{"_id":"5820d17c4f1c1b8553b384c9","slug":"teen-talak-issue000","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसर नहीं पहुंचे तो भड़के उलमा, जाम-हंगामा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसर नहीं पहुंचे तो भड़के उलमा, जाम-हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो / स्वार /रामपुर
Updated Tue, 08 Nov 2016 12:39 AM IST
विज्ञापन
रामपुर के स्वार में स्वार-बाजपुर मार्ग पर जाम लगाए मुस्लिम समाज के लोग। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
तीन तलाक के मुद्दे पर जमाअत रजा-ए-मुस्तफा के बैनर तले मुस्लिम समाज के लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए ज्ञापन देने तहसील पहुंचे। लेकिन अधिकारियों की गैर-मौजूदगी पर उलमा भड़क गए। उन्होंने स्वार-बाजपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। नारेबाजी करने लगे। जाम की वजह से वाहनों की कतार लगनी शुरू हो गईं। करीब एक घंटे बाद डीएम से वार्ता के बाद कोतवाल को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
शनिवार को जमाअत रजा-ए-मुस्तफा के बैनर तले नगर की अड्डे वाली मस्जिद में उलमा सहित मुस्लिम समाज के लोग भारी संख्या में एकत्र हुए। 14 नवंबर को होने वाली शरीयत बचाओ कांफ्रेंस के मद्देनजर यहां पहुंचे काजी-ए-शरआ सैय्यद शाहिद अली रिजवी नूरी ने कहा कि शरीयत का कानून इंसानोें का बनाया कानून नहीं है। बल्कि अल्लाह का बनाया कानून है। मुसलमान इस्लाम की खातिर अपनी जान दे देंगे, लेकिन किसी के सामने नहीं झुकेंगे। मौलाना साबिर रजा खां ने कहा कि सरकार ने शरीयत के कानून में कुछ भी तब्दीली की तो अंजाम ठीक नहीं होगा।
विज्ञापन
इस्लाम अमन का पैगाम देता है और जुल्म करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देता है। जिसके बाद काजी-ए-शरआ के नेतृत्व में उलमा सहित मुस्लिम समाज के लोग केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंचे। लेकिन सूचना के बाद भी वहां एसडीएम और तहसीलदार की मौजूदगी न देख उलमा भड़क गए। नाराजगी जताते हुए स्वार-बाजपुर मार्ग पर बैठ गए। जिससे मार्ग पर जाम लग गया। दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।
विज्ञापन
करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचे कोतवाल मनोज कुमार सिंह ने उलेमाओं से जाम खोलने का आग्रह किया। लेकिन वह नहीं माने। बाद में जिलाधिकारी अमित किशोर से फोन पर हुई वार्ता के बाद कोतवाल को राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें शरीयत के मामले में दखलअंदाजी न किए जाने की मांग की। इस दौरान जाम में फंसे लोगों का बुरा हाल रहा।
इस दौरान मौलाना जुल्फेकार रिजवी, कारी शब्बन खां, मौलाना नाजिम खां, मौलाना शारिक रिजवी, मौलाना इरशाद नूरी, मौलाना मोहम्मद अहमद, मौलाना हामिद रजा रिजवी, मौलाना इमरान रजा, मौलाना जाबिर रजा, मौलाना अब्दुल कदीर, कारी राहत जान, हाफिज शकील अहमद, सैय्यद मोहम्मद अजीमुद्दीन, हकीम मोहम्मद सलीम, सैय्यद नजाकत मियां, सैय्यद रऊफ मियां, रिजवान राज, साजिद, सलीम, मोहम्मद इरफान, अरशद वारसी सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग मौजूद रहे।