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पुलिस उत्पीड़न की शिकायत लेकर विधायक से मिलेंगे राजपूत
Updated Mon, 31 Jul 2017 12:20 AM IST
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पुलिस उत्पीड़न की शिकायत लेकर विधायक से मिलेंगे राजपूत
बड़गांव (सहारनपुर)। शब्बीरपुर कांड के बाद अंबेहटा चांद, बड़गांव और भगवानपुर में हुए हमलों में राजपूत समाज के युवकों की गिरफ्तारी के विरोध में रविवार को कसबे की गोगा म्हाड़ी प्रांगण में हुई राजपूत समाज के लोगों की बैठक में देवबंद भाजपा विधायक कुंवर बृजेश सिंह से मिलकर पुलिस उत्पीड़न से अवगत कराने का निर्णय लिया गया। कहा कि राजपूत युवकों को तो जेल भेज दिया गया जबकि राजपूत समाज के मृतक सुमित के हत्यारे अभी भी गांव में खुले घूम रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी पुलिस नही कर रही है। कहा कि विधायक से काम नहीं चला तो वे मुख्यमंत्री से मिलकर पुलिस की एक पक्षीय कार्रवाई को उनके सामने रखेेंगे।
गौरतलब है कि शब्बीरपुर गांव में पांच मई को जातीय हिंसा में राजपूत समाज के एक युवक की मौत हो गई थी। मामला शांत पड़ता इससे पहले ही 23 मई को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हिंसा ग्रस्त गांव का दौरा किया। इसी दिन गांव के राजपूतों के घरों में आग लगाने की अफवाहें जब फैली तो शाम को मायावती की रैली के समापन के बाद अपने घर लौटते दलितों पर कुछ शरारती तत्वों ने हमला कर दिया था। इसमें अंबेहटा चांद के पास दलित युवक आशीष की मौत हो गई थी। बड़गांव के एक बाग पर छह दलित घायल हो गये थे। एक और हमला भगवानपुर गांव के पास हुआ था जिसमें तीन दलित युवक घायल हो गये थे। इसी रात को अपने बचाव में आई पुलिस ने रातों रात चंदपुर व अंबेहटा चांद गांव में छापा मार कर राजपूतों के 25 युवकों को उठा कर जेल भेज दिया था। सुबह मामले का पता चला तो ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को मामले की जानकारी दी। इस पर पुलिस ने निर्दोषों को 169 के तहत छोड़ने का भरोसा दिया था। जबकि दो माह बाद आज भी वे युवक बंद हैं। इस दौरान अशोक राणा, सुभाष, श्याम सिंह नितिन राणा, मान सिंह, राजेंद्र सिंह, समर सिंह आदि रहे।
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बड़गांव (सहारनपुर)। शब्बीरपुर कांड के बाद अंबेहटा चांद, बड़गांव और भगवानपुर में हुए हमलों में राजपूत समाज के युवकों की गिरफ्तारी के विरोध में रविवार को कसबे की गोगा म्हाड़ी प्रांगण में हुई राजपूत समाज के लोगों की बैठक में देवबंद भाजपा विधायक कुंवर बृजेश सिंह से मिलकर पुलिस उत्पीड़न से अवगत कराने का निर्णय लिया गया। कहा कि राजपूत युवकों को तो जेल भेज दिया गया जबकि राजपूत समाज के मृतक सुमित के हत्यारे अभी भी गांव में खुले घूम रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी पुलिस नही कर रही है। कहा कि विधायक से काम नहीं चला तो वे मुख्यमंत्री से मिलकर पुलिस की एक पक्षीय कार्रवाई को उनके सामने रखेेंगे।
गौरतलब है कि शब्बीरपुर गांव में पांच मई को जातीय हिंसा में राजपूत समाज के एक युवक की मौत हो गई थी। मामला शांत पड़ता इससे पहले ही 23 मई को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हिंसा ग्रस्त गांव का दौरा किया। इसी दिन गांव के राजपूतों के घरों में आग लगाने की अफवाहें जब फैली तो शाम को मायावती की रैली के समापन के बाद अपने घर लौटते दलितों पर कुछ शरारती तत्वों ने हमला कर दिया था। इसमें अंबेहटा चांद के पास दलित युवक आशीष की मौत हो गई थी। बड़गांव के एक बाग पर छह दलित घायल हो गये थे। एक और हमला भगवानपुर गांव के पास हुआ था जिसमें तीन दलित युवक घायल हो गये थे। इसी रात को अपने बचाव में आई पुलिस ने रातों रात चंदपुर व अंबेहटा चांद गांव में छापा मार कर राजपूतों के 25 युवकों को उठा कर जेल भेज दिया था। सुबह मामले का पता चला तो ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को मामले की जानकारी दी। इस पर पुलिस ने निर्दोषों को 169 के तहत छोड़ने का भरोसा दिया था। जबकि दो माह बाद आज भी वे युवक बंद हैं। इस दौरान अशोक राणा, सुभाष, श्याम सिंह नितिन राणा, मान सिंह, राजेंद्र सिंह, समर सिंह आदि रहे।
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