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Rampur News: पश्चिमी यूपी को कब मिलेगी हाईकोर्ट बेंच, 71 साल बाद भी सवाल बरकरार
Sun, 06 Sep 2026 01:36 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sun, 06 Sep 2026 01:36 AM IST
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रामपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित किए जाने की मांग को लेकर अधिवक्ता पिछले सात दशक से संघर्ष कर रहे हैं। वकीलों का कहना है कि पश्चिमी यूपी के लोगों को हाईकोर्ट से जुड़े मामलों के लिए प्रयागराज तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। ऐसे में क्षेत्र में हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना अब जरूरत बन चुकी है।
अधिवक्ताओं के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कोई नई नहीं है। वर्ष 1955 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद के समय से यह मांग उठती रही है। इसके बाद कई बार आंदोलन हुए, प्रस्ताव भेजे गए और वकीलों ने हड़ताल तक की, लेकिन सात दशक से अधिक समय गुजरने के बाद भी पश्चिमी यूपी को हाईकोर्ट की खंडपीठ नहीं मिल सकी। वकीलों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा भूभाग प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट से काफी दूर है। किसी मुकदमे की सुनवाई के लिए अधिवक्ताओं और वादकारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गरीब और मध्यमवर्गीय पक्षकारों के लिए बार-बार प्रयागराज जाना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। कई बार यात्रा में ही काफी समय खर्च हो जाता है, जिसका असर मुकदमों की पैरवी पर भी पड़ता है। अधिवक्ताओं के अनुसार देश के कई बड़े राज्यों में क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार हाईकोर्ट की खंडपीठें स्थापित की गई हैं। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे बड़े क्षेत्र को भी न्याय की सुविधा के लिए हाईकोर्ट बेंच मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि बेंच की स्थापना होने से वादकारियों को उनके घर के अपेक्षाकृत नजदीक न्याय मिलने के साथ न्यायिक व्यवस्था पर भी दबाव कम होगा। वकीलों का कहना है कि 1955 से चली आ रही मांग अब 71 वर्ष की हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ता आंदोलन करते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को अब इस मांग को केवल आश्वासन तक सीमित न रखकर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
वकीलों की प्रमुख मांगें
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ स्थापित की जाए।
बेंच के स्थान को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का जल्द समाधान हो।
केंद्र और प्रदेश सरकार इस संबंध में ठोस पहल करें।
वादकारियों को लंबी दूरी और आर्थिक बोझ से राहत दिलाई जाए।
सात दशक पुरानी मांग को अब आश्वासन के बजाय निर्णय के स्तर तक पहुंचाया जाए।
बोले अधिवक्ता
-हाईकोर्ट की बेंच सालों से चली आ रही है लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। लगातार वकील संघर्ष कर रहे हैं। पश्चिम यूपी में यदि बेंच स्थापित हो जाए तो वादकारियों को पांच सौ किलोमीटर का सफर बचेगा और लोगों को सस्ता व सुलभ न्याय मिलेगा। -सर्वजीत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन
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-हाईकोर्ट की बेंच का पश्चिम यूपी के किसी जिले में स्थापित होना बेहद जरूरी है। इससे वादकारियों को काफी राहत मिलेगी। इस मांग को लेकर वकील लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। -मोहम्मद उसमान, महासचिव बार एसोसिएशन
-हाईकोर्ट की पश्चिम यूपी में बेंच स्थापित होना बेहद जरूरी है। इसके लिए वकील लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। -संजीव यादव, कोषाध्यक्ष बार एसोसिएशन
-हाईकोर्ट की बेंच जरूरी है। लंबे समय से वकील इसको लेकर मांग उठा रहे हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। -जसविंदर सिंह, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहे वकील
क्रासर
हर शनिवार भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का बार एसोसिएशन ने लिया है निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता शनिवार को सामूहिक अवकाश पर रहे।
तीन सितंबर को बार एसोसिएशन के सभागार में हुई बैठक में हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से पारित प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया था। इसी को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहने का फैसला लिया गया था। इस दौरान हुई
बैठक में अधिवक्ताओं ने संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रत्येक शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। इस दौरान अधिवक्ता किसी भी न्यायिक कार्य में सहयोग नहीं करेंगे। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की जा रही है। आंदोलन को मजबूती देने के लिए रामपुर के अधिवक्ता भी संघर्ष समिति के साथ खड़े हैं। बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद लोधी ने की, जबकि संचालन महासचिव मोहम्मद उस्मान खां ने किया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट की बेंच को लेकर अधिवक्ता आज सामूहिक अवकाश पर रहे।
