दिनदहाड़े होती थीं हत्याएं: 90 के दशक में बिलासपुर में भी चरम पर था उग्रवाद, नौ लोगों का कर दिया था एकसाथ कत्ल
अमर उजाला में 19 नवंबर 1991 को छपी खबर के अनुसार उग्रवादियों ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए युवक की हत्या का बदला लेने के लिए पुलिस अफसरों की हत्या की साजिश रची थी। उग्रवादी नैनीताल रोड पर घात लगाए जंगल में बैठे थे लेकिन रात तक जब अधिकारी उस रास्ते से नहीं गुजरे तो छह रोडवेज कर्मियों सहित नाै लोगों की हत्या कर दी थी।
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90 के दशक में बिलासपुर में उग्रवाद चरम पर पहुंच गया था। 1984 के दंगों के बाद पंजाब से आए खालिस्तान समर्थक उग्रवादियों ने स्थानीय युवाओं की मदद से जगह-जगह लोगों की हत्याएं, अपहरण, दुष्कर्म, फिरौती मांगने जैसी जघन्य वारदातों को अंजाम दिया था। नवंबर 1991 में उग्रवादियों ने बिलासपुर थाने क्षेत्र के बिशारदनगर के जंगल में छह रोडवेज कर्मियों सहित नाै लोगों की हत्या कर दी थी। उग्रवादियों की पुलिस अफसरों को मारने की योजना थी, लेकिन उसमें असफल रहे थे।
अमर उजाला में 19 नवंबर 1991 को छपी खबर के अनुसार उग्रवादियों ने पुलिस मुठभेड़ में मारे गए युवक की हत्या का बदला लेने के लिए पुलिस अफसरों की हत्या की साजिश रची थी। उग्रवादी नैनीताल रोड पर घात लगाए जंगल में बैठे थे लेकिन रात तक जब अधिकारी उस रास्ते से नहीं गुजरे तो छह रोडवेज कर्मियों सहित नाै लोगों की हत्या कर दी थी। इसमें तीन लोग एक ही परिवार के थे। बाद में पुलिस ने मुठभेड़ में इस हत्याकांड में शामिल रहे तीन उग्रवादियों को ढेर कर दिया था। इसमें एक पंजाब का दुर्दांत उग्रवादी जोगेंद्र सिंह भी था।
पंजाब के एसएसपी मलखान सिंह ने यूपी पुलिस की मदद से 1992 के अंत में जब उग्रवाद का खत्मा किया तो बिलासपुर के लोगों ने राहत की सांस ली। 1984 के दंगों के बाद पंजाब से आए उग्रवादियों ने बिलासपुर, मिलक खानम, स्वार, पीलीभीत आदि क्षेत्र को अपनी शरण स्थली बनाया। उग्रवादी दिनभर गन्ने के खेतों में रहते थे और रात में वारदातों को अंजाम देते थे।
उग्रवादियों ने माटखेड़ा निवासी गोविंदराम वर्मा को अपहरण कर उनके घर में ही बंधक बना लिया था। इसी तरह ग्राम पहाड़पुर निवासी डॉ. देवेंद्र जोशी का भी आतंकियों ने अपहरण कर लिया और उन्हें पीपली के जंगल में कैद करके रखा। बाद में गोविंद वर्मा व डॉक्टर देवेंद्र जोशी के परिजनों से मोटी फिरौती वसूलकर उन्हें मुक्त किया। इसके अलावा वर्ष 1991 में स्वार कोतवाली में तैनात दरोगा सुधनवा सिंह तोमर की गद्दीनगली गांव के जंगल में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
तत्कालीन एसडीएम का किया
1988 में आतंकवादियों ने तत्कालीन एसडीएम रामसिंह धनखड़ का अपहरण कर लिया था। उन्हें हजरतपुर के एक फार्म हाउस में बंधक बनाकर रखा था। बाद में पुलिस प्रशासन ने उन्हें किसी तरह मुक्त कराया। उप्र के तत्कालीन डीजीपी ने भी यहां पहुंचकर एसडीएम से मुलाकात की थी।
इन क्षेत्रों को उग्रवादियों ने बनाया था शरणस्थली
उग्रवादियों ने तराई के क्षेत्र के ग्राम रवाना लाला उर्फ बिशनपुरी, मुशर्रफगंज, गोकुलनगरी, सीहोर, रम्पुरा, पईपुरा, खाता, गोधी, मानपुरओझा, माटखेड़ा, हजरतपुर, पीपली का जंगल, डंडिया का जंगल, पिपलिया महतो, ढाकी, सूआनगला, डिबडिबा, मनिहारखेड़ा, मिलक खानम, माटखेड़ा आदि गांवों के जंगलों व इन क्षेत्रों में रहने वाले कुछ प्रमुख फार्म हाउसों को अपना ठिकाना बना लिया था। उग्रवादियों के डर से बिलासपुर व स्वार क्षेत्र के तमाम लोग यहां से पलायन कर रुद्रपुर चले गए और रुद्रपुर में ही परिवार सहित सुरक्षित रहना शुरू कर दिया था। आज भी कुछ लोग रुद्रपुर में ही निवास कर रहे हैं।
पुलिस ने मार गिराए थे सात उग्रवादी
खजुरिया थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी कविंद्र नारायण मिश्रा ने रम्पुरा गांव के जंगल में भारी पुलिस फोर्स के साथ कांबिंग करके तीन उग्रवादियों को मार गिराया था। पुलिस ने एक उग्रवादी सतनाम सिंह उर्फ जाबंदा को आरक्षित डंडिया के जंगल में मार गिराया था। सीहोर गांव के जंगल में भी एक उग्रवादी को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके अलावा लालपुर गांव स्थित साहनी फॉर्म के जंगल में भी दो उग्रवादियों हीरा सिंह व निम्मा सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। हालांकि, इन सभी उग्रवादियों को पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की स्थानीय पुलिस की तरफ से कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है।
दिनदहाड़े होती थीं हत्याएं
1992 में बाइक सवार तीन उग्रवादियों ने बिलासपुर केमरी रोड स्थित ग्राम धावनी हसनपुर के पास एक यात्री बस रोककर बस में सवार केमरी निवासी एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं, बस के पास ही शमशाबाद निवासी एक साइकिल सवार की भी गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद इन्हीं उग्रवादियों ने कुछ दूरी पर ग्राम कुइया ताल महावर के पास मिलक निवासी एक शिक्षक को भी गोली मारकर घायल कर दिया था। बाद में बेगमाबाद चंदवा सराय रोड पर एक नदी के पास जीप सवार दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। ग्राम खेमपुर के लोगों ने जब उन्हें खाना नहीं पहुंचाया तो रात में उग्रवादियों ने तीन घरों पर धावा बोलकर तमाम लोगों को मारपीट कर घायल कर दिया था।
यूपी-पंजाब पुलिस से मुठभेड़ में तीन खालिस्तानी आतंकी ढेर
सोमवार को पीलीभीत जिले में यूपी और पंजाब पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। यूपी और पंजाब पुलिस ने मुठभेड़ में तीन खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया है। तीनों आतंकी 'खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स' आतंकी संगठन के थे। मौके से दो एके-47 और दो पिस्टल बरामद की गई हैं। तीनों ने गुरदासपुर चौकी पर ग्रेनेड फेंका था।