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कस्तूरबा गांधी आवासीय वपिद्यालय में बड़े घोटाले की आशंका

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 11:03 PM IST
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draw back found in kasturba school
रामपुर। राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छापेमारी की। इस दौरान उन्होंने बड़े घोटाले की आशंका जताई है। यहां न तो बच्चियों को फलों का वितरण होता है और न ही सोने के लिए पर्याप्त तखत हैं। खाने की गुणवत्ता भी बेहद खराब है। शौचालयों में लाइटें तक नहीं जलती हैं। यही नहीं किसी भी सामान का रिकार्ड तक नहीं दिखाया जा सका। इस पर उपाध्यक्षा ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूरे विद्यालय के स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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मंगलवार शाम को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सुषमा सिंह अचानक बगीचा ऐमना स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय पहुंच गईं। उनके साथ सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नवीन कुमार सिंह एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्याम लाल थे। कुछ देर बाद बीएसए ऐश्वर्या लक्ष्मी आ गईं। यहां उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया। देखा तो पता लगा कि स्कूल की तीन कक्षाओं में से एक में ताला लगा हुआ था। करीब दो घंटे तक स्टाफ नहीं पहुंचा तो उन्होंने ताला तुड़वा दिया। कमरे में सात बड़े और इतने ही छोटे कूकर निकले। सात पंखे और कुछ जूते एवं चप्पल रखे थे। सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी सुधांशू कश्यप ने कमरे की बेंच और अन्य पढ़ाई से संबंधित सामान बिना बीएसए की अनुमति लिए ही बाहर निकलवा दिया था, जिसके बाद यह सामान रखा गया। उन्होंने इस सामान से संबंधित दस्तावेज मांगे तो वह भी नहीं होने की बात कही। स्कूल के शौचालयों की स्थिति काफी खराब थी। लाइटें तक नहीं जलती हैं। यहां रहने वाली सौ छात्राओं के लिए महज 39 तखत हैं, जिन पर स्टाफ भी सोता है। एक तखत पर तीन बालिकाएं सोती हैं। इसके अलावा बच्चियों से बात की तो पता लगा कि उन्हें मंगलवार को फल वितरित नहीं किए गए हैं। किचन के सामान से संबंधित भी कोई अभिलेख नहीं मिले। यहां तक कि किचन में साबुन तक नहीं था। बिस्किट, बेसन भी नहीं था। बिना टेंडर के ही सेनेट्री नेपकिन ले लिए गए। स्टॉक रजिस्टर में कोई बिल लगा हुआ नहीं था। दूध, फल और सब्जियों की भी रसीदें नहीं थीं। वार्डन सुमति चौहान ने बताया कि लेखाकार बाला स्कूल की अलमारी की चाबियां घर लेकर चली जाती हैं। उपाध्यक्ष ने बीएसए समेत सभी कर्मचारियों को जमकर हड़काया। उन्होंने बताया कि स्कूल के लिए हर साल करीब 50 लाख का बजट सरकार से मिलता है और इतने पैसे में छात्राओं के लिए मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। ठंडे पानी में छात्राओं से खुद ही कपड़े और बर्तन साफ कराए जाते हैं। ऐसे में इस बात इनकार नहीं किया जा सकता कि यहां बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ हो। इसकी जांच होगी। बीएसए ने महिला होने के बाद भी छात्राओं की सुरक्षा एवं सुविधाओं से समझौता किया, जो बेहद शर्मनाक है। इसके लिए बीएसए ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल का पूरा स्टाफ बदला जाएगा। इसके बाद उन्होंने निरीक्षण भवन में अधिकारियों की बैठक ली, जहां डायल 181 में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या एवं जिले में संचालित वृद्घाश्रमों की जानकारी प्राप्त की। उपाध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं का उत्पीड़न किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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