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Rampur News: जिला कारागार में शुरू हुई डिजिटल लाइब्रेरी, बंदियों को पढ़ाई के साथ मिलेगा तकनीकी ज्ञान
Sat, 29 Aug 2026 12:25 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Sat, 29 Aug 2026 12:25 AM IST
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रामपुर। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों के जीवन में बदलाव लाने के लिए डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत की गई है। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस लाइब्रेरी के माध्यम से बंदियों को पढ़ाई, ज्ञानवर्धक सामग्री और तकनीकी जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा। इसका उद्देश्य जेल से बाहर निकलने के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना है।
जिला कारागार में वर्तमान में करीब 650 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। जेल प्रशासन का मानना है कि खाली समय का सदुपयोग कराकर बंदियों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
इसी दिशा में शासन के सहयोग से डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की गई है। लाइब्रेरी में कंप्यूटर सिस्टम, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, प्रोजेक्टर और टैबलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बंदी यहां विभिन्न विषयों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकेंगे। किताबों के साथ डिजिटल माध्यम से शैक्षिक एवं ज्ञानवर्धक सामग्री तक उनकी पहुंच होगी।
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सुबह की शुरुआत अब किताबों से
जेल प्रशासन के अनुसार बंदी प्रतिदिन सुबह लाइब्रेरी में पहुंचकर अपने पसंदीदा विषयों की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पढ़ाई के साथ उन्हें ई-बुक्स, शैक्षिक सामग्री और प्रेरक वीडियो देखने का अवसर भी मिलेगा। इससे उनमें सीखने की रुचि बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी मजबूत होगा। डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए बंदियों को डिजिटल साक्षरता से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिन बंदियों को कंप्यूटर चलाने का अनुभव नहीं है, वे यहां से बुनियादी कंप्यूटर और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल सीख सकेंगे।
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तकनीकी ज्ञान से रोजगार की राह होगी आसान
जेल प्रशासन का मानना है कि आज के दौर में तकनीकी जानकारी रोजगार के लिए बेहद जरूरी है। डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से बंदियों को ऐसी जानकारियां उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो जेल से बाहर निकलने के बाद उनके लिए उपयोगी साबित हों। इससे वे नए कौशल सीखकर रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
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डिजिटल लाइब्रेरी बंदियों के सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और भविष्य के लिए तैयार करना है। पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से बंदियों में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। -राजेश यादव, जेल अधीक्षक
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जिला कारागार में वर्तमान में करीब 650 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। जेल प्रशासन का मानना है कि खाली समय का सदुपयोग कराकर बंदियों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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इसी दिशा में शासन के सहयोग से डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की गई है। लाइब्रेरी में कंप्यूटर सिस्टम, हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी, प्रोजेक्टर और टैबलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। बंदी यहां विभिन्न विषयों से संबंधित जानकारी हासिल कर सकेंगे। किताबों के साथ डिजिटल माध्यम से शैक्षिक एवं ज्ञानवर्धक सामग्री तक उनकी पहुंच होगी।
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सुबह की शुरुआत अब किताबों से
जेल प्रशासन के अनुसार बंदी प्रतिदिन सुबह लाइब्रेरी में पहुंचकर अपने पसंदीदा विषयों की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पढ़ाई के साथ उन्हें ई-बुक्स, शैक्षिक सामग्री और प्रेरक वीडियो देखने का अवसर भी मिलेगा। इससे उनमें सीखने की रुचि बढ़ने के साथ आत्मविश्वास भी मजबूत होगा। डिजिटल लाइब्रेरी के जरिए बंदियों को डिजिटल साक्षरता से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। जिन बंदियों को कंप्यूटर चलाने का अनुभव नहीं है, वे यहां से बुनियादी कंप्यूटर और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल सीख सकेंगे।
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तकनीकी ज्ञान से रोजगार की राह होगी आसान
जेल प्रशासन का मानना है कि आज के दौर में तकनीकी जानकारी रोजगार के लिए बेहद जरूरी है। डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से बंदियों को ऐसी जानकारियां उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो जेल से बाहर निकलने के बाद उनके लिए उपयोगी साबित हों। इससे वे नए कौशल सीखकर रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
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डिजिटल लाइब्रेरी बंदियों के सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और भविष्य के लिए तैयार करना है। पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान के माध्यम से बंदियों में बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। -राजेश यादव, जेल अधीक्षक