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पहले मजदूर बाद में राजमिस्त्री दर्शाकर निकाला भुगतान
ब्यूूराे/रामपुर
Updated Mon, 22 Feb 2016 11:15 PM IST
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मनरेगा और इंदिरा आवासों के सोशल ऑडिट में घपला दर घपला पकड़ में आ रहा है।
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अलफगंज गांव में भी मजदूरों को राजमिस्त्री दर्शाकर भुगतान निकाल लिया।
खड़ंजों में पुरानी ईंटें लगवा दी गईं। इंदिरा आवासों के नाम पर भी अवैध
वसूली की गई। शाहबाद के गांवों में मनरेगा और इंदिरा आवास योजना का सोशल
ऑडिट कराया जा रहा है।
2014-15 में भी मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी की गई। शाहबाद में अब तक 48 गांवों का सोशल ऑडिट आ चुका है। अधिकतर गांवों का घपला पकड़ में आ चुका है। टीम ने अलफगंज गांव में भी मनरेगा और इंदिरा आवासों का सोशल ऑडिट किया।
इसमें पता चला कि जाब कार्ड धारकों को पहले मजदूर और फिर उन्हें राजमिस्त्री दर्शाकर डबल भुगतान निकाल लिया गया। इतना ही गांवों की गलियों में पुरानी ईंटों का खड़ंजा डलवाया गया। बाद में नई ईंटें दर्शाकर अधिक भुगतान निकाल लिया गया।
गांव में चार इंदिरा आवास बनवाए गए। लाभार्थियों ने खुली बैठक में आरोप लगाया कि आवासों के नाम पर 20-20 हजार रुपये लिए गए हैं। इसलिए आवास पूर्ण नहीं हो सके। गांव में कार्यों के बोर्ड भी नहीं लगाए, जबकि उनके नाम पर भुगतान पहले ही निकाल लिया गया।
ऑडिट के दौरान सचिव और तकनीकी सहायक भी मौजूद नहीं रहे। मजदूरों ने बताया कि उनके जॉब कार्ड भी रोजगार सेवक ने अपने पास रख लिए हैं। ऑडिट रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंपी जाएगी।
2014-15 में भी मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी की गई। शाहबाद में अब तक 48 गांवों का सोशल ऑडिट आ चुका है। अधिकतर गांवों का घपला पकड़ में आ चुका है। टीम ने अलफगंज गांव में भी मनरेगा और इंदिरा आवासों का सोशल ऑडिट किया।
इसमें पता चला कि जाब कार्ड धारकों को पहले मजदूर और फिर उन्हें राजमिस्त्री दर्शाकर डबल भुगतान निकाल लिया गया। इतना ही गांवों की गलियों में पुरानी ईंटों का खड़ंजा डलवाया गया। बाद में नई ईंटें दर्शाकर अधिक भुगतान निकाल लिया गया।
गांव में चार इंदिरा आवास बनवाए गए। लाभार्थियों ने खुली बैठक में आरोप लगाया कि आवासों के नाम पर 20-20 हजार रुपये लिए गए हैं। इसलिए आवास पूर्ण नहीं हो सके। गांव में कार्यों के बोर्ड भी नहीं लगाए, जबकि उनके नाम पर भुगतान पहले ही निकाल लिया गया।
ऑडिट के दौरान सचिव और तकनीकी सहायक भी मौजूद नहीं रहे। मजदूरों ने बताया कि उनके जॉब कार्ड भी रोजगार सेवक ने अपने पास रख लिए हैं। ऑडिट रिपोर्ट जिला विकास अधिकारी को सौंपी जाएगी।