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बगैर यूनीफार्म, बैग और किताबों के नौनिहाल जाएंगे स्कूल
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रामपुर। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहाल बगैर स्कूल ड्रेस, बैग के ही स्कूल जाएंगे। पांच महीने बाद स्कूल जा रहे अधिकांश बच्चों के पास पाठय पुस्तकें भी नहीं होंगी।वहीं, शासन द्वारा ड्रेस, बैग स्वेटर और जूते मौजे के लिए धन उपलब्ध न कराने से छात्र छात्राओं को परेशानी हो रही है।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप कम होने के बाद शासन ने परिषदीय स्कूल एक जुलाई से खोल दिए गए। लेकिन बच्चों को स्कूल जाने से मना करने के आदेश दिए थे। 24 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक के बच्चों की कक्षाओं का संचालन शुरू हो गया। करीब पांच माह बाद एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं का भी स्कूलों में संचालन शुरू हो जाएगा। सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, बैग, स्वेटर और जूते मौजे दिए जाते हैं। लेकिन, अभी तक इन बच्चों को यूनीफार्म, बैग, स्वेटर और जूते मौजे नहीं मिले हैं। करीब एक हफ्ते से कक्षा छह से आठ तक के अधिकतर बच्चे स्कूलों में जा रहे हैं। मंगलवार से पूरी तरह कक्षाएं शुरु हो जाएंगी।
शासन की ओर से बच्चों के खाते में भेजा जाना था धन
सरकार के घोषणा की थी कि इस बार परिषदीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र छात्राओं को यूनिफार्म, बैग, स्वेटर और जूते मौजों को खरीदने के लिए बच्चों के खातों में नगद धनराशि भेजी जाएगी। लेकिन, अभी तक शासन से इस ओर कोई निर्णय नहीं लिया है। न तो बच्चों को जूते,मौजे, बैग और यूनिफार्म ही दी गई है और न ही अभी तक बच्चों के खातों में डालने के लिए कोई धनराशि ही दी गई है।
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फैक्ट फाइल-
जिले के परिषदीय, माध्यमिक और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में करीब 1.82 लाख छात्र छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। जिसमें से कक्षा एक से पांच तक के करीब 1.21 लाख और कक्षा छह से आठ तक के करीब 53 हजार बच्चे शामिल हैं।
बैग, ड्रेस, जूते और मौजे के बारे में शासन से अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। जैसे ही कोई निर्देश जारी होगा, उसके अनुसार ही कार्य किया जाएगा। प्रकरण शासन स्तर पर लंबित है।वहीं कुल मांग की 75 फीसदी पाठ्य पुस्तकें ही जिला स्तर पर पहुंची हैं। जिनमें से नगर क्षेत्र के सभी 56 स्कूलों में अभी तक प्राप्त पुस्तकों को पहुंचाया जा चुका है। अन्य ब्लाकों को पाठय पुस्तकें पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है। सप्ताह भर में अन्य सभी ब्लाक संसाधन केंद्रों के माध्यम से स्कूलों तक किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
- कल्पना सिंह, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप कम होने के बाद शासन ने परिषदीय स्कूल एक जुलाई से खोल दिए गए। लेकिन बच्चों को स्कूल जाने से मना करने के आदेश दिए थे। 24 अगस्त से कक्षा छह से आठ तक के बच्चों की कक्षाओं का संचालन शुरू हो गया। करीब पांच माह बाद एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं का भी स्कूलों में संचालन शुरू हो जाएगा। सरकार की ओर से परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, बैग, स्वेटर और जूते मौजे दिए जाते हैं। लेकिन, अभी तक इन बच्चों को यूनीफार्म, बैग, स्वेटर और जूते मौजे नहीं मिले हैं। करीब एक हफ्ते से कक्षा छह से आठ तक के अधिकतर बच्चे स्कूलों में जा रहे हैं। मंगलवार से पूरी तरह कक्षाएं शुरु हो जाएंगी।
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शासन की ओर से बच्चों के खाते में भेजा जाना था धन
सरकार के घोषणा की थी कि इस बार परिषदीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र छात्राओं को यूनिफार्म, बैग, स्वेटर और जूते मौजों को खरीदने के लिए बच्चों के खातों में नगद धनराशि भेजी जाएगी। लेकिन, अभी तक शासन से इस ओर कोई निर्णय नहीं लिया है। न तो बच्चों को जूते,मौजे, बैग और यूनिफार्म ही दी गई है और न ही अभी तक बच्चों के खातों में डालने के लिए कोई धनराशि ही दी गई है।
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फैक्ट फाइल-
जिले के परिषदीय, माध्यमिक और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में करीब 1.82 लाख छात्र छात्राएं शिक्षा ग्रहण करते हैं। जिसमें से कक्षा एक से पांच तक के करीब 1.21 लाख और कक्षा छह से आठ तक के करीब 53 हजार बच्चे शामिल हैं।
बैग, ड्रेस, जूते और मौजे के बारे में शासन से अभी तक कोई निर्देश नहीं आया है। जैसे ही कोई निर्देश जारी होगा, उसके अनुसार ही कार्य किया जाएगा। प्रकरण शासन स्तर पर लंबित है।वहीं कुल मांग की 75 फीसदी पाठ्य पुस्तकें ही जिला स्तर पर पहुंची हैं। जिनमें से नगर क्षेत्र के सभी 56 स्कूलों में अभी तक प्राप्त पुस्तकों को पहुंचाया जा चुका है। अन्य ब्लाकों को पाठय पुस्तकें पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है। सप्ताह भर में अन्य सभी ब्लाक संसाधन केंद्रों के माध्यम से स्कूलों तक किताबें पहुंचा दी जाएंगी।
- कल्पना सिंह, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी