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बर।चपुरी-मथुरापुर को बाढ़ से बचाने के लिए काम शुरु, एक करोड़ रुपये होंगे खर्च
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बिचपुरी-मथुरापुर को बाढ़ से बचाने के लिए काम शुरू, एक करोड़ रुपये होंगे खर्च
जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी ने की कार्य की शुरुआत
रामपुर। पटवाई क्षेत्र के मथुरापुर और बिचपुरी गांव को कोसी नदी के कटान और बाढ़ के पानी से बचाने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी ने तटबंधों को दुरुस्त कराने का काम शुरू करा दिया है। साथ ही ग्रामीणों को ट्राइपॉड मॉडल के बारे में भी जानकारी दी।
अक्तूबर 2021 में रामपुर में बाढ़ ने तबाही मचा दी थी, नैनीताल हाईवे, दिल्ली लखनऊ हाईवे, स्वार-बाजपुर मार्ग भी बाढ़ के कहर से नहीं बच सके थे। किसानों की हजारों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई थीं। पानी के बहाव के कारण नदियों के साइफन, तटबंध, गेट आदि टूट गए थे। इसके अलावा गांवों के किनारे किनारे बड़ी तादात में कटान होने की वजह से नुकसान पहुंचा था,
जिसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से कोसी नदी के किनारे बसे बिचपुरी और मथुरापुर गांव को नदी के कटान से बचाने के लिए तटबंधों को दुरुस्त कराने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। शासन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद मंगलवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़, मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज शाहबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मथुरापुर, मदारपुर और बिचपुरी क्षेत्र में स्थित रामगंगा और कोसी नदी के मिलन स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने नदी के तटीय क्षेत्र में कटान को रोकने के लिए परक्यू पाइन/ट्राइपॉड मॉडल पर बाढ़ निरोधक कार्यों का शुभारंभ किया। इससे नदी के तट सुरक्षित रह सकेंगे और भविष्य में बाढ़ की स्थिति से ग्रामीणों सुरक्षा मिलेगी। डीएम ने कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिशासी अभियंता सिंचाई सियाराम ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा 82 लाख रुपये की लागत से नदी में 600 मीटर लंबाई में ट्राइपॉड मॉडल पर नदी तट को सुरक्षित बनाने के लिए कार्य कराए जाएंगे। उपायुक्त मनरेगा प्रभु दयाल ने बताया कि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर तैयार किए गए नदी तट संरक्षण एवं विकास अभियान के अंतर्गत मथुरापुर स्थित रामगंगा और कोसी नदी के मिलन स्थल पर मनरेगा के अंतर्गत 16 लाख रुपये की लागत से 600 मीटर नदी के तटीय क्षेत्र में वृहद स्तर पर पौधरोपण, बंधा निर्माण और साफ सफाई का कार्य कराया जाएगा। मनरेगा के अंतर्गत प्रतिदिन 100 मजदूरों की भागीदारी सुनिश्चित कराते हुए कार्य को 15 जून तक पूर्ण करा लिया जाएगा।
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जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी ने की कार्य की शुरुआत
रामपुर। पटवाई क्षेत्र के मथुरापुर और बिचपुरी गांव को कोसी नदी के कटान और बाढ़ के पानी से बचाने के लिए एक करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी ने तटबंधों को दुरुस्त कराने का काम शुरू करा दिया है। साथ ही ग्रामीणों को ट्राइपॉड मॉडल के बारे में भी जानकारी दी।
अक्तूबर 2021 में रामपुर में बाढ़ ने तबाही मचा दी थी, नैनीताल हाईवे, दिल्ली लखनऊ हाईवे, स्वार-बाजपुर मार्ग भी बाढ़ के कहर से नहीं बच सके थे। किसानों की हजारों हेक्टेयर फसलें बर्बाद हो गई थीं। पानी के बहाव के कारण नदियों के साइफन, तटबंध, गेट आदि टूट गए थे। इसके अलावा गांवों के किनारे किनारे बड़ी तादात में कटान होने की वजह से नुकसान पहुंचा था,
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जिसके बाद सिंचाई विभाग की ओर से कोसी नदी के किनारे बसे बिचपुरी और मथुरापुर गांव को नदी के कटान से बचाने के लिए तटबंधों को दुरुस्त कराने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। शासन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद मंगलवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़, मुख्य विकास अधिकारी गजल भारद्वाज शाहबाद क्षेत्र की ग्राम पंचायत मथुरापुर, मदारपुर और बिचपुरी क्षेत्र में स्थित रामगंगा और कोसी नदी के मिलन स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने नदी के तटीय क्षेत्र में कटान को रोकने के लिए परक्यू पाइन/ट्राइपॉड मॉडल पर बाढ़ निरोधक कार्यों का शुभारंभ किया। इससे नदी के तट सुरक्षित रह सकेंगे और भविष्य में बाढ़ की स्थिति से ग्रामीणों सुरक्षा मिलेगी। डीएम ने कार्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिशासी अभियंता सिंचाई सियाराम ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा 82 लाख रुपये की लागत से नदी में 600 मीटर लंबाई में ट्राइपॉड मॉडल पर नदी तट को सुरक्षित बनाने के लिए कार्य कराए जाएंगे। उपायुक्त मनरेगा प्रभु दयाल ने बताया कि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर तैयार किए गए नदी तट संरक्षण एवं विकास अभियान के अंतर्गत मथुरापुर स्थित रामगंगा और कोसी नदी के मिलन स्थल पर मनरेगा के अंतर्गत 16 लाख रुपये की लागत से 600 मीटर नदी के तटीय क्षेत्र में वृहद स्तर पर पौधरोपण, बंधा निर्माण और साफ सफाई का कार्य कराया जाएगा। मनरेगा के अंतर्गत प्रतिदिन 100 मजदूरों की भागीदारी सुनिश्चित कराते हुए कार्य को 15 जून तक पूर्ण करा लिया जाएगा।
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