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अधिवक्ताओं के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग कोई नई नहीं है। वर्ष 1955 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद के समय से यह मांग उठती रही है। इसके बाद कई बार आंदोलन हुए, प्रस्ताव भेजे गए और वकीलों ने हड़ताल तक की, लेकिन सात दशक से अधिक समय गुजरने के बाद भी पश्चिमी यूपी को हाईकोर्ट की खंडपीठ नहीं मिल सकी। वकीलों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा भूभाग प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट से काफी दूर है। किसी मुकदमे की सुनवाई के लिए अधिवक्ताओं और वादकारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। गरीब और मध्यमवर्गीय पक्षकारों के लिए बार-बार प्रयागराज जाना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता है। कई बार यात्रा में ही काफी समय खर्च हो जाता है, जिसका असर मुकदमों की पैरवी पर भी पड़ता है। अधिवक्ताओं के अनुसार देश के कई बड़े राज्यों में क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार हाईकोर्ट की खंडपीठें स्थापित की गई हैं। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे बड़े क्षेत्र को भी न्याय की सुविधा के लिए हाईकोर्ट बेंच मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि बेंच की स्थापना होने से वादकारियों को उनके घर के अपेक्षाकृत नजदीक न्याय मिलने के साथ न्यायिक व्यवस्था पर भी दबाव कम होगा। वकीलों का कहना है कि 1955 से चली आ रही मांग अब 71 वर्ष की हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ। समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर अधिवक्ता आंदोलन करते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार को अब इस मांग को केवल आश्वासन तक सीमित न रखकर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
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वकीलों की प्रमुख मांगें
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ स्थापित की जाए।
बेंच के स्थान को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का जल्द समाधान हो।
केंद्र और प्रदेश सरकार इस संबंध में ठोस पहल करें।
वादकारियों को लंबी दूरी और आर्थिक बोझ से राहत दिलाई जाए।
सात दशक पुरानी मांग को अब आश्वासन के बजाय निर्णय के स्तर तक पहुंचाया जाए।
बोले अधिवक्ता
-हाईकोर्ट की बेंच सालों से चली आ रही है लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो रहा है। लगातार वकील संघर्ष कर रहे हैं। पश्चिम यूपी में यदि बेंच स्थापित हो जाए तो वादकारियों को पांच सौ किलोमीटर का सफर बचेगा और लोगों को सस्ता व सुलभ न्याय मिलेगा। -सर्वजीत सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन
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-हाईकोर्ट की बेंच का पश्चिम यूपी के किसी जिले में स्थापित होना बेहद जरूरी है। इससे वादकारियों को काफी राहत मिलेगी। इस मांग को लेकर वकील लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। -मोहम्मद उसमान, महासचिव बार एसोसिएशन
-हाईकोर्ट की पश्चिम यूपी में बेंच स्थापित होना बेहद जरूरी है। इसके लिए वकील लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। -संजीव यादव, कोषाध्यक्ष बार एसोसिएशन
-हाईकोर्ट की बेंच जरूरी है। लंबे समय से वकील इसको लेकर मांग उठा रहे हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। -जसविंदर सिंह, उपाध्यक्ष बार एसोसिएशन
हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहे वकील
क्रासर
हर शनिवार भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का बार एसोसिएशन ने लिया है निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ता शनिवार को सामूहिक अवकाश पर रहे।
तीन सितंबर को बार एसोसिएशन के सभागार में हुई बैठक में हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से पारित प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया था। इसी को लेकर सामूहिक अवकाश पर रहने का फैसला लिया गया था। इस दौरान हुई
बैठक में अधिवक्ताओं ने संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रत्येक शनिवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। इस दौरान अधिवक्ता किसी भी न्यायिक कार्य में सहयोग नहीं करेंगे। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लंबे समय से हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की जा रही है। आंदोलन को मजबूती देने के लिए रामपुर के अधिवक्ता भी संघर्ष समिति के साथ खड़े हैं। बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद लोधी ने की, जबकि संचालन महासचिव मोहम्मद उस्मान खां ने किया। वरिष्ठ उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट की बेंच को लेकर अधिवक्ता आज सामूहिक अवकाश पर रहे।