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मद,अभिमान व मान का त्यागकर समता धारण करना ही है उत्तम मार्दव धर्म
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रामपुर। दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। उत्तम मार्दव धर्म अपनाने का संदेश दिया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समां बांध दिया। जिनालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। सुबह छह बजे भगवान जिनेंद्र का पूजन अभिषेक के बाद विधान हुए। जैन विद्वानों ने तत्वार्थ सूत्र का वाचन किया। शाम को आरती के साथ उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन हुए।
शनिवार को दूसरे दिन फूटा महल स्थित दिगंबर जैन मंदिर में टीकमगढ़ से आए पंडित विवेक शास्त्री ने मंत्रोचार के बीच पांच जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कराया। अभिषेक प्रमोद कुमार जैन ने किया। शांतिधारा दिनेश कुमार जैन खंडेलवाल के परिवार की ओर से हुई। देवेंद्र कुमार जैन ने किया जबकि शांति धारा समर्पण जैन ने की। आरती सर्वज्ञ जैन खंडेलवाल ने की। देव शास्त्र गुरु, सोलह कारण पूजा, पंच मेरु पूजन, मुनि सुब्रतनाथ भगवान, अच्छिहत पार्श्वनाथ सामूहिक पूजन किया गया। उत्तम मार्दव धर्म के विधान से साथ सुबह की पूजा हुई। संध्याकालीन आरती भाव नृत्य एवं संगीत के साथ हुई। आरती के बाद पंडित विवेक शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि मार्दव अर्थात मान (घमंड) तथा दीनता-हीनता का अभाव। वह नाश जब आत्मा के ज्ञान/श्रद्धान सहित होता है, तब उत्तम मार्दव धर्म नाम पाता है। जब सब कुछ क्षणभंगुर है,टिकने वाला नहीं है, कुछ समय पश्चात नाश हो जाएगा, तो किसका घमंड करना और किस बात की दीनता माननी। जब सभी जीवों के पास समान रूप से अनंत गुण हैं, तो किसी में भी क्या विशेषता रही।
प्रवचन के बाद समीर ने भजन प्रस्तुत किया। विचार बिंदु कार्यक्रम में श्रीया जैन ने महासती चंदना के विचार प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक कार्यक्रम में शो योर टैलेंट कार्यक्रम कीनीतू जैन और उनके ग्रुप ने की। श्रीया ने बहुरुपी पोशाक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लकी ड्रा भी निकाले गए। कार्यक्रम का संचालन डा. शीनू जैन ने किया। कस्तूर चंद जैन, सुनील कुमार, विशाल जैन, आशीष जैन, शुभम जैन, अविरल जैन, अजय जैन, सुमन जैन, लक्ष्मी जैन, रुकमणी जैन, नीता जैन, वीना जैन आदि मौजूद रहे। उधर सिविल लाइंस स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मथुरा चौरासी से आए पंडित रितेश शास्त्री ने पूजा-अर्चना कराई।प्रथम अभिषेक पंकज कुमार जैन व शांति धारा आलोक कुमार जैन द्वारा की गई। सभी कार्यक्रम डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन एवं शिखर चंद जैन के सानिध्य में किए गए। शाम को आरती व प्रवचन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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शनिवार को दूसरे दिन फूटा महल स्थित दिगंबर जैन मंदिर में टीकमगढ़ से आए पंडित विवेक शास्त्री ने मंत्रोचार के बीच पांच जिन प्रतिमाओं का अभिषेक कराया। अभिषेक प्रमोद कुमार जैन ने किया। शांतिधारा दिनेश कुमार जैन खंडेलवाल के परिवार की ओर से हुई। देवेंद्र कुमार जैन ने किया जबकि शांति धारा समर्पण जैन ने की। आरती सर्वज्ञ जैन खंडेलवाल ने की। देव शास्त्र गुरु, सोलह कारण पूजा, पंच मेरु पूजन, मुनि सुब्रतनाथ भगवान, अच्छिहत पार्श्वनाथ सामूहिक पूजन किया गया। उत्तम मार्दव धर्म के विधान से साथ सुबह की पूजा हुई। संध्याकालीन आरती भाव नृत्य एवं संगीत के साथ हुई। आरती के बाद पंडित विवेक शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि मार्दव अर्थात मान (घमंड) तथा दीनता-हीनता का अभाव। वह नाश जब आत्मा के ज्ञान/श्रद्धान सहित होता है, तब उत्तम मार्दव धर्म नाम पाता है। जब सब कुछ क्षणभंगुर है,टिकने वाला नहीं है, कुछ समय पश्चात नाश हो जाएगा, तो किसका घमंड करना और किस बात की दीनता माननी। जब सभी जीवों के पास समान रूप से अनंत गुण हैं, तो किसी में भी क्या विशेषता रही।
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प्रवचन के बाद समीर ने भजन प्रस्तुत किया। विचार बिंदु कार्यक्रम में श्रीया जैन ने महासती चंदना के विचार प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक कार्यक्रम में शो योर टैलेंट कार्यक्रम कीनीतू जैन और उनके ग्रुप ने की। श्रीया ने बहुरुपी पोशाक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लकी ड्रा भी निकाले गए। कार्यक्रम का संचालन डा. शीनू जैन ने किया। कस्तूर चंद जैन, सुनील कुमार, विशाल जैन, आशीष जैन, शुभम जैन, अविरल जैन, अजय जैन, सुमन जैन, लक्ष्मी जैन, रुकमणी जैन, नीता जैन, वीना जैन आदि मौजूद रहे। उधर सिविल लाइंस स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मथुरा चौरासी से आए पंडित रितेश शास्त्री ने पूजा-अर्चना कराई।प्रथम अभिषेक पंकज कुमार जैन व शांति धारा आलोक कुमार जैन द्वारा की गई। सभी कार्यक्रम डॉ ज्ञानेंद्र कुमार जैन एवं शिखर चंद जैन के सानिध्य में किए गए। शाम को आरती व प्रवचन का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
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