फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   किसानों के लिए वरदान साबित होगी अरहर की रिचा प्रजाति

किसानों के लिए वरदान साबित होगी अरहर की रिचा प्रजाति

Sun, 14 Apr 2019 11:11 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2019 11:11 PM IST
विज्ञापन
किसानों के लिए वरदान साबित होगी अरहर की रिचा प्रजाति
सहारनपुर। गुणवत्ता युुक्त और बढ़िया उत्पादन देने वाली अरहर की रिचा प्रजाति जनपद के किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र में हुआ इसका ट्रायल सफल रहा है। इस प्रजाति की खासियत यह है कि एक बार बुआई करके इससे वर्ष में दो बार उत्पादन लिया जाता है। इसका औसत उत्पादन 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
विज्ञापन

जनपद में दलहनी फसलों में आमतौर पर उर्द, मूंग और मसूर की खेती होती है। लेकिन अरहर की खेती काफी कम होती है। अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र ने कई प्रजातियों का ट्रायल किया है। इसमें अरहर की रिचा-2000 प्रजाति का ट्रायल बढ़िया उत्पादन देने वाला साबित हुआ है। मध्यप्रदेश के सिहोर जिले के प्रगतिशील किसान राजकुमार राठौर ने सलेक्शन के माध्यम से इस प्रजाति को इजाद किया है। इसके लिए उन्हें नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने भी सम्मानित किया था। इसकी बुआई 15 जून से 15 जुलाई के बीच लाइन से लाइन और पौधे से पौधे की दूरी तीन फुट के हिसाब से बिजाई की जाती है। इसकी बुुआई में तीन किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से बीज लगता है। इसके पौधों को दो फुट का हो जाने पर इसकी ऊपरी चोटी को काट देना चाहिए। इसमें फसल आने पर पहली बार नवंबर-दिसंबर माह में फली गुच्छों की कटाई करते हैं। इसकी दूसरी कटाई मार्च-अप्रैल में होती है। इसका औसत उत्पादन 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होता है। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डाक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र परिसर के तकनीकी पार्क में रिचा 2000 प्रजाति का ट्रायल किया गया है। मध्यप्रदेेश में पैदा होने वाली इस प्रजाति का जनपद में किया गया ट्रायल सफल रहा है। एक बार बुआई कर वर्ष में दो बार उत्पादन देने वाली अरहर की यह प्रजाति जिले के किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इसकी औसत उत्पादन क्षमता 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। अरहर की खेती में अन्य फसलों की तुलना में लागत भी कम आती है। इसलिए यह प्रजाति किसानों के लिए फायदेमंद रहेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed