{"_id":"5d5443b58ebc3e6c9a25df12","slug":"proof-will-hand-over-to-sp-vegelance-on-monday-rampur-news-mbd318608694","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं मिले एसपी विजिलेंस, अब सोमवार को सौपेंगे साक्ष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं मिले एसपी विजिलेंस, अब सोमवार को सौपेंगे साक्ष्य
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। जल निगम की कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस के घोटालों की जांच कर रही विजिलेंस के एसपी नहीं मिले। ऐसे में साक्ष्य नहीं सौंपे जा सके। अब शिकायतकर्ता सोमवार को दोबारा एसपी के सामने पेश होंगे और साक्ष्य सौंपेंगे।
समाजवादी सरकार के कार्यकाल में शहर में अरबों रुपये के विकास कार्य कराए गए थे। ज्यादातर काम जल निगम की निर्माण इकाई सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) की ओर से किए गए थे। तब सीएंडडीएस की चार इकाई रामपुर में कार्य कर रहीं थीं। इनमें यूनिट 54, 30, एक और दो शामिल हैं। इन यूनिटों की ओर से शहर में सौंदर्यीकरण के कार्यों से लेकर राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान, झील, गेट इत्यादि का काम किया था जबकि, पानी की टंकियों का निर्माण जल निगम की ओर से किया गया था। सपा सरकार के जाने के बाद आनन फानन में फर्मों को भुगतान किया गया था, जिसमें करोड़ों रुपये का भुगतान फर्जी कार्यों के लिए कर दिया गया था। यहां तक कि सेनेटेज का पैसा भी ठेकेदार और अधिकारी मिलकर खा गए।
प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना हनी ने शासन से शिकायत की थी। इसमें ठेकेदारों को गलत भुगतान के आरोप लगाए गए थे। सबसे बड़ी बात कुछ ऐसे कार्यों के लिए भी भुगतान किया गया था, जो सिर्फ कागजों में ही किए गए। इस तरह विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। शिकायत के बाद शासन ने यह जांच विजिलेंस को दे दी है। इसके बाद विजिलेंस ने विभाग से कुछ रिकार्ड भी तलब किया था। शिकायतकर्ता से भी साक्ष्य मांगे थे, जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया था। बुधवार को शिकायतकर्ता बरेली विजिलेंस के दफ्तर गए, लेकिन पता लगा कि विजिलेंस के एसपी नहीं हैं। ऐसे में वह वापस आ गए। अब सोमवार को दोबारा विजिलेंस के सामने पेश होंगे, जिसके बाद साक्ष्य सौंपे जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
समाजवादी सरकार के कार्यकाल में शहर में अरबों रुपये के विकास कार्य कराए गए थे। ज्यादातर काम जल निगम की निर्माण इकाई सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) की ओर से किए गए थे। तब सीएंडडीएस की चार इकाई रामपुर में कार्य कर रहीं थीं। इनमें यूनिट 54, 30, एक और दो शामिल हैं। इन यूनिटों की ओर से शहर में सौंदर्यीकरण के कार्यों से लेकर राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान, झील, गेट इत्यादि का काम किया था जबकि, पानी की टंकियों का निर्माण जल निगम की ओर से किया गया था। सपा सरकार के जाने के बाद आनन फानन में फर्मों को भुगतान किया गया था, जिसमें करोड़ों रुपये का भुगतान फर्जी कार्यों के लिए कर दिया गया था। यहां तक कि सेनेटेज का पैसा भी ठेकेदार और अधिकारी मिलकर खा गए।
विज्ञापन
प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद भाजपा लघु उद्योग प्रकोष्ठ के क्षेत्रीय संयोजक आकाश सक्सेना हनी ने शासन से शिकायत की थी। इसमें ठेकेदारों को गलत भुगतान के आरोप लगाए गए थे। सबसे बड़ी बात कुछ ऐसे कार्यों के लिए भी भुगतान किया गया था, जो सिर्फ कागजों में ही किए गए। इस तरह विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। शिकायत के बाद शासन ने यह जांच विजिलेंस को दे दी है। इसके बाद विजिलेंस ने विभाग से कुछ रिकार्ड भी तलब किया था। शिकायतकर्ता से भी साक्ष्य मांगे थे, जिसके लिए उन्हें नोटिस जारी किया गया था। बुधवार को शिकायतकर्ता बरेली विजिलेंस के दफ्तर गए, लेकिन पता लगा कि विजिलेंस के एसपी नहीं हैं। ऐसे में वह वापस आ गए। अब सोमवार को दोबारा विजिलेंस के सामने पेश होंगे, जिसके बाद साक्ष्य सौंपे जाएंगे।
विज्ञापन