{"_id":"19f5b3ad9030068f7ca9273abf13692f","slug":"sixth-day-of-navrat-poojan-in-rampur-hindi-news-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"विपदा और आपदा से लड़ने की शक्ति मांगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विपदा और आपदा से लड़ने की शक्ति मांगी
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Mon, 19 Oct 2015 11:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शारदीय नवरात्र में सोमवार को मां के छठे रूप मां कात्यायिनी की पूजा-अर्चना की गई। भक्तों ने मां कात्यायिनी का पूजन करते हुए मंत्र का जाप किया। भक्तों ने मां से विपत्तियों और आपदाओं से लड़ने की शक्ति मांगी। मंदिरों और घरों में महिलाओं ने माता के छंद गाए।
शारदीय नवरात्र में प्रतिपदा तिथि में वृद्धि के कारण सोमवार को षष्ठी मां कात्यायनी का पूजन हुआ। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। भक्तों ने देवी मां को प्रसन्न करने के लिए शंख, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां का आरती-पूजन किया। माता को पुष्प, मिष्ठान, मेवा, फल, लौंग आदि अर्पित कर मंगल कामना की।
भक्तों ने सिंहारूढ़ मां के इस स्वरूप से विपत्तियों और आपदाओं से लड़ने की शक्ति का वर मांगा। दोपहर बाद मंदिरों में देवी भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के सभी मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही। पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि ऋषि कात्यायन के तप से प्रसन्न होकर देवी मां ने अजन्मा रूप त्याग कर ऋषि की पुत्री के रूप में जन्म लिया।
विज्ञापन
ऋषि कात्यायन की पुत्री होने की वजह से देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी आपदाओं और विपत्तियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं। कुछ भक्तों ने सोमवार को मां के सातवें रूप मां कालरात्रि का पूजन भी किया। इसके साथ ही भक्तों ने मंदिर और घर पर दुर्गा सप्तशति का पाठ किया और महिलाओं ने माता के छंद गाए।
माई का थान मंदिर में माता को छप्पन भोग लगाए गए। स्वार के गीता मंदिर, बड़ा शिवमंदिर, सैनी मंदिर, देवियों के थान, संतोषी माता मंदिर, हनुमान मंदिर, चमुंडादेवी मंदिर में महिलाओं ने भजन कीर्तन कर प्रसाद का वितरण किया। उधर, मसवासी के बिजारखाता, रहमतगंज, सीतारामपुर, हसनपुर, मंसूरपुर, चाउपुरा, भूवरा आदि गांव के मंदिरों में मां कत्यायनी की पूजा अर्चना की।
विज्ञापन
शारदीय नवरात्र में प्रतिपदा तिथि में वृद्धि के कारण सोमवार को षष्ठी मां कात्यायनी का पूजन हुआ। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई। भक्तों ने देवी मां को प्रसन्न करने के लिए शंख, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच मां का आरती-पूजन किया। माता को पुष्प, मिष्ठान, मेवा, फल, लौंग आदि अर्पित कर मंगल कामना की।
विज्ञापन
भक्तों ने सिंहारूढ़ मां के इस स्वरूप से विपत्तियों और आपदाओं से लड़ने की शक्ति का वर मांगा। दोपहर बाद मंदिरों में देवी भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के सभी मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही। पंडित नवनीत शर्मा ने बताया कि ऋषि कात्यायन के तप से प्रसन्न होकर देवी मां ने अजन्मा रूप त्याग कर ऋषि की पुत्री के रूप में जन्म लिया।
विज्ञापन
ऋषि कात्यायन की पुत्री होने की वजह से देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी आपदाओं और विपत्तियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करती हैं। कुछ भक्तों ने सोमवार को मां के सातवें रूप मां कालरात्रि का पूजन भी किया। इसके साथ ही भक्तों ने मंदिर और घर पर दुर्गा सप्तशति का पाठ किया और महिलाओं ने माता के छंद गाए।
माई का थान मंदिर में माता को छप्पन भोग लगाए गए। स्वार के गीता मंदिर, बड़ा शिवमंदिर, सैनी मंदिर, देवियों के थान, संतोषी माता मंदिर, हनुमान मंदिर, चमुंडादेवी मंदिर में महिलाओं ने भजन कीर्तन कर प्रसाद का वितरण किया। उधर, मसवासी के बिजारखाता, रहमतगंज, सीतारामपुर, हसनपुर, मंसूरपुर, चाउपुरा, भूवरा आदि गांव के मंदिरों में मां कत्यायनी की पूजा अर्चना की।