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जौहर ट्रस्ट का 7.135 हेक्टेयर जमीन का पट्टा निरस्त
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रामपुर। सांसद मोहम्मद आजम खां के जौहर ट्रस्ट से 7.135 हेक्टेयर जमीन का पट्टा एसडीएम सदर की कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने जमीन को उसके मूल रूप में दर्ज करने का आदेश दिए हैं। यह जमीन 2013 में महज 60 रुपये के किराय पर 30 सालों के लिए लीज पर आवंटित की गई थी। आरोप है कि इसके लिए जमीन का उपयोग भी गलत तरीके से बदल दिया गया था।
मामला ग्राम सींगनखेड़ा का है। यहां काफी जमीन नदी के रेत के रूप में दर्ज थी। लेकिन, 24 जून 2013 को गर्वनमेंट ग्रांट एक्ट 1895 के तहत जमीन का उपयोग बदलते हुए मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संयुक्त सचिव नसीर अहमद खां के नाम पट्टा आवंटित कर दिया गया। इसमें गाटा संख्या 1252मि. रकबा 7.097 हेक्टेयर एवं गाटा संख्या 1418 मि. रकबा 0.038 हेक्टेयर को शामिल किया गया। पट्टे का किराया मात्र 60 रुपये तय किया गया था, जो 30 वर्षों के लिए था। किन्तु, यह जमीन गलत तरीके से आवंटित की गई थी, जिसके बाद तहसीलदार सदर ने उपजिलाधिकारी सदर के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादी को आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन, आठ, 15 और 24 जुलाई को नोटिस जारी किए। लेकिन, प्रतिवादी न तो न्यायालय में आए और न ही आपत्ति दाखिल की। इस पर 24 जुलाई को प्रतिवादी की आपत्ति का अवसर समाप्त किया गया। कोर्ट ने साक्ष्यों का अध्य्यन किया। प्रश्नगत आराजी नवीन परती खतौनी वर्ष 1426-1431 फसली के खाता संख्या 1313 में दर्ज थी। तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने 29 अक्टूबर 2013 के आदेश में रकबा 8.239 हेक्टेयर के स्थान पर 7.097 हेक्टेयर दर्ज किया। चूंकि, यह जमीन रेत की भूमि के रूप में दर्ज थी। लिहाजा, इस जमीन को उसके मूल स्वरूप में दर्ज किया जाए। उन्होंने पट्टा निरस्त करने के लिए कहा। एसडीएम सदर की कोर्ट ने जमीन का पट्टा निरस्त करते हुए मूल स्वरूप यानी रेत में दर्ज करने का आदेश पारित किया है। साथ ही अमल दरामद जारी करने के भी आदेश दिए हैं।
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मामला ग्राम सींगनखेड़ा का है। यहां काफी जमीन नदी के रेत के रूप में दर्ज थी। लेकिन, 24 जून 2013 को गर्वनमेंट ग्रांट एक्ट 1895 के तहत जमीन का उपयोग बदलते हुए मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा संयुक्त सचिव नसीर अहमद खां के नाम पट्टा आवंटित कर दिया गया। इसमें गाटा संख्या 1252मि. रकबा 7.097 हेक्टेयर एवं गाटा संख्या 1418 मि. रकबा 0.038 हेक्टेयर को शामिल किया गया। पट्टे का किराया मात्र 60 रुपये तय किया गया था, जो 30 वर्षों के लिए था। किन्तु, यह जमीन गलत तरीके से आवंटित की गई थी, जिसके बाद तहसीलदार सदर ने उपजिलाधिकारी सदर के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रतिवादी को आपत्ति दाखिल करने के लिए तीन, आठ, 15 और 24 जुलाई को नोटिस जारी किए। लेकिन, प्रतिवादी न तो न्यायालय में आए और न ही आपत्ति दाखिल की। इस पर 24 जुलाई को प्रतिवादी की आपत्ति का अवसर समाप्त किया गया। कोर्ट ने साक्ष्यों का अध्य्यन किया। प्रश्नगत आराजी नवीन परती खतौनी वर्ष 1426-1431 फसली के खाता संख्या 1313 में दर्ज थी। तत्कालीन उपजिलाधिकारी ने 29 अक्टूबर 2013 के आदेश में रकबा 8.239 हेक्टेयर के स्थान पर 7.097 हेक्टेयर दर्ज किया। चूंकि, यह जमीन रेत की भूमि के रूप में दर्ज थी। लिहाजा, इस जमीन को उसके मूल स्वरूप में दर्ज किया जाए। उन्होंने पट्टा निरस्त करने के लिए कहा। एसडीएम सदर की कोर्ट ने जमीन का पट्टा निरस्त करते हुए मूल स्वरूप यानी रेत में दर्ज करने का आदेश पारित किया है। साथ ही अमल दरामद जारी करने के भी आदेश दिए हैं।
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