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वीडियो कांफ्रेंसिंग से ली जा सकेगी बंदियों की रिमांड
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रामपुर। जिले में न्यायालयों के संचालन के लिए में पूर्व जारी किए गए आदेशों को हाईकोर्ट ने संशोधित कर दिया है। अब नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जो 23 जून से प्रभावी होंगे।
जिला जज ने बताया कि समस्त वाद, साक्ष्य अभिलिखित किए जाने के अतिरिक्त आवश्यक प्रकरणों में साक्ष्य जनपद न्यायाधीश की अनुमति के उपरांत अभिलिखित किया जा सकेगा। आवश्यक प्रकृति के प्रकरण, विचाराधीन बंदियों से संबंधित रिमांड या अन्य न्यायिक कार्य वीडियो क्रांफ्रेसिंग के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई तकनीकी समस्या उत्पन्न होगी तो अन्य विकल्प के माध्यम से कार्य संपादित किया जाएगा।
कार्यालय से संबंधित अन्य लंबित कार्य एवं अन्य प्रशासनिक कार्य होंगे। समस्त न्यायिक अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण कार्य के समाप्ति के उपरांत न्यायालय परिसर छोड़ेंगे। प्रतिदिन प्रभारी अधिकारी (नजारत) न्यायालय की साफ-सफाई एवं सैनिटाइजेशन कराएंगे। साथ ही बिना थर्मल स्क्रीनिंग के किसी न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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न्यायिक सेवा केंद्र कंप्यूटर अनुभाग में नवीन प्रकरण व प्रार्थनापत्र (दांडिक एवं सिविल) प्रस्तुत किए जाएंगे। कंप्यूटर अनुभाग द्वारा उन्हें सीआईएस में पंजीकृत किया जाएगा। प्रत्येक प्रार्थनापत्र में अधिवक्ता या वादकारी का मोबाइल नंबर दर्ज होना आवश्यक है। जिला न्यायालय की ई-मेल स्थापित की जाएगी तथा जिला न्यायालय की बेवसाइट को प्रकाशित किया जाएगा।
इस ई-मेल के माध्यम से जमानत व अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र एवं अन्य आवश्यक प्रार्थनापत्र व लिखित बहस प्राप्त किए जाएंगे तथा इस माध्यम को वैकल्पिक माध्यम के रूप में उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक न्यायालय कक्ष में अधिवक्तागण के लिए चार कुर्सी की व्यवस्था रहेगी। संवाद
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जिला जज ने बताया कि समस्त वाद, साक्ष्य अभिलिखित किए जाने के अतिरिक्त आवश्यक प्रकरणों में साक्ष्य जनपद न्यायाधीश की अनुमति के उपरांत अभिलिखित किया जा सकेगा। आवश्यक प्रकृति के प्रकरण, विचाराधीन बंदियों से संबंधित रिमांड या अन्य न्यायिक कार्य वीडियो क्रांफ्रेसिंग के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा। यदि कोई तकनीकी समस्या उत्पन्न होगी तो अन्य विकल्प के माध्यम से कार्य संपादित किया जाएगा।
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कार्यालय से संबंधित अन्य लंबित कार्य एवं अन्य प्रशासनिक कार्य होंगे। समस्त न्यायिक अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण कार्य के समाप्ति के उपरांत न्यायालय परिसर छोड़ेंगे। प्रतिदिन प्रभारी अधिकारी (नजारत) न्यायालय की साफ-सफाई एवं सैनिटाइजेशन कराएंगे। साथ ही बिना थर्मल स्क्रीनिंग के किसी न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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न्यायिक सेवा केंद्र कंप्यूटर अनुभाग में नवीन प्रकरण व प्रार्थनापत्र (दांडिक एवं सिविल) प्रस्तुत किए जाएंगे। कंप्यूटर अनुभाग द्वारा उन्हें सीआईएस में पंजीकृत किया जाएगा। प्रत्येक प्रार्थनापत्र में अधिवक्ता या वादकारी का मोबाइल नंबर दर्ज होना आवश्यक है। जिला न्यायालय की ई-मेल स्थापित की जाएगी तथा जिला न्यायालय की बेवसाइट को प्रकाशित किया जाएगा।
इस ई-मेल के माध्यम से जमानत व अग्रिम जमानत प्रार्थनापत्र एवं अन्य आवश्यक प्रार्थनापत्र व लिखित बहस प्राप्त किए जाएंगे तथा इस माध्यम को वैकल्पिक माध्यम के रूप में उपयोग किया जाएगा। प्रत्येक न्यायालय कक्ष में अधिवक्तागण के लिए चार कुर्सी की व्यवस्था रहेगी। संवाद