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खेत जलमग्न, गांवों की ओर बढ़ा कोसी का पानी
अमर उजाला/ ब्यूरो रामपुर
Updated Mon, 04 Jul 2016 01:05 AM IST
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दढ़ियाल में कोसी का जलस्तर बढ़ने के बाद डूबी फसल।
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पहाड़ों पर हो रही बारिश से कोसी का जल स्तर पर बढ़ गया। उत्तराखंड के रामनगर बांध से कोसी में 20 हजार क्यूसेक पानी और पास किया गया। लालपुर डैम के प्रभारी रमेश ने बताया कि यह पानी 02 जुलाई की शाम को छोड़ा गया था जो कि 03 जुलाई की सुबह यहां पहुंचा। इसके मद्देनजर कोसी नदी पर बने डैम के गेट खोल दिए गए हैं। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने लगा है।
इधर, पालेज और फसलें जलमग्न होने लगी हैं। फसल खराब होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं।
पहाड़ों में कई दिन से तेज बारिश हो रही है, जिससे जलाशयों में पानी फुल हो गया। रामनगर जलाशय से 2 जुलाई को 20 हजार क्यूसेक पानी कोसी में पास किया गया। लिहाजा कोसी का जल स्तर बढ़ गया। लालपुर डैम के सभी गेट खोल दिए गए। कोसी का बहाव तेज हो गया। कोसी से निकलने वाली बड़ी नहर बंद कर दी गई। जल स्तर बढ़ने से नदी के किनारे गांवों की ज्यादातर जमीन जलमग्न हो गई। वहीं जल स्तर बढ़ने से कोसी बैराज का भी काम रुक गया।
निर्माणधीन बैराज तक पहुंचने के लिए रास्ता दलदल बन गया। इधर, स्वार तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने बंदरपुरा, धनौरी बांध का निरीक्षण किया। बताया कि बांध एवं ग्रामीणों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। किसानोें की जलमग्न होकर बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराया जाएगा। गौरतलब हो कि एक दिन पहले 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
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इधर, पालेज और फसलें जलमग्न होने लगी हैं। फसल खराब होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं।
पहाड़ों में कई दिन से तेज बारिश हो रही है, जिससे जलाशयों में पानी फुल हो गया। रामनगर जलाशय से 2 जुलाई को 20 हजार क्यूसेक पानी कोसी में पास किया गया। लिहाजा कोसी का जल स्तर बढ़ गया। लालपुर डैम के सभी गेट खोल दिए गए। कोसी का बहाव तेज हो गया। कोसी से निकलने वाली बड़ी नहर बंद कर दी गई। जल स्तर बढ़ने से नदी के किनारे गांवों की ज्यादातर जमीन जलमग्न हो गई। वहीं जल स्तर बढ़ने से कोसी बैराज का भी काम रुक गया।
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निर्माणधीन बैराज तक पहुंचने के लिए रास्ता दलदल बन गया। इधर, स्वार तहसीलदार राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने बंदरपुरा, धनौरी बांध का निरीक्षण किया। बताया कि बांध एवं ग्रामीणों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। किसानोें की जलमग्न होकर बर्बाद हुई फसलों का सर्वे कराया जाएगा। गौरतलब हो कि एक दिन पहले 15 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
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