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किसानों में बढ़ रहा शरदकालीन गन्ने का क्रेज
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:33 AM IST
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किसानों में बढ़ रहा शरदकालीन गन्ने का क्रेज
सहारनपुर। कम लागत और बढ़िया उत्पादन के चलते जनपद के किसानों में गन्ने की शरदकालीन खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। इसके चलते जनपद में इस बार गन्ने की असौजी बुआई का लक्ष्य 7380 हेक्टेयर रखा गया है जबकि गत सीजन में यह लक्ष्य 6505 था। अभी तक 65 हेक्टेयर में शरदकालीन गन्ने की बुआई हो चुकी है।
जनपद के किसानों में गन्ने की शरदकालीन खेती की बुआई के प्रति क्रेज बढ़ रहा है। सितंबर के मध्य से लेकर अक्तूबर तक शरदकालीन गन्ने की बुवाई होती है। किसान इसके साथ सहफसली के तौर पर सरसों, लहसुन, मसूर, आलू आदि की खेती करते हैं। जिले में ट्रैंच विधि से गन्ना बुआई के चलते किसान सहफसली भी करते हैं। सह फसली से जहां किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, वहीं फसल की लागत में भी कमी आती है। गन्ना बुवाई की ट्रैंच विधि में दो लाइनों के बीच तीन से चार फीट तक का अंतर रखा जाता है। इसके बीच में आसानी से सहफसली खेती हो जाती है। अधिकांश किसान शरदकालीन गन्ने में सहफसली के तौर सरसों की बुआई को प्राथमिकता देते हैं। सरसों की फसल जहां गन्ने को ठंड से बचाती है, वहीं फरवरी तक कट जाने के कारण समय से गन्ने की निराई-गुड़ाई भी हो जाती है। अगेती खेती होने के कारण गन्ने में शुगर का प्रतिशत भी अधिक होता है, जो चीनी मिलों के लिए वरदान साबित होता है। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि शरदकालीन गन्ने की खेती के प्रति किसानों में क्रेज बढ रहा है। इसके चलते ही इस बार 7380 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
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सहारनपुर। कम लागत और बढ़िया उत्पादन के चलते जनपद के किसानों में गन्ने की शरदकालीन खेती की ओर रुझान बढ़ रहा है। इसके चलते जनपद में इस बार गन्ने की असौजी बुआई का लक्ष्य 7380 हेक्टेयर रखा गया है जबकि गत सीजन में यह लक्ष्य 6505 था। अभी तक 65 हेक्टेयर में शरदकालीन गन्ने की बुआई हो चुकी है।
जनपद के किसानों में गन्ने की शरदकालीन खेती की बुआई के प्रति क्रेज बढ़ रहा है। सितंबर के मध्य से लेकर अक्तूबर तक शरदकालीन गन्ने की बुवाई होती है। किसान इसके साथ सहफसली के तौर पर सरसों, लहसुन, मसूर, आलू आदि की खेती करते हैं। जिले में ट्रैंच विधि से गन्ना बुआई के चलते किसान सहफसली भी करते हैं। सह फसली से जहां किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है, वहीं फसल की लागत में भी कमी आती है। गन्ना बुवाई की ट्रैंच विधि में दो लाइनों के बीच तीन से चार फीट तक का अंतर रखा जाता है। इसके बीच में आसानी से सहफसली खेती हो जाती है। अधिकांश किसान शरदकालीन गन्ने में सहफसली के तौर सरसों की बुआई को प्राथमिकता देते हैं। सरसों की फसल जहां गन्ने को ठंड से बचाती है, वहीं फरवरी तक कट जाने के कारण समय से गन्ने की निराई-गुड़ाई भी हो जाती है। अगेती खेती होने के कारण गन्ने में शुगर का प्रतिशत भी अधिक होता है, जो चीनी मिलों के लिए वरदान साबित होता है। जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि शरदकालीन गन्ने की खेती के प्रति किसानों में क्रेज बढ रहा है। इसके चलते ही इस बार 7380 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
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