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सरकारी कागजातों में नहीं भगत सिंह को शहीद का दर्जा
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:34 AM IST
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सहारनपुर। देश के करोड़ों लोगों के लिए आजादी की जंग में अपने प्राण न्योछावर करने वाले सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव सिंह शहीद ए आजम हैं, लेकिन देशवासियों के लिए चौंकाने और आहत करने वाली बात यह है कि सरकार इनकों शहीद मानती ही नहीं। ऐसा एक आरटीआई के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी में कहा गया है। इस नए खुलासे के बाद शहीद ए आजम भगत सिंह के परिजनों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधू ने बताया कि भारतीय जनमानस में शहीदे आजम के नाम से विख्यात स्वाधीनता सेनानी सरदार भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का भारत सरकार के कागजों में शहीद का दर्जा देने का रिकार्ड नहीं पाया गया। जम्मू से एक आरटीआई एक्टीविस्ट रोहित ने भारत सरकार से इस बाबत जानकारी मांगी थी। भारत सरकार की ओर से जो जानकारी रोहित को उपलब्ध कराई गई, उसमें कहा गया कि सरकार के पास शहीदों का कोई रिकार्ड नहीं है। जो सरकारी मशीनरी की संवेदनहीनता को दर्शाता है। जबकि, दूसरी ओर पाकिस्तान के लाहौर शहर में शादमान चौक का नाम शहीदे आजम भगत सिंह ने नाम पर रखने को लेकर कोटऱार् में जद्दोजहद चल रही है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा शहीदों की उपेक्षा लोगों को खल रही है।
शहीदे आजम भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधू ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि सरदार भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत को भारत सरकार के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। शहीदों की लिस्ट नहीं बनाए जाना भारत सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है। भारत सरकार को शहीदों का रिकार्ड रखना चाहिए।
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भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधू ने बताया कि भारतीय जनमानस में शहीदे आजम के नाम से विख्यात स्वाधीनता सेनानी सरदार भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का भारत सरकार के कागजों में शहीद का दर्जा देने का रिकार्ड नहीं पाया गया। जम्मू से एक आरटीआई एक्टीविस्ट रोहित ने भारत सरकार से इस बाबत जानकारी मांगी थी। भारत सरकार की ओर से जो जानकारी रोहित को उपलब्ध कराई गई, उसमें कहा गया कि सरकार के पास शहीदों का कोई रिकार्ड नहीं है। जो सरकारी मशीनरी की संवेदनहीनता को दर्शाता है। जबकि, दूसरी ओर पाकिस्तान के लाहौर शहर में शादमान चौक का नाम शहीदे आजम भगत सिंह ने नाम पर रखने को लेकर कोटऱार् में जद्दोजहद चल रही है। ऐसे में भारत सरकार द्वारा शहीदों की उपेक्षा लोगों को खल रही है।
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शहीदे आजम भगत सिंह के भतीजे किरणजीत सिंह संधू ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बताया कि सरदार भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत को भारत सरकार के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है। शहीदों की लिस्ट नहीं बनाए जाना भारत सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है। भारत सरकार को शहीदों का रिकार्ड रखना चाहिए।
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