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यूक्रेन में फंसे रामपुर के चार छात्र, परिजनों को सता रही चिंता
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बिलासपुर (रामपुर)। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे रामपुर के चार छात्रों के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, वे लगातार अपने बच्चों के संपर्क में हैं और बार बार फोन कर यूक्रेन के हालातों की जानकारी ले रहे हैं। साथ ही अपने बच्चों की सेहत-सलामती की दुआ कर रहे हैं। इनमें दो छात्र यूक्रेन और रूस की सीमा से करीब दो सौ किलोमीटर दूर ही हैं। जबकि, दो छात्र पश्चिमी यूक्रेन में हैं। वहां के हालात अभी सामान्य हैं।
बिलासपुर के केमरी थाना क्षेत्र के ग्राम पट्टी बसंतपुर निवासी किसान राजेंद्र कुमार शर्मा का पुत्र संजय दत्त शर्मा यूक्रेन की वीन्नित्स्या शहर स्थित नेशनल प्रिग्रोव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। संजय के पिता राजेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार उनका इकलौता पुत्र जून के अंतिम सप्ताह में घर आया था और करीब 50 दिन रुकने के बाद 10 अगस्त 2021 को वापस यूक्रेन चला गया था, जो अब वहीं है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में हो रहे हमलों को लेकर उनका पुत्र अन्य छात्रों के साथ रूस सीमा से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित वीन्नित्स्या शहर में है।
गुरुवार सुबह करीब नौ बजे संजय से उनकी बात हुई, तो उसने बताया कि यहां पर युद्ध के चलते यूक्रेन सरकार ने बिजली और इंटरनेट सेवा को रोक दिया है। बीच-बीच में बिजली और इंटरनेट सेवा सुचारु की जाती है। उसके पास खाने पीने का करीब दस दिन का राशन मौजूद है। वह अन्य छात्रों के साथ यूक्रेन में दूतावास से संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन सरकार उन्हें आश्वासन दे रही है कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि शुक्रवार शाम तक हालात कुछ नियंत्रित हो सकते हैं। राजेंद्र शर्मा का कहना है कि वह अपने पुत्र की वापसी के लिए अपनी पत्नी संतोष शर्मा के साथ भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनका पुत्र सही सलामत घर वापस आ जाए। गुरुवार को राजेंद्र शर्मा के घर पर गांव के तमाम लोग पहुंचे। ग्रामीण परिजनों को बार-बार समझा रहे हैं कि वह भगवान पर भरोसा रखें। सब कुछ सही हो जाएगा।
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वहीं, सैदनगर क्षेत्र के ग्राम बिचपुरी निवासी पूर्व प्रधान नेकपाल एक बीमा कंपनी में अभिकर्ता हैं। हाल ही में वह ज्वालानगर के सांई विहार कालोनी में रह रहे हैं। उनका पुत्र अमित कुमार भी यूक्रेन में हैं। वह लवीव नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। यूक्रेन पर हमलों से वह दहशत में है। दोपहर तीन बजे फोन पर हुई बातचीत में अमित ने परिजनों को बताया कि चिंता करने की जरूरत नहीं है। भारतीय दूतावास लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। अमित के पिता नेकपाल ने बताया कि उनके बेटे के पास करीब दस दिन का राशन है। उन्होंने बताया कि यहां डर का माहौल है। हम लोगों अपने प्लैट के बाहर भी नहीं आ रहे हैं।
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बिलासपुर के केमरी थाना क्षेत्र के ग्राम पट्टी बसंतपुर निवासी किसान राजेंद्र कुमार शर्मा का पुत्र संजय दत्त शर्मा यूक्रेन की वीन्नित्स्या शहर स्थित नेशनल प्रिग्रोव मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। संजय के पिता राजेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार उनका इकलौता पुत्र जून के अंतिम सप्ताह में घर आया था और करीब 50 दिन रुकने के बाद 10 अगस्त 2021 को वापस यूक्रेन चला गया था, जो अब वहीं है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में हो रहे हमलों को लेकर उनका पुत्र अन्य छात्रों के साथ रूस सीमा से करीब 200 किलोमीटर दूर स्थित वीन्नित्स्या शहर में है।
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गुरुवार सुबह करीब नौ बजे संजय से उनकी बात हुई, तो उसने बताया कि यहां पर युद्ध के चलते यूक्रेन सरकार ने बिजली और इंटरनेट सेवा को रोक दिया है। बीच-बीच में बिजली और इंटरनेट सेवा सुचारु की जाती है। उसके पास खाने पीने का करीब दस दिन का राशन मौजूद है। वह अन्य छात्रों के साथ यूक्रेन में दूतावास से संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि यूक्रेन सरकार उन्हें आश्वासन दे रही है कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि शुक्रवार शाम तक हालात कुछ नियंत्रित हो सकते हैं। राजेंद्र शर्मा का कहना है कि वह अपने पुत्र की वापसी के लिए अपनी पत्नी संतोष शर्मा के साथ भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि उनका पुत्र सही सलामत घर वापस आ जाए। गुरुवार को राजेंद्र शर्मा के घर पर गांव के तमाम लोग पहुंचे। ग्रामीण परिजनों को बार-बार समझा रहे हैं कि वह भगवान पर भरोसा रखें। सब कुछ सही हो जाएगा।
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वहीं, सैदनगर क्षेत्र के ग्राम बिचपुरी निवासी पूर्व प्रधान नेकपाल एक बीमा कंपनी में अभिकर्ता हैं। हाल ही में वह ज्वालानगर के सांई विहार कालोनी में रह रहे हैं। उनका पुत्र अमित कुमार भी यूक्रेन में हैं। वह लवीव नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। यूक्रेन पर हमलों से वह दहशत में है। दोपहर तीन बजे फोन पर हुई बातचीत में अमित ने परिजनों को बताया कि चिंता करने की जरूरत नहीं है। भारतीय दूतावास लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। अमित के पिता नेकपाल ने बताया कि उनके बेटे के पास करीब दस दिन का राशन है। उन्होंने बताया कि यहां डर का माहौल है। हम लोगों अपने प्लैट के बाहर भी नहीं आ रहे हैं।