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परीक्षाकेंद्र बिलासपुर में, तलाश रहे रामपुर में
ब्यूरो/अमर उजाला रामपुर
Updated Sun, 08 Nov 2015 11:50 PM IST
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कर्मचारी चयन सेवा आयोग की ओर से रविवार को आयोजित चकबंदी लेखपाल की परीक्षा में अफसरों और कर्मियों की लापरवाही सैकड़ों अभ्यर्थियों पर भारी पड़ी। एडमिट कार्ड में परीक्षा केंद्र का नाम तो था, लेकिन परीक्षा केंद्र कहां हैं ये दर्ज ही नही था। सैकड़ों अभ्यर्थी घंटों परीक्षा केंद्रों के चक्कर लगाते रहे। इसी फेर में उनकी परीक्षा भी छूट गई।
इसको लेकर अभ्यर्थियों में गुस्सा छाया रहा। आयोग की इस चूक से अभ्यर्थियों में आक्रोश है। कर्मचारी चयन आयोग की ओर से रविवार को प्रदेश भर में चकबंदी विभाग में लेखपाल पद के लिए भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था। 2831 पदों के लिए प्रदेश भर में लाखों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
रामपुर में इस परीक्षा को लेकर काफी फजीहत हुई। अभ्यर्थियों को जो प्रवेश पत्र जारी किए गए थे, उसमें परीक्षा केंद्र का नाम तो दिया गया है, लेकिन ये कहीं नहीं लिखा गया था कि परीक्षा केंद्र है कहां। तमाम परीक्षार्थियों का सेंटर डीएवी इंटर कालेज बनाया गया था। डीएवी कालेज बिलासपुर में है।
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एडमिट कार्ड पर बिलासपुर तहसील का नाम ही नहीं था। एडमिट कार्ड पर लिखा था डीएवी कालेज रामपुर। तहसील का नाम रामपुर दर्ज होने से तमाम परीक्षार्थी रामपुर में ही चक्कर लगाते रहे। अभ्यर्थियों ने केंद्र का पता लगाने के लिए शहर के ही परीक्षा केंद्रों पर चक्कर लगाने शुरू कर दिए। कहीं भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई।
लिहाजा परीक्षा का वक्त भी निकल गया। इसको लेकर अभ्यर्थियों में गुस्सा छा गया। गुस्साए अभ्यर्थियों ने इस मामले की शिकायत कलेक्ट्रेट पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट से की तो खलबली मच गई। मामला आयोग तक पहुंचा। इसके बाद इन अभ्यर्थियों की परीक्षा उसी केंद्र पर अतिरिक्त समय देकर कराने की बात कही गई।
नगर मजिस्ट्रेट मदन गर्बियाल ने अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि वो जल्द ही बिलासपुर में परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं, वहीं पर परीक्षा होगी। इसके बाद तमाम परीक्षार्थियों ने बिलासपुर कूच कर गए। कई परीक्षा दिए बिना ही बैरंग वापस हो गए। नगर मजिस्ट्रेट ने बताया कि इस मामले को आयोग से अवगत करा दिया गया है।
कर्मचारी चयन सेवा आयोग की लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया। प्रशासनिक अफसरों ने भटक रहे अभ्यर्थियों को बिलासपुर जाने की सलाह दी। कितने अभ्यर्थियों बिलासपुर पहुंचे और कितने नहीं। इसकी जानकारी भी अफसरों ने नहीं ली।
अफसरों का कहना था कि ये जिम्मेदारी अभ्यर्थियों की थी कि उन्हें पहले से ही परीक्षा केंद्रों के बारे में जानकारी लेना चाहिए थी। अपर जिलाधिकारी एवं नोडल अफसर एमपी सिंह का कहना है कि इस मुद्दे पर प्रशासन की कोई चूक नहीं है।
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इसको लेकर अभ्यर्थियों में गुस्सा छाया रहा। आयोग की इस चूक से अभ्यर्थियों में आक्रोश है। कर्मचारी चयन आयोग की ओर से रविवार को प्रदेश भर में चकबंदी विभाग में लेखपाल पद के लिए भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था। 2831 पदों के लिए प्रदेश भर में लाखों अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।
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रामपुर में इस परीक्षा को लेकर काफी फजीहत हुई। अभ्यर्थियों को जो प्रवेश पत्र जारी किए गए थे, उसमें परीक्षा केंद्र का नाम तो दिया गया है, लेकिन ये कहीं नहीं लिखा गया था कि परीक्षा केंद्र है कहां। तमाम परीक्षार्थियों का सेंटर डीएवी इंटर कालेज बनाया गया था। डीएवी कालेज बिलासपुर में है।
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एडमिट कार्ड पर बिलासपुर तहसील का नाम ही नहीं था। एडमिट कार्ड पर लिखा था डीएवी कालेज रामपुर। तहसील का नाम रामपुर दर्ज होने से तमाम परीक्षार्थी रामपुर में ही चक्कर लगाते रहे। अभ्यर्थियों ने केंद्र का पता लगाने के लिए शहर के ही परीक्षा केंद्रों पर चक्कर लगाने शुरू कर दिए। कहीं भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई।
लिहाजा परीक्षा का वक्त भी निकल गया। इसको लेकर अभ्यर्थियों में गुस्सा छा गया। गुस्साए अभ्यर्थियों ने इस मामले की शिकायत कलेक्ट्रेट पहुंचकर सिटी मजिस्ट्रेट से की तो खलबली मच गई। मामला आयोग तक पहुंचा। इसके बाद इन अभ्यर्थियों की परीक्षा उसी केंद्र पर अतिरिक्त समय देकर कराने की बात कही गई।
नगर मजिस्ट्रेट मदन गर्बियाल ने अभ्यर्थियों को आश्वासन दिया कि वो जल्द ही बिलासपुर में परीक्षा केंद्र पर पहुंच जाएं, वहीं पर परीक्षा होगी। इसके बाद तमाम परीक्षार्थियों ने बिलासपुर कूच कर गए। कई परीक्षा दिए बिना ही बैरंग वापस हो गए। नगर मजिस्ट्रेट ने बताया कि इस मामले को आयोग से अवगत करा दिया गया है।
कर्मचारी चयन सेवा आयोग की लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया। प्रशासनिक अफसरों ने भटक रहे अभ्यर्थियों को बिलासपुर जाने की सलाह दी। कितने अभ्यर्थियों बिलासपुर पहुंचे और कितने नहीं। इसकी जानकारी भी अफसरों ने नहीं ली।
अफसरों का कहना था कि ये जिम्मेदारी अभ्यर्थियों की थी कि उन्हें पहले से ही परीक्षा केंद्रों के बारे में जानकारी लेना चाहिए थी। अपर जिलाधिकारी एवं नोडल अफसर एमपी सिंह का कहना है कि इस मुद्दे पर प्रशासन की कोई चूक नहीं है।