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बच्चों ने नंबर पाए कम, कॉपियां अधूरी, अच्छे रिजल्ट के लिए स्कूलों में अब मेहनत करेंगे पूरी
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रामपुर। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई होने से विद्यार्थी कॉपियों में पूरा काम नहीं कर पाए। वहीं अबकी जैसे-तैसे बच्चों ने वार्षिक परीक्षा दी, लेकिन अब परीक्षाओं में नंबर कम आए। बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया है लेकिन अब नए सत्र के लिए स्कूल और अभिभावक मिलकर बच्चों को मोटीवेट करेंगे ताकि वे फिर से शत-प्रतिशत रिजल्ट दे सकें।
पिछले सत्र में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होने के कारण बच्चों ने पढ़ाई और परीक्षा को गंभीरता से नहीं लिया। साल भर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हुईं लेकिन, परीक्षाएं ऑफलाइन हुईं। दो साल से ऑनलाइन पढ़ रहे बच्चों की यह मानसिकता बन गई थी कि इस वर्ष भी वार्षिक परीक्षा ऑनलाइन होगी। वार्षिक परीक्षा के कुछ समय पहले जब विद्यालय खुले तो अधिकांश विद्यार्थियो के कॉपियों में काम भी पूरे नहीं थे। शिक्षकों ने बताया कि कक्षाओं में बैठाकर ही बच्चों का पहले तो काम पूरा करवाया गया। हालांकि, ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वार्षिक परीक्षा के अंक पत्र में विद्यार्थियों का प्राप्तांक का प्रतिशत बहुत कम रहा। हर विद्यालय के लगभग 60 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के रिजल्ट का यही हाल है। शिक्षक आपस में बैठक कर यह प्लानिंग कर रहे हैं कि पिछले दो सालों में बच्चों की शिक्षा में जो कमी आई है, उसकी भरपाई इस नए सत्र में करनी ही है। विद्यालय प्रशासन लगातार बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उनको बच्चों की स्थिति समझा रहे हैं कि बच्चे को इतने कम अंकों के साथ अगली कक्षा में भेज तो रहे हैं लेकिन, अगली कक्षा की मेहनत बहुत ज्यादा होगी। इसके लिए बच्चा, अभिभावक और शिक्षक तीनों को तैयार रहना पड़ेगा।
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पिछले सत्र में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित होने के कारण बच्चों ने पढ़ाई और परीक्षा को गंभीरता से नहीं लिया। साल भर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हुईं लेकिन, परीक्षाएं ऑफलाइन हुईं। दो साल से ऑनलाइन पढ़ रहे बच्चों की यह मानसिकता बन गई थी कि इस वर्ष भी वार्षिक परीक्षा ऑनलाइन होगी। वार्षिक परीक्षा के कुछ समय पहले जब विद्यालय खुले तो अधिकांश विद्यार्थियो के कॉपियों में काम भी पूरे नहीं थे। शिक्षकों ने बताया कि कक्षाओं में बैठाकर ही बच्चों का पहले तो काम पूरा करवाया गया। हालांकि, ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वार्षिक परीक्षा के अंक पत्र में विद्यार्थियों का प्राप्तांक का प्रतिशत बहुत कम रहा। हर विद्यालय के लगभग 60 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के रिजल्ट का यही हाल है। शिक्षक आपस में बैठक कर यह प्लानिंग कर रहे हैं कि पिछले दो सालों में बच्चों की शिक्षा में जो कमी आई है, उसकी भरपाई इस नए सत्र में करनी ही है। विद्यालय प्रशासन लगातार बच्चों के अभिभावकों से मिलकर उनको बच्चों की स्थिति समझा रहे हैं कि बच्चे को इतने कम अंकों के साथ अगली कक्षा में भेज तो रहे हैं लेकिन, अगली कक्षा की मेहनत बहुत ज्यादा होगी। इसके लिए बच्चा, अभिभावक और शिक्षक तीनों को तैयार रहना पड़ेगा।
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