{"_id":"62265ae281e88754283f0942","slug":"shreemad-bhagat-katha-in-rampur-rampur-news-mbd420832838","type":"story","status":"publish","title_hn":"धन, लोभ और संसार से विरक्त होकर ही होगी ब्रह्म की प्राप्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धन, लोभ और संसार से विरक्त होकर ही होगी ब्रह्म की प्राप्ति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुुर। कथा व्यास मुमुक्षु जी महाराज ने कहा कि धन, लोभ और संसार से विरक्त होकर ही ब्रह्म की प्राप्ति की जा सकती है। परमात्मा और उसकी कथा ही आनंद का सिंधु है, इसमें डुबकी लगाकर व्यक्ति इस अघोर कलियुग में भव सागर को पार कर सकता है।
गंगापुर आवास विकास कॉलोनी स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ समिति की ओर से चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा में वृंदावन से पधारे संत मुमुक्षु जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार शेरनी का दूध स्वर्ण पात्र के अतिरिक्त अन्य पात्र में रखने से बिगड़ जाता है। उसी प्रकार भागवत कथा शुद्ध मन वालों को ही फल देती है। भ्रमित मन वालों को फल नहीं देती। जिस प्रकार वैद्य शरीर की चिकित्सा करता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत पुराण कथा चेतना की चिकित्सा करती है। संसार की आवश्यकता उसे होती है जिसके जीवन में विकार होता है।
ज्ञान वैराग्य और भक्ति की कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए व्यास जी ने कहा कि काली काल में हरिनाम ही हर प्रकार से कल्याणकारी है। कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यज्ञमान दिनेश कुमार, कांति देवी व अन्य यज्ञमानों ने भागवत पुराण का पूजन कर माल्यार्पण किया। इस दौरान मनोज सक्सेना, अंकित, आनंद शर्मा, ओम, शक्ति, तिलक राज ध्यानी, विष्णु अग्रवाल, हरीश ठेकेदार, विनोद गुप्ता, दिलीप गुप्ता, पीयूष कुमार, राजेश कुमार, राकेश गुप्ता, सुभाष सक्सेना, नरेश शर्मा, सुनील कौशिक, राधेश्याम यादव, राकेश सैनी, उमेश शर्मा, अरुण शर्मा, सीताराम शर्मा, गोविंद शर्मा, दीपक गुप्ता, प्रवीण भांडा, भावना, ज्ञानेंद्र, जयंत सक्सेना, गंगा, गीता, कविता, निशा, मंजू, सीमा, प्रतिभा शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगापुर आवास विकास कॉलोनी स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ समिति की ओर से चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा में वृंदावन से पधारे संत मुमुक्षु जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार शेरनी का दूध स्वर्ण पात्र के अतिरिक्त अन्य पात्र में रखने से बिगड़ जाता है। उसी प्रकार भागवत कथा शुद्ध मन वालों को ही फल देती है। भ्रमित मन वालों को फल नहीं देती। जिस प्रकार वैद्य शरीर की चिकित्सा करता है, उसी प्रकार श्रीमद्भागवत पुराण कथा चेतना की चिकित्सा करती है। संसार की आवश्यकता उसे होती है जिसके जीवन में विकार होता है।
विज्ञापन
ज्ञान वैराग्य और भक्ति की कथा का मार्मिक वर्णन करते हुए व्यास जी ने कहा कि काली काल में हरिनाम ही हर प्रकार से कल्याणकारी है। कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यज्ञमान दिनेश कुमार, कांति देवी व अन्य यज्ञमानों ने भागवत पुराण का पूजन कर माल्यार्पण किया। इस दौरान मनोज सक्सेना, अंकित, आनंद शर्मा, ओम, शक्ति, तिलक राज ध्यानी, विष्णु अग्रवाल, हरीश ठेकेदार, विनोद गुप्ता, दिलीप गुप्ता, पीयूष कुमार, राजेश कुमार, राकेश गुप्ता, सुभाष सक्सेना, नरेश शर्मा, सुनील कौशिक, राधेश्याम यादव, राकेश सैनी, उमेश शर्मा, अरुण शर्मा, सीताराम शर्मा, गोविंद शर्मा, दीपक गुप्ता, प्रवीण भांडा, भावना, ज्ञानेंद्र, जयंत सक्सेना, गंगा, गीता, कविता, निशा, मंजू, सीमा, प्रतिभा शर्मा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन