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त्याग के बिना मानव कल्याण संभव नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Fri, 25 Sep 2015 11:37 PM IST
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कल्याणकारी पर्यूषण महोत्सव के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म के महत्व को समझाया गया। श्री पार्श्वनाथ और श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुए त्याग के लिए प्रेरित किया गया। महोत्सव में प्रात: काल में प्रक्षाल पूजन और शाम को सामूहिक आरती हुई।
सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताया गया। मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने कहा कि त्याग के बिना मानव का कल्याण संभव नहीं है। त्याग धर्म के पालन से ही मनुष्य जीवन भर सुख भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। शाम को संगीतमय आरती एवं भजन का आयोजन हुआ।
इस दौरान संजय जैन, डा. शीनू जैन, कृति, रमा, पूनम, शशि, सरोज, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी आदि मौजूद रहे। वहीं, फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आठवें दिन प्रक्षाल पूजन से शुरुआत की गई।
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दशलक्षण पूजा कर तत्वार्थ सूत्र वाचन सुनीता जैन शास्त्री ने किया। सामूहिक आरती, लकी ड्रॉ, शास्त्र प्रवचन, अतीत का स्मरण और प्रवचन आधारित प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुनीता जैन शास्त्री और पदमा दीदी ने उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताया। कहा कि त्याग शब्द की उत्पत्ति त्यष्ट धातु से हुई है। इसका अर्थ है छोड़ना।
जिस प्रकार वृक्ष अपने फलों का त्याग करता है, उसके बाद ही नए फल प्राप्त होते हैं। उसी प्रकार जब मनुष्य दान करता है, तो उसे भी प्राप्ति होती है। इस दौरान अशोक कुमार जैन, विशाल जैन, शोभित जैन, नेहा जैन, आरके जैन, दया जैन, अनुराग जैन, देवेंद्र कुमार जैन, आशीष जैन, नितिन जैन, प्रमोद कुमार जैन, अक्षय जैन, श्रेयांश जैन, रमेश रहे।
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सिविल लाइंस स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताया गया। मथुरा चौरासी से आए पंडित शशांक शास्त्री ने कहा कि त्याग के बिना मानव का कल्याण संभव नहीं है। त्याग धर्म के पालन से ही मनुष्य जीवन भर सुख भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। शाम को संगीतमय आरती एवं भजन का आयोजन हुआ।
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इस दौरान संजय जैन, डा. शीनू जैन, कृति, रमा, पूनम, शशि, सरोज, दिनेश जैन, वंदना, मोनिका, हरीश, सर्वेश, रमेश सेठी, जुगल किशोर, सुनील जैन, विजय दिवाकर, धमेंद्र सेठी आदि मौजूद रहे। वहीं, फूटा महल स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आठवें दिन प्रक्षाल पूजन से शुरुआत की गई।
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दशलक्षण पूजा कर तत्वार्थ सूत्र वाचन सुनीता जैन शास्त्री ने किया। सामूहिक आरती, लकी ड्रॉ, शास्त्र प्रवचन, अतीत का स्मरण और प्रवचन आधारित प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। सुनीता जैन शास्त्री और पदमा दीदी ने उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताया। कहा कि त्याग शब्द की उत्पत्ति त्यष्ट धातु से हुई है। इसका अर्थ है छोड़ना।
जिस प्रकार वृक्ष अपने फलों का त्याग करता है, उसके बाद ही नए फल प्राप्त होते हैं। उसी प्रकार जब मनुष्य दान करता है, तो उसे भी प्राप्ति होती है। इस दौरान अशोक कुमार जैन, विशाल जैन, शोभित जैन, नेहा जैन, आरके जैन, दया जैन, अनुराग जैन, देवेंद्र कुमार जैन, आशीष जैन, नितिन जैन, प्रमोद कुमार जैन, अक्षय जैन, श्रेयांश जैन, रमेश रहे।