फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Rampur News ›   The wave of tradition rising in the age of modernity

Rampur News: आधुनिकता के दौर में उठ रही परंपरा की डोली

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2024 02:11 AM IST
विज्ञापन
The wave of tradition rising in the age of modernity
रामपुर। बेटियों की डोली से विदाई तो अब अधिकतर लोगों के लिए किस्से-कहानियों तक सीमित रह गई है। हालांकि, शाहबाद के कुछ मुस्लिम परिवारों में ये परंपरा आज भी कायम है। इन परिवारों में आज भी बेटियों की विदाई डोली से होती है। डोलियों को उठाने वाले कहार भी आठ से 10 हजार रुपये तक लेते हैं। साथ ही डोली से विदाई लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन जाती है। आधुनिकता के दौर में डोलियों की जगह चमचमाती कारों ने ले ली। अब शहर से लेकर गांवों तक विदाई में कारों का ही इस्तेमाल होता है। कुछ लोग शादी को रोमांचक बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से भी विदाई कराने लगे हैं। ऐसे समय में भी शाहबाद के कुछ मुस्लिम परिवार बेटी की विदाई में डोली को ही तरजीह देते हैं। यहां के कहार भी बेटियों को डोली से ससुराल पहुंचाने का पुश्तैनी काम कर रहे हैं। शादी के सीजन में कहारों को भी अच्छा रोजगार मिल जाता है।
विज्ञापन

शुक्रवार को कस्बा निवासी जाकिर अली की बेटी इल्मा की शादी हुई। इल्मा की डोली से विदाई हुई। जाकिर ने बताया कि पहले भी उनके परिवार की बेटियों की विदाई डोली से ही हुई है। हालांकि, डोली से विदाई उन्हीं बेटियों की होती है, जिनकी शादी कस्बे में ही होती है। किसी दूसरे शहर से बरात आने पर दुल्हन कार से ही विदा किया जाता है। डोली से होने वाली विदाई लोगों का ध्यान खींचती है।
विज्ञापन

------------------------
विज्ञापन
विज्ञापन


कहार बोले- शादी के सीजन में मिल जाता है रोजगार
डोली उठाने वाले कहार तेजपाल ने बताया कि हमारे दादा मटरूलाल और हमारे पिता मूलचंद डोली से दुल्हन पहुंचाने का काम करते थे। आज भी हम दादा की परंपरा को निभा रहे हैं। हम जिस डोली से दुल्हन को ले जाते हैं वो हमारे दादा ने अपने हाथों से बनाई थी। ये डोली 100 साल पुरानी है। इस डोली से सैकड़ों दुल्हन को उनकी ससुराल पहुंचाया जा चुका है। हमारा चार लोगों का समूह होता है। दो-दो लोग बारी-बारी से डोली उठाते हैं।

दो सौ मीटर हो या दो किमी. दाम एक ही
डोली उठाने वाले कहार मनोज ने बताया कि हम सभी एक साथ काम करते हैं। डोली उठाने का काम अब केवल शाहबाद में ही मिलता है। दुल्हन को 200 मीटर दूर पहुंचाना हो या दो किलोमीटर दूर, एक दुल्हन को पहुंचाने पर आठ से 10 हजार रुपये तक मिल जाते हैं। हालांकि, यह सीजनल काम है। इसके बाद कोई और रोजगार करते हैं। जब शादी किसी दूसरे शहर से होती है तो कार से ही विदाई होती है, क्योंकि ज्यादा दूर तक डोली लेकर जाना संभव नहीं होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed