडों को नष्ट कर देते हैं। जिससे फसल में हानिकारक कीटों का नुकसान कम हो जाता है। इससे न सिर्फ फसलों में रासायनिक दुष्प्रभाव में कमी होती है बल्कि फसलों की उत्पादन लागत में भी कमी आती है।
अंधाधुंध हो रहे रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से जहां फसलों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है, वहीं कीटनाशकों के मंहगे होने के चलते फसल उत्पादन की लागत भी बढ़ गई है। इसके चलते किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा हो गई है। कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को जैविक कीट नियंत्रकों का प्रयोग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कंसुआ और सूंडी जैसे हानिकारक कीटों का प्रकोप कम करने के लिए किसानों को ट्राइकोग्रामा कार्ड का प्रयोग फायदेमंद रहता है। किसानों का यह मित्र कीट हानिकारक कीटों के अंडों के बीच में अपने अंडे देकर उन्हें नष्ट कर देता है। इस कार्ड का इस्तेमाल सब्जियों की फसलों और गन्ने में अधिक लाभकारी है। एक एकड़ फसल के लिए दो ट्राइकोग्रामा कार्ड पर्याप्त रहता है। फसल की पत्तियों के नीचे लगने वाले इस कार्ड में मित्र कीट चिपके रहते हैं। इन्हें 15 दिनों के अंतर पर चार से पांच बार लगाना चाहिए। इसे लगाने के बाद किसान को रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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ट्राइकोग्रामा कीट हानिकारक कीटों के अंडों को नष्ट कर देता है। यह किसानों का मित्र कीट है। इसका प्रयोग करने से न सिर्फ फसलों पर रासायनिक दवाओं का दुष्प्रभाव रुकता है बल्कि फसलों की लागत भी घटती है। गन्ने में कंसुआ, चोटी बंधक आदि कीटों की रोकथाम में कारगर है। इसके अलावा सब्जियों की फसलों में हानिकारक कीटों के नियंत्रण में भी यह मित्रकीट मुफीद रहता है।
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- डॉ. आईके कुशवाहा, सह निदेशक फसल सुरक्षा, कृषि विज्ञान केंद्र।