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Rampur News: मोबाइल की स्क्रीन की चमक में भी बरकरार श्राद्ध की आस्था

Tue, 29 Sep 2026 01:55 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर Updated Tue, 29 Sep 2026 01:55 AM IST
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Faith in Shraddh remains intact even in the glow of mobile screens.
रामपुर। आधुनिक दौर में भले ही जिंदगी की रफ्तार मोबाइल की स्क्रीन पर सिमट आई है, तब भी पिंडदान, तर्पण और पूर्वजों के प्रति सम्मान की महक फीकी नहीं पड़ी है। लोग भले ही पढ़ाई और नौकरी में व्यस्त हों लेकिन तकनीक के जरिये अपनों से जुड़कर ''श्राद्ध पक्ष'' के हर नियम और रीति-रिवाज को पूरी आस्था के साथ निभा रहे हैं।
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श्राद्ध पक्ष में घरों में होने वाले अनुष्ठानों में अब युवाओं की भागीदारी भी दिखाई देती है। परिवार के बुजुर्ग जब उन्हें श्राद्ध की विधि, तर्पण, पिंडदान और पूर्वजों के बारे में बताते हैं तो युवा ध्यान से सुनते हैं। कई परिवारों में बच्चे और युवा अपने माता-पिता के साथ बैठकर पूजा की तैयारियों में हाथ बंटाते हैं। इससे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक यह परंपरा आगे बढ़ रही है।
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पूर्वजों की याद से जुड़ने का अवसर
युवाओं के लिए श्राद्ध अपने पूर्वजों को याद करने का अवसर भी है। परिवार में जिन लोगों को उन्होंने देखा या जिनके बारे में केवल बुजुर्गों से सुना है, श्राद्ध के दौरान उनके जीवन और योगदान की चर्चा होती है। इससे युवाओं को अपने परिवार के इतिहास और जड़ों को समझने का मौका मिलता है।
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विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी
युवा मानते हैं कि बदलते समय के साथ जीवनशैली भले बदल रही हो, लेकिन परिवार की परंपराओं का महत्व कम नहीं होना चाहिए। श्राद्ध को वे अपने परिवार की परंपरा का हिस्सा मानते हैं। बुजुर्गों से सीखी विधि और परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी युवा महसूस कर रहे हैं।

क्या कहते हैं युवा-
श्राद्ध परिवार की पुरानी परंपरा है। हम युवाओं के लिए यह केवल पूजा या रस्म नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है। घर के बड़े जब हमें इसकी विधि और महत्व बताते हैं तो हम भी इसे समझने और आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
-सुरेश कुमार
आज युवा आधुनिक जीवनशैली में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन अपनी जड़ों और पारिवारिक परंपराओं से जुड़े रहना भी जरूरी समझते हैं। श्राद्ध के दौरान परिवार एक साथ बैठता है और पूर्वजों की बातें होती हैं। इससे हमें अपनी विरासत और परिवार के संस्कारों को समझने का अवसर मिलता है।

दीपेश
आधुनिक दौर भले ही आ आए, लेकिन अपने पूर्वजों के लिए जो सम्मान हमारे बड़ों के दिल में है। वहीं हमारे दिल में भी है। श्राद्ध में जब परिवार का जब हाथ बंटाते हैं तो एक अलग सा सुकून मिलता है, लगता है कि जैसे वो आशीर्वाद दे रहे हैं।
-नीतीश
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