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जौहर विवि के तीन भवनों पर लटकी ध्वस्तीकरण की तलवार
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रामपुर। जौहर विवि में ग्राम समाज चकरोड के दायरे में आए विवि के तीन भवनों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक गई है। एसडीएम कोर्ट ने जौहर ट्रस्ट की ओर से दाखिल रिवीजन को खारिज कर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
राजस्व परिषद ने जौहर विवि स्थित चकरोडों पर कब्जा करने के मामले में आजम खां द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने जौहर विवि स्थित करीब 17.5 बीघा जमीन का चिन्हीकरण कर उस पर कब्जा ले लिया था। इस पूरी जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करते हुए इसे आलियागंज के प्रधान की सुपुर्दगी में दे दिया गया था। चकरोड के चिन्हीकरण में जौहर विवि के कैंपस स्थित कुछ भवनों का हिस्सा जद में आ गया था।
बाद में जौहर विवि प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर की तीन ओर से दीवारों को ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया था। इस आदेश के खिलाफ जौहर ट्रस्ट ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2020 तक भवनों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी और तहसीलदार के आदेश के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में निगरानी दाखिल करने के आदेश दिए थे। इस पर जौहर ट्रस्ट ने एसडीएम कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया था। एसडीएम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जौहर ट्रस्ट की रिवीजन को खारिज करते हुए तहसीलदार की कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
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राजस्व परिषद ने जौहर विवि स्थित चकरोडों पर कब्जा करने के मामले में आजम खां द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद प्रशासन ने जौहर विवि स्थित करीब 17.5 बीघा जमीन का चिन्हीकरण कर उस पर कब्जा ले लिया था। इस पूरी जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करते हुए इसे आलियागंज के प्रधान की सुपुर्दगी में दे दिया गया था। चकरोड के चिन्हीकरण में जौहर विवि के कैंपस स्थित कुछ भवनों का हिस्सा जद में आ गया था।
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बाद में जौहर विवि प्रशासन ने विश्वविद्यालय परिसर की तीन ओर से दीवारों को ध्वस्त कर दिया गया था। इसके बाद किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया था। इस आदेश के खिलाफ जौहर ट्रस्ट ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2020 तक भवनों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी और तहसीलदार के आदेश के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में निगरानी दाखिल करने के आदेश दिए थे। इस पर जौहर ट्रस्ट ने एसडीएम कोर्ट में रिवीजन दाखिल किया था। एसडीएम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जौहर ट्रस्ट की रिवीजन को खारिज करते हुए तहसीलदार की कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
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