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Rampur News: दिल के दर्द को 16 साल बाद भी मरहम का इंतजार
Tue, 29 Sep 2026 01:30 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Tue, 29 Sep 2026 01:30 AM IST
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रामपुर। जिला अस्पताल में दिल के दर्द पर मरहम लगाने के लिए डाॅक्टर ही नहीं मिलता। करीब 16 साल से जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। हृदय रोगियों को विशेषज्ञ सलाह और उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है।
जिला अस्पताल में सीने में दर्द, सांस फूलने, धड़कन बढ़ने और हृदय संबंधी अन्य शिकायतों के साथ मरीज पहुंचते हैं। सामान्य चिकित्सकों से परामर्श और प्राथमिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार उन्हें हायर सेंटर भेजा जाता है।
कार्डियोलॉजिस्ट की सुविधा नहीं होने से मरीजों को जिला स्तर पर ही हृदय रोग का विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पाता। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने का असर उन मरीजों पर भी पड़ता है, जिन्हें बार-बार हृदय संबंधी जांच और चिकित्सकीय सलाह की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। बाहर आने-जाने के साथ जांच और उपचार का खर्च भी बढ़ जाता है।
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हृदय रोगियों को विशेषज्ञ सुविधा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती होने से उन्हें काफी राहत मिल सकती है। इसलिए जल्द से जल्द जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती की जाए।
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हर माह 15 से 20 दिल के मरीज पहुंचते हैं अस्पताल
रामपुर। जिला अस्पताल में हर माह करीब 15 से 20 हृदय रोगी उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें सीने में दर्द, सांस फूलने और धड़कन संबंधी परेशानी वाले मरीज शामिल हैं। कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण इन मरीजों को विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया जाता है। इससे मरीजों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।
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हार्ट विशेषज्ञ नहीं, गरीब मरीजों के सामने इलाज का संकट
रामपुर। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर हृदय रोगियों पर पड़ रहा है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को हृदय संबंधी जांच और उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च अधिक होने के कारण कई मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती से मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा मिल सकती है।
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जीवन रक्षक इंजेक्शन से हार्ट के मरीजों को मिल रही राहत
रामपुर। जिला अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए जीवन रक्षक इंजेक्शन की सुविधा उपलब्ध है। अब तक पांच हृदय रोगियों को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाया जा चुका है। हार्ट अटैक की स्थिति में समय पर दिए जाने वाले इस इंजेक्शन से मरीजों को उपचार में लाभ मिल रहा है। मरीजों को हृदय संबंधी गंभीर स्थिति में प्राथमिक उपचार के साथ यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के बावजूद आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार मिल पा रहा है।
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- जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग की गई है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जिला अस्पताल में जल्द से जल्द हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो जाए, जिससे हृदय रोगियों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार की सुविधा मिल सके। साथ ही अस्पताल में आने वाले हार्ट के मरीजों को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
- डॉ. आशु अग्रवाल, एडी हेल्थ, मुरादाबाद
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जिला अस्पताल में सीने में दर्द, सांस फूलने, धड़कन बढ़ने और हृदय संबंधी अन्य शिकायतों के साथ मरीज पहुंचते हैं। सामान्य चिकित्सकों से परामर्श और प्राथमिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार उन्हें हायर सेंटर भेजा जाता है।
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कार्डियोलॉजिस्ट की सुविधा नहीं होने से मरीजों को जिला स्तर पर ही हृदय रोग का विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पाता। लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने का असर उन मरीजों पर भी पड़ता है, जिन्हें बार-बार हृदय संबंधी जांच और चिकित्सकीय सलाह की जरूरत होती है। ऐसे मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। बाहर आने-जाने के साथ जांच और उपचार का खर्च भी बढ़ जाता है।
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हृदय रोगियों को विशेषज्ञ सुविधा के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती होने से उन्हें काफी राहत मिल सकती है। इसलिए जल्द से जल्द जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती की जाए।
हर माह 15 से 20 दिल के मरीज पहुंचते हैं अस्पताल
रामपुर। जिला अस्पताल में हर माह करीब 15 से 20 हृदय रोगी उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें सीने में दर्द, सांस फूलने और धड़कन संबंधी परेशानी वाले मरीज शामिल हैं। कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण इन मरीजों को विशेषज्ञ हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के लिए दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया जाता है। इससे मरीजों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।
हार्ट विशेषज्ञ नहीं, गरीब मरीजों के सामने इलाज का संकट
रामपुर। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने का सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर हृदय रोगियों पर पड़ रहा है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को हृदय संबंधी जांच और उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च अधिक होने के कारण कई मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। ऐसे में जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती से मरीजों को स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा मिल सकती है।
जीवन रक्षक इंजेक्शन से हार्ट के मरीजों को मिल रही राहत
रामपुर। जिला अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों के लिए जीवन रक्षक इंजेक्शन की सुविधा उपलब्ध है। अब तक पांच हृदय रोगियों को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाया जा चुका है। हार्ट अटैक की स्थिति में समय पर दिए जाने वाले इस इंजेक्शन से मरीजों को उपचार में लाभ मिल रहा है। मरीजों को हृदय संबंधी गंभीर स्थिति में प्राथमिक उपचार के साथ यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी के बावजूद आपात स्थिति में मरीजों को तत्काल उपचार मिल पा रहा है।
- जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग की गई है। प्रयास किए जा रहे हैं कि जिला अस्पताल में जल्द से जल्द हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती हो जाए, जिससे हृदय रोगियों को स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ उपचार की सुविधा मिल सके। साथ ही अस्पताल में आने वाले हार्ट के मरीजों को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाया जा रहा है।
- डॉ. आशु अग्रवाल, एडी हेल्थ, मुरादाबाद