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रामपुर की नहरें 21 से होंगी पानी से लबालब, कर सानों को सिंचाई में मिलेगी मदद
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रामपुर। जिले की नहरें 21 दिसंबर से पानी से लबालब होंगी। इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से सभी 71 नहरों की सफाई का काम पूरा कर लिया गया है, जिसके बाद अब पानी छोड़ा जाएगा। इससे किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई में मदद मिलेगी। इस नहर सिस्टम से करीब 33 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी।
बरसात के बाद किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों की मदद ली जाती है। इसके लिए वर्तमान में जिले में 71 नहरें संचालित हैं, जिनके जरिए फसलों की सिंचाई की जाती है। हर साल नहरों की सफाई कराई जाती है। वहीं इस साल की बात की जाए तो इस साल बाढ़ आने की वजह से सिंचाई सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचा है। भाखड़ा नदी से निकलने वाली सभी 30 नहरों के शटर बह गए थे। जबकि, कोसी कैनाल के 17 गेट जर्जर हो गए थे।
वहीं, अपर कोसी के छह और खंडिया रजवाहा के दो गेट जर्जर होने की वजह से बदहाल थे, जिससे नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने में दिक्कत होती थी। इसके अलावा बरसात के बाद नहरों में कूड़ा करकट और घास फूंस आदि हो गई थी, जिससे पानी की निकासी में दिक्कतें आतीं थीं।
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लिहाजा, सिंचाई विभाग की ओर से व्यापक स्तर पर नहरों की सफाई कराई गई। सभी शटर और गेट बनवाए गए। अब तक 71 नहरों की सफाई पूरी तरह से कराई जा चुकी है, जिसके बाद अब 21 दिसंबर से इन नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे किसानों को फसलों की सिंचाई करने में मदद मिलेगी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सियाराम ने बताया कि 71 नहरों की लंबाई 371 किलोमीटर है। इससे करीब 33 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी।
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सिंचाई सिस्टम को दुरुस्त करने में खर्च हुए करीब दो करोड़ रुपये
रामपुर। जिले के सिंचाई सिस्टम को दुरुस्त करने में करीब दो करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे 71 नहरों की सफाई कराई गई, जबकि 55 गेटों को दुरुस्त कराया गया। इसमें दस नए गेट बनाए गए, जबकि सात गेटों की मरम्मत कराई गई। भाखड़ा नदी से निकलने वाली 30 नहरों के शटर बनवाए गए।
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बरसात के बाद किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों की मदद ली जाती है। इसके लिए वर्तमान में जिले में 71 नहरें संचालित हैं, जिनके जरिए फसलों की सिंचाई की जाती है। हर साल नहरों की सफाई कराई जाती है। वहीं इस साल की बात की जाए तो इस साल बाढ़ आने की वजह से सिंचाई सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचा है। भाखड़ा नदी से निकलने वाली सभी 30 नहरों के शटर बह गए थे। जबकि, कोसी कैनाल के 17 गेट जर्जर हो गए थे।
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वहीं, अपर कोसी के छह और खंडिया रजवाहा के दो गेट जर्जर होने की वजह से बदहाल थे, जिससे नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने में दिक्कत होती थी। इसके अलावा बरसात के बाद नहरों में कूड़ा करकट और घास फूंस आदि हो गई थी, जिससे पानी की निकासी में दिक्कतें आतीं थीं।
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लिहाजा, सिंचाई विभाग की ओर से व्यापक स्तर पर नहरों की सफाई कराई गई। सभी शटर और गेट बनवाए गए। अब तक 71 नहरों की सफाई पूरी तरह से कराई जा चुकी है, जिसके बाद अब 21 दिसंबर से इन नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इससे किसानों को फसलों की सिंचाई करने में मदद मिलेगी। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सियाराम ने बताया कि 71 नहरों की लंबाई 371 किलोमीटर है। इससे करीब 33 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी।
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सिंचाई सिस्टम को दुरुस्त करने में खर्च हुए करीब दो करोड़ रुपये
रामपुर। जिले के सिंचाई सिस्टम को दुरुस्त करने में करीब दो करोड़ रुपये खर्च हुए। इससे 71 नहरों की सफाई कराई गई, जबकि 55 गेटों को दुरुस्त कराया गया। इसमें दस नए गेट बनाए गए, जबकि सात गेटों की मरम्मत कराई गई। भाखड़ा नदी से निकलने वाली 30 नहरों के शटर बनवाए गए।