{"_id":"61019f888ebc3e789d23ec18","slug":"ferilizer-reached-at-soicety-rampur-news-mbd39734986","type":"story","status":"publish","title_hn":"सहकारी समितियों पर पहुंचा खाद, किसानों को नहीं होगी दिक्कत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सहकारी समितियों पर पहुंचा खाद, किसानों को नहीं होगी दिक्कत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर। सहकारी समितियों पर खाद की किल्लत का मामला उठने के बाद अब अधिकांश समितियों पर खाद पहुंच गया है। वहीं, जिला कृषि अधिकारी ने भी खाद की कोई समस्या न होना बताया है। साथ ही उन्होंने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं किसी किसान को खाद नहीं मिलता है, तो इसकी जानकारी उन्हें दें, ताकि समस्या का समाधान हो सके।
जिले में तमाम सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं था। किसान यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे थे। घंटों लाइनों में लगने के बाद खाद न मिलने के कारण किसानों को मायूस होकर बिना खाद के ही वापस लौटना पड़ रहा था। अमर उजाला ने किसानों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया, इसके बाद बुधवार को अधिकांश सहकारी समितियों पर खाद पहुंच गया। जिला कृषि अधिकारी नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में खरीफ फसलों की बुवाई लगभग समाप्त हो चुकी है। किसानों को इस समय फसलों के लिए यूरिया, एनपीके, डीएपी आदि उर्वरकों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। किसी भी प्रकार के उर्वरकों की कोई भी कमी नहीं है। यूरिया उर्वरक की लक्ष्य के अनुसार लगभग 54000 मीट्रिक टन की आवश्यकता पूरे खरीफ मौसम में होती है।
खरीफ में 28 जुलाई तक 43383 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जबकि गत वर्ष इसी समय अवधि में केवल 41410 मीट्रिक टन यूरिया का ही क्रय कृषकों द्वारा किया गया था। माह अगस्त में लगभग 6000 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होगी, जबकि वर्तमान में जनपद में 7200 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है तथा माह अगस्त एवं सितम्बर में कुल 11000 मीट्रिक टन से अधिक यूरिया जनपद में और प्राप्त होगा। जनपद की मांग से कहीं ज्यादा उपलब्धता जनपद में हैं। कुछ सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन में तकनीकी समस्या के कारण उर्वरक का विक्रय कुछ घंटों के लिए समस्या आई थी, जिसे ठीक करा दिया गया है। यदि किसानों को खाद के संबंध में कोई समस्या होती है, तो वे तुरंत इसकी जानकारी दें, ताकि समस्या का समाधान कराया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में तमाम सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं था। किसान यूरिया के लिए दर-दर भटक रहे थे। घंटों लाइनों में लगने के बाद खाद न मिलने के कारण किसानों को मायूस होकर बिना खाद के ही वापस लौटना पड़ रहा था। अमर उजाला ने किसानों की इस समस्या को प्रमुखता से उठाया, इसके बाद बुधवार को अधिकांश सहकारी समितियों पर खाद पहुंच गया। जिला कृषि अधिकारी नरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में खरीफ फसलों की बुवाई लगभग समाप्त हो चुकी है। किसानों को इस समय फसलों के लिए यूरिया, एनपीके, डीएपी आदि उर्वरकों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि जिले में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। किसी भी प्रकार के उर्वरकों की कोई भी कमी नहीं है। यूरिया उर्वरक की लक्ष्य के अनुसार लगभग 54000 मीट्रिक टन की आवश्यकता पूरे खरीफ मौसम में होती है।
विज्ञापन
खरीफ में 28 जुलाई तक 43383 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जबकि गत वर्ष इसी समय अवधि में केवल 41410 मीट्रिक टन यूरिया का ही क्रय कृषकों द्वारा किया गया था। माह अगस्त में लगभग 6000 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता होगी, जबकि वर्तमान में जनपद में 7200 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है तथा माह अगस्त एवं सितम्बर में कुल 11000 मीट्रिक टन से अधिक यूरिया जनपद में और प्राप्त होगा। जनपद की मांग से कहीं ज्यादा उपलब्धता जनपद में हैं। कुछ सहकारी समितियों पर पीओएस मशीन में तकनीकी समस्या के कारण उर्वरक का विक्रय कुछ घंटों के लिए समस्या आई थी, जिसे ठीक करा दिया गया है। यदि किसानों को खाद के संबंध में कोई समस्या होती है, तो वे तुरंत इसकी जानकारी दें, ताकि समस्या का समाधान कराया जा सके।
विज्ञापन