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जौहर ट्रस्ट ने शर्तों का किया है उल्लंघन, सरकार में निहित की जाए जमीन
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रामपुर। जौहर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई 126 एकड़ जमीन के मामले में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं करने के आरोप में दर्ज वाद की सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने प्रति आपत्ति दाखिल की है। उन्होंने कहा कि जिन शर्तों के साथ ट्रस्ट को 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने और स्टांप ड्यूटी में छूट दी गई थी उनका पालन नहीं किया गया है। साथ ही जमीन को सरकार में निहित करने की बात कही गई है। इस मामले की अगली सुनवाई अब सात अक्तूबर को होगी।
सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर लगभग 126 एकड़ जमीन खरीदी गई थी। यह जमीन जौहर यूनिवर्सिटी के कैंपस के अंदर है। जमीन खरीद के मामले में सरकार की ओर से ट्रस्ट को चैरिटी के काम करने की शर्त के आधार पर स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इस मामले में शिकायत की गई थी कि ट्रस्ट द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। इस आधार पर पूरे मामले की जांच पिछले साल तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी को सौंपी गई थी। तिवारी ने जांच में आरोप को सही पाया था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम के कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था। सुनवाई के लिए वाद एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। एडीएम की कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान पहले तो ट्रस्ट की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई नहीं आया था। पिछली सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल की थी। इस मामले की बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने आपत्ति पर प्रति आपत्ति दाखिल की। प्रति आपत्ति में उन्होंने कहा कि जौहर ट्रस्ट को जिन शर्तों के साथ 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, उसका पालन नहीं किया गया है। पांच साल के अंदर निर्माण कार्य को पूरा करना था, जो पूरा नहीं किया गया है। साथ ही यह शर्त थी कि ग्राम समाज, शत्रु संपत्ति, अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन के साथ-साथ असंक्रमणीय भूमिधरों की जमीन ट्रस्ट के लिए न खरीदी जाए, लेकिन इस शर्त का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि जिस शासनादेश से ट्रस्ट को जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी उसमें इस बात का साफ उल्लेख है कि शर्तों का उल्लंघन करने पर जमीन सरकार में निहित हो जाएगी। जमीन सरकार में निहित हो चुकी है, जिला प्रशासन इसे अपने कब्जे में ले। एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई सात अक्तूबर को होगी।
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सांसद आजम खां की अध्यक्षता वाले मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम पर लगभग 126 एकड़ जमीन खरीदी गई थी। यह जमीन जौहर यूनिवर्सिटी के कैंपस के अंदर है। जमीन खरीद के मामले में सरकार की ओर से ट्रस्ट को चैरिटी के काम करने की शर्त के आधार पर स्टांप शुल्क में छूट दी गई थी। इस मामले में शिकायत की गई थी कि ट्रस्ट द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। इस आधार पर पूरे मामले की जांच पिछले साल तत्कालीन एसडीएम सदर पीपी तिवारी को सौंपी गई थी। तिवारी ने जांच में आरोप को सही पाया था और उन्होंने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर डीएम के कोर्ट में वाद दर्ज कर लिया गया था। सुनवाई के लिए वाद एडीएम (प्रशासन) जेपी गुप्ता की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था। एडीएम की कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान पहले तो ट्रस्ट की ओर से पक्ष रखने के लिए कोई नहीं आया था। पिछली सुनवाई के दौरान ट्रस्ट के अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल की थी। इस मामले की बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने आपत्ति पर प्रति आपत्ति दाखिल की। प्रति आपत्ति में उन्होंने कहा कि जौहर ट्रस्ट को जिन शर्तों के साथ 12.5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, उसका पालन नहीं किया गया है। पांच साल के अंदर निर्माण कार्य को पूरा करना था, जो पूरा नहीं किया गया है। साथ ही यह शर्त थी कि ग्राम समाज, शत्रु संपत्ति, अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन के साथ-साथ असंक्रमणीय भूमिधरों की जमीन ट्रस्ट के लिए न खरीदी जाए, लेकिन इस शर्त का पालन नहीं किया गया है। उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि जिस शासनादेश से ट्रस्ट को जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी उसमें इस बात का साफ उल्लेख है कि शर्तों का उल्लंघन करने पर जमीन सरकार में निहित हो जाएगी। जमीन सरकार में निहित हो चुकी है, जिला प्रशासन इसे अपने कब्जे में ले। एडीएम (प्रशासन) की कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई सात अक्तूबर को होगी।
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