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भागवान विष्णु ने तोड़ा नारद का अहंकार
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Sat, 10 Oct 2015 11:39 PM IST
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नगर में चल रहे रामलीला मंचन में रावण जन्म, नारद मोह, रावण की ओर से तपस्या करने आदि लीलाओं का मंचन किया गया। श्री सनातन रामलीला कमेटी की रामलीला में सुबह के समय श्रीकृष्ण लीला का मंचन हुआ। इसमें शनिवार को कान्हा के जन्म और गोकुल पहुंचने की लीलाओं को दिखाया गया।
कोसी मंदिर मार्ग स्थित रामलीला मैदान में श्री सनातन रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला मंचन का आयोजन कराया जा रहा है। मुख्य अतिथि के पूजन के बाद रामलीला मंचन शुरू हुआ। शनिवार को नारद मोह लीला का मंचन काफी सराहा गया। इसमें कलाकारों की ओर से नारदजी के मन में इस बात के अहंकार का होना दर्शाया गया कि उनसे अधिक भगवान के करीब कोई नहीं है।
नारद मुनि के घमंड को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु की ओर से माया नगरी की रचना करना और माया नगरी में मोहिनी के मोह में नारदजी के डूबने की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद नारद जी की ओर से भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगने पर भगवान की ओर से उन्हें वानर रूप देने और इसका अहसास होने पर नारदजी की ओर से भगवान विष्णु को श्राप दिया जाना की संकट में वानर ही उनका सहयोग करेंगे का मंचन किया गया।
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रावण जन्म, रावण की ओर से घमंड में घोषणा करना कि उससे बड़ा वीर धरती पर कोई नहीं है आदि लीलाओं का मंचन किया गया। इसके साथ ही सुबह को श्रीकृष्ण लीला का मंचन किया गया। इसमें कान्हा के अवतरित होने और गोकुल पहुंचने की लीला का मंचन किया गया।
इस दौरान नवल किशोर खंडेलवाल, शिव हरि गर्ग, राकेश कुमार जैन, सुदर्शन कुमार गुप्ता, विष्णु सरन, सुभाष चंद्र अग्रवाल, सुनील कुमार गोयल, डा. अजय कुमार अग्रवाल, ईश्वर सरन अग्रवाल, अनिल कुमार चौरसिया, मनोज कुमार अग्रवाल, वीरेंद्र कुमार गर्ग आदि मौजूद रहे।
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कोसी मंदिर मार्ग स्थित रामलीला मैदान में श्री सनातन रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला मंचन का आयोजन कराया जा रहा है। मुख्य अतिथि के पूजन के बाद रामलीला मंचन शुरू हुआ। शनिवार को नारद मोह लीला का मंचन काफी सराहा गया। इसमें कलाकारों की ओर से नारदजी के मन में इस बात के अहंकार का होना दर्शाया गया कि उनसे अधिक भगवान के करीब कोई नहीं है।
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नारद मुनि के घमंड को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु की ओर से माया नगरी की रचना करना और माया नगरी में मोहिनी के मोह में नारदजी के डूबने की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद नारद जी की ओर से भगवान विष्णु से सुंदर रूप मांगने पर भगवान की ओर से उन्हें वानर रूप देने और इसका अहसास होने पर नारदजी की ओर से भगवान विष्णु को श्राप दिया जाना की संकट में वानर ही उनका सहयोग करेंगे का मंचन किया गया।
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रावण जन्म, रावण की ओर से घमंड में घोषणा करना कि उससे बड़ा वीर धरती पर कोई नहीं है आदि लीलाओं का मंचन किया गया। इसके साथ ही सुबह को श्रीकृष्ण लीला का मंचन किया गया। इसमें कान्हा के अवतरित होने और गोकुल पहुंचने की लीला का मंचन किया गया।
इस दौरान नवल किशोर खंडेलवाल, शिव हरि गर्ग, राकेश कुमार जैन, सुदर्शन कुमार गुप्ता, विष्णु सरन, सुभाष चंद्र अग्रवाल, सुनील कुमार गोयल, डा. अजय कुमार अग्रवाल, ईश्वर सरन अग्रवाल, अनिल कुमार चौरसिया, मनोज कुमार अग्रवाल, वीरेंद्र कुमार गर्ग आदि मौजूद रहे